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चंद रोज पहले तक यहां भी धड़कती थी जिंदगी
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 01 Feb 2015 10:42 AM IST
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अरनिया सेक्टर के ‘महाशयां दे कोठे’ गांव में शनिवार को पूरी तरह सन्नाटा छा गया। पाकिस्तानी गोलाबारी के चलते बार बार घर छोड़ने की पीड़ा से आजिज आकर सभी ग्रामीण शनिवार को एक बार फिर सुरक्षित स्थानों की ओर निकल गए।
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पाक गोलाबारी में मारी गई सत्या देवी के पति छज्जू राम का कहना था कि गांव के सभी लोग मजदूरी करते हैं। कहीं भी गुजारा कर लेंगे। पर अब यहां नहीं रह सकते। जरा सा धमाका होने पर दिल दहल उठता है और कलेजा मुंह को आता है।
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वीरवार रात को पाकिस्तान की ओर से अरनिया सेक्टर में की गई भीषण गोलाबारी की गई थी। अरनिया कसबे और आसपास के अन्य गांवों के बहुत से लोगों ने दहशत में शुक्रवार को ही महिलाओं और बच्चों को रिश्तेदारों के घरों अथवा सुरक्षित स्थानों में भेज दिया था।
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अरनिया सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सबसे करीब स्थित ‘महाशयां दे कोठे’ गांव के बहुत से ग्रामीण अभी गांव में ही रुके हुए थे। पर शनिवार को करीब 350 की आबादी वाले इस गांव के सभी परिवार यहां से चले गए।
जिस गांव में एक दिन पहले तक चहल पहल थी, हर आंगन में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है। बीते वर्ष अक्तूबर में पाकिस्तान की ओर से की गई गोलाबारी में इस गांव की दो महिलाओं समेत चार लोगों की मौत हो गई थी।
एक बार फिर पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी किए जाने से ग्रामीण फिर दहशत में हैं। कोई ग्रामीण फिर से नापाक गोलियों का शिकार न बने, शायद इसी दहशत में मजदूरी कर गुजारा करने वाले इस गांव के सभी परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए।