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जम्मू कश्मीर: पहाड़ी इलाकों में बनेंगे 18 रोपवे, चंद मिनटों में होगा घंटों का सफर, आसान होगा जीवन

Mon, 16 May 2022 11:52 AM IST
kumar गुलशन कुमार संजीव दुबे, अमर उजाला नेटवर्क जम्मू
संजीव दुबे, अमर उजाला नेटवर्क जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Mon, 16 May 2022 11:52 AM IST
सार

जम्मू संभाग में किश्तवाड़ जिले के मड़वा व दच्छन के अलावा राजोरी, पुंछ व रियासी जिलों में रोपवे बनाए जाएंगे। इससे पर्यटन को बढ़ावा देने के अलावा यात्रियों के लिए संपर्क और सुविधाओं में सुधार भी लाया जा सकेगा।

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nearly 18 ropeways to be built in hilly areas of jammu kashmir under parvat mala yojana life will be easier in areas facing lack of facilities
Ropeway - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में पगडंडियों के लंबे रास्ते से चलने और पीठ पर सामान लादकर ले जाने से पर्वतमाला परियोजना राहत दिलाएगी। प्रदेश में रेल, बस समेत यातायात के अन्य साधनों का अभाव झेल रहे पहाड़ी इलाकों में 18 रोपवे परियोजनाओं की डीपीआर पर काम शुरू हो गया है। केंद्रीय सड़क एवं राष्ट्रीय राजमार्ग की पर्वतमाला योजना के तहत पहले चरण में जम्मू और कश्मीर दोनों संभागों में नौ-नौ रोपवे बनेंगे। इस साल के आखिर तक टेंडर आवंटन का लक्ष्य रखा गया है।
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जम्मू संभाग में किश्तवाड़ जिले के मड़वा व दच्छन के अलावा राजोरी, पुंछ व रियासी जिलों में रोपवे बनाए जाएंगे। पहाड़ी क्षेत्र जहां सड़कें न होने के कारण लोगों को आवाजाही की भारी दिक्कत रहती है, वहां सड़कों के स्थान पर एक आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल स्थायी विकल्प होगा। इससे पर्यटन को बढ़ावा देने के अलावा यात्रियों के लिए संपर्क और सुविधाओं में सुधार भी लाया जा सकेगा। निर्धारित वजन में सामान लाने और ले जाने के लिए भी रोपवे में प्रावधान प्रस्तावित है।
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रोपवे - फोटो : अमर उजाला
डीपीआर तैयार करने का काम शुरू
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी रोहिन गुप्ता के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में एक कुशल परिवहन नेटवर्क विकसित करना बड़ी चुनौती रही है। सड़क नेटवर्क के विकास में तकनीकी मुश्किलें आती हैं। ऐसे में रोपवे वैकल्पिक परिवहन के रूप में एक सुविधाजनक और सुरक्षित साधन होगा। जम्मू-कश्मीर में पर्वतमाला परियोजना के तहत 18 रोपवे के लिए डीपीआर तैयार करने का काम शुरू हो चुका है। कोशिश रहेगी कि दिसंबर 2022 तक काम का आवंटन हो जाए। रोपवे बड़ी ढलानों और उतार चढ़ाव के बड़े अंतर को संभाल सकते हैं। सड़क या रेल मार्ग के लिए सुरंगों की जरूरत होती है, जबकि रोपवे सीधे ऊपर और नीचे फोन लाइन में चलता है।

 

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ropeway
दो से तीन हजार यात्री कर पाएंगे सफर
पर्वतमाला परियोजना के 18 रोपवे बनने से पहाड़ी लोगों का घंटों का सफर मिनटों में तय हो जाएगा। हर घंटे रोपवे से करीब दो से तीन हजार यात्री सफर कर पाएंगे। वर्तमान में जम्मू संभाग के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र किश्तवाड़ जिले के मड़वा, दच्छन आदि में पहुंचने में लोगों को पहाड़ी क्षेत्रों का पैदल सफर कर घरों को जाना पड़ता है। बर्फबारी के दौरान तो आवाजाही भी मुश्किल हो जाती है।
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