महिलाओं को भी जकड़ रहा तनाव और नशा
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तनाव और नशा जम्मू संभाग की महिलाओं पर भी हावी होता जा रहा है। इसका प्रमाण ड्रग डी एडिक्शन सेंटर में आ रहे मामलों में मिलता है। ड्रग डी एडिक्शन, मेंटल हेल्थ एंड काउंसिलिंग सेंटर में तनाव और नशे की गिरफ्त में कई मामले ऐसे पहुंच रहे हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं।
राज्य पुलिस द्वारा गांधीनगर पुलिस लाइन में पिछले डेढ़ वर्ष से चलाए जा रहे डी एडिक्शन सेंटर के आंकड़ों की तरफ गौर किया जाए तो एक हजार नौ के करीब मामले अब तक आए हैं, जिनमें सौ के लगभग महिलाएं हैं। इन मामलों में ज्यादातर नशे और डिप्रेशन की समस्या से ग्रस्त महिलाएं हैं।
सेंटर में तैनात मनोचिकित्सक अनीशा ने बताया कि सेंटर में आने वाली महिलाएं ज्यादातर कठुआ और आसपास ग्रामीण क्षेत्रों से हैं।
काउंसिलिंग और मेडिटेशन से इलाज
जानकारों का कहना है कि तीस से पैंतालीस वर्ष तक की उम्र में आने वाली महिलाओं की शिक्षा दसवीं या बारहवीं कक्षा तक है और ये महिलाएं मध्यम वर्गीय परिवारों से हैं। उन्होंने बताया कि सेंटर के सोशल वर्करों द्वारा गांव-गांव जाकर नशे के सेवन और तनाव से होने वाली समस्याओं से अवगत करवाया गया था, जिसके तहत कुछ परिवार के सदस्य और सोशल वर्कर्स इस तरह की समस्या से जूझ रही महिलाओं को सेंटर तक इलाज के लिए लाए।
मनोचिकित्सक अनीशा ने बताया कि सेंटर में आने वाली महिलाओं को काउंसिलिंग और मेडिटेशन के जरिये उनकी परेशानी को दूर करने की कोशिश की गई है और जो काफी सफल भी रहा है। उन्होंने कहा कि हम यह नहीं कह सकते कि शहरी और आसपास क्षेत्रों की महिलाएं इन समस्याओं से अछूती हैं। कारण यह है कि शहर की महिलाएं अपनी समस्या बताने में झिझक महसूस करती हैं।
यह पाई जा रही बीमारी
सेंटर में इलाज करवाने आईं महिलाओं को सिगरेट के सेवन और डिप्रेशन, सीजोफ्रेनियां जैसी समस्याओं से ग्रस्त पाया गया है, जिनका सेंटर में इलाज चल रहा है और कुछ महिलाएं ठीक होकर स्वस्थ जीवन जी रही हैं।