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Jammu News: स्टेटहुड की बहाली तक जारी रहेगा नेकां का संघर्ष, विधानसभा चुनाव के बाद नेकां की कार्यसमिति की पहली बैठक में उठा मुद्दा
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कार्यसमिति की बैठक।
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में गत वर्ष विधानसभा चुनाव के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) की कार्यसमिति की बुधवार को पहली बैठक हुई। इसमें सात महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इसमें जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्ज की बहाली, दूसरे राज्यों में कश्मीरियों से हो रहे उत्पीड़न और उनका सम्मान बचाए रखना शामिल है। पहलगाम आतंकी हमले की निंदा भी की गई। बैठक करीब चार घंटे चली और इसमें पार्टी के विधायकों ने अपने विचार रखे। पूर्ण राज्य व विशेष राज्य का दर्जा बहाली के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। प्रस्ताव रखा गया कि स्टेटहुड की बहाली तक नेकां का संघर्ष जारी रहेगा।
नेकां कार्यसमिति की यह बैठक पार्टी के श्रीनगर के नवा-ए-सुबह मुख्यालय में हुई। बैठक की शुरुआत 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई और दो मिनट का मौन रखा गया। बैठक की अध्यक्षता पार्टी प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने की, जबकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद रहे।
पार्टी नेतृत्व के साथ-साथ सभी सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर को फिर से विशेष दर्जा और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग दोहराई। समिति ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा बहाल करने के अपने वादे को दोहराया और कहा कि यह राज्य के लोगों की उम्मीदों और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है, जिसे अब और टालना उचित नहीं है। पार्टी इसके लिए संघर्ष करती रहेगी। समिति ने भारत सरकार से मांग की कि जम्मू-कश्मीर को तुरंत पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिया जाए, जैसा संसद में वादा किया गया था और सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने भी इस पर टिप्पणी की थी।
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बाहरी राज्यों में कश्मीरियों के उत्पीड़न की निंदा भी की
समिति ने भारत सरकार से अपील की कि वह जनता के इस समर्थन को समझे और व्यर्थ न जाने दे। साथ ही, चेतावनी दी कि युवाओं की मनमानी गिरफ्तारी, बुलडोजर का डर और मीडिया की आवाजों को दबाने की कोशिशें जनता को सरकार से दूर कर सकती हैं। समिति ने देश के विभिन्न हिस्सों में कश्मीरी छात्रों, व्यापारियों और नागरिकों के साथ हो रहे भेदभाव और उत्पीड़न पर चिंता जताई। उसने इन घटनाओं की कड़ी निंदा की और सभी राज्य सरकारों से अपील की कि वे जम्मू-कश्मीर के लोगों की सुरक्षा, सम्मान और संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित करें। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने बीते दिनों गोलाबारी के दौरान सभी मंत्रियों को कई राज्यों में जाकर कश्मीरी छात्रों का हाल जानने और उन्हें मदद करने को कहा था। एक हेल्पलाइन के माध्यम से सरकार लगातार कश्मीरी छात्रों के संपर्क में थी। बैठक में राज्य में शांति और संवाद को बढ़ावा देने और देश के अन्य हिस्सों में कश्मीरी छात्रों, व्यापारियों और मजदूरों के साथ हो रहे उत्पीड़न को रोकने का भी आह्वान किया गया।
दोनों देशों के बीच वार्ता की वकालत
बैठक में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम की सराहना करते हुए कार्यसमिति ने दोनों देशों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की हिंसा से बचने की अपील की। साथ ही शांति के लिए दोनों के बीच वार्ता की वकालत की। कार्यसमिति ने अपने चुनावी वादों के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दोहराया और लोकतांत्रिक तरीके से जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया। पहलगाम हमले के बाद स्थानीय लोगों द्वारा दिखाए गए सहयोग और पर्यटकों के प्रति अपनाए गए सौहार्द की भी सराहना की गई।
मनमानी गिरफ्तारियां और उत्पीड़न पर भी हुई बात
नेकां के एक प्रस्ताव में चेतावनी दी गई कि मनमानी गिरफ्तारियां, युवाओं का उत्पीड़न, बुलडोजर की राजनीति और मीडिया पर दबाव जैसे कदम शांति समर्थकों को अलग-थलग कर सकते हैं। साथ ही देश के अन्य हिस्सों में कश्मीरियों के खिलाफ हो रहे भेदभाव और उत्पीड़न पर भी गहरी चिंता जताई गई। सभी राज्य सरकारों से जम्मू-कश्मीर के लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की अपील की गई।
विधायक बोले- पूर्ण राज्य बिना शक्तिहीन
बैठक के दौरान विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने कई परेशानियां रखीं। उन्होंने कहा कि पूर्ण राज्य का दर्जा न होने के कारण वे खुद को शक्तिहीन महसूस कर रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने सदस्यों से लोगों से बेहतर जुड़ाव बनाने और सरकार को सुचारु रूप से चलाने पर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में सभी विधायकों के सुझाव सुने गए।
हर छह महीने में होती है बैठक
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि हमारी पार्टी की बैठक 5- 6 महीने बाद होती रहती है। जिसमें पार्टी अफेयर्स पर बातचीत की जाती है।
पीडीपी पर लगाए आरोप
बिजबेहाड़ा से एनसी विधायक डॉ. वीरी ने पीडीपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पीडीपी ने उनके साक्षात्कार के चुनिंदा हिस्सों का दुरुपयोग करके उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की है। कहा, आप नमाज मत पढ़िए, लेकिन जब आप नशे में होंगे, उसी तरह कई लोग जो हमारे दुश्मन हैं। उन्होंने मेरे साक्षात्कार को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया, ताकि मेरे और मेरी पार्टी के खिलाफ गलत धारणा बनाई जा सके। उन्होंने बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कार्य समिति की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि पार्टी को जनता से किए गए सभी वादों को पूरा करना है।
सात प्रस्तावों पर एक नजर
1- पहलगाम आतंकी हमले व सीमा पार से हुई गोलाबारी की भी निंदा
2-जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए पार्टी की प्रतिबद्धता की पुष्टि
3-जम्मू-कश्मीर को तुरंत पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का आग्रह किया।
4-संघर्ष विराम की घोषणा का स्वागत व दोनों देशों के बीच वार्ता की अपील
5-घोषणापत्र के प्रति प्रतिबद्धता व लोगों के अधिकारों के लिए राजनीतिक और संवैधानिक प्रयासों को जारी रखना
6-फंसे हुए पर्यटकों को दिए गए स्थानीय समर्थन को स्वीकार किया गया
7-दूसरे राज्यों में कश्मीरी छात्रों, व्यापारियों और निवासियों के साथ होने वाले उत्पीड़न की निंदा, केंद्र से सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने का आग्रह
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नेकां कार्यसमिति की यह बैठक पार्टी के श्रीनगर के नवा-ए-सुबह मुख्यालय में हुई। बैठक की शुरुआत 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई और दो मिनट का मौन रखा गया। बैठक की अध्यक्षता पार्टी प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने की, जबकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद रहे।
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पार्टी नेतृत्व के साथ-साथ सभी सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर को फिर से विशेष दर्जा और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग दोहराई। समिति ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा बहाल करने के अपने वादे को दोहराया और कहा कि यह राज्य के लोगों की उम्मीदों और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है, जिसे अब और टालना उचित नहीं है। पार्टी इसके लिए संघर्ष करती रहेगी। समिति ने भारत सरकार से मांग की कि जम्मू-कश्मीर को तुरंत पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिया जाए, जैसा संसद में वादा किया गया था और सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने भी इस पर टिप्पणी की थी।
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बाहरी राज्यों में कश्मीरियों के उत्पीड़न की निंदा भी की
समिति ने भारत सरकार से अपील की कि वह जनता के इस समर्थन को समझे और व्यर्थ न जाने दे। साथ ही, चेतावनी दी कि युवाओं की मनमानी गिरफ्तारी, बुलडोजर का डर और मीडिया की आवाजों को दबाने की कोशिशें जनता को सरकार से दूर कर सकती हैं। समिति ने देश के विभिन्न हिस्सों में कश्मीरी छात्रों, व्यापारियों और नागरिकों के साथ हो रहे भेदभाव और उत्पीड़न पर चिंता जताई। उसने इन घटनाओं की कड़ी निंदा की और सभी राज्य सरकारों से अपील की कि वे जम्मू-कश्मीर के लोगों की सुरक्षा, सम्मान और संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित करें। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने बीते दिनों गोलाबारी के दौरान सभी मंत्रियों को कई राज्यों में जाकर कश्मीरी छात्रों का हाल जानने और उन्हें मदद करने को कहा था। एक हेल्पलाइन के माध्यम से सरकार लगातार कश्मीरी छात्रों के संपर्क में थी। बैठक में राज्य में शांति और संवाद को बढ़ावा देने और देश के अन्य हिस्सों में कश्मीरी छात्रों, व्यापारियों और मजदूरों के साथ हो रहे उत्पीड़न को रोकने का भी आह्वान किया गया।
दोनों देशों के बीच वार्ता की वकालत
बैठक में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम की सराहना करते हुए कार्यसमिति ने दोनों देशों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की हिंसा से बचने की अपील की। साथ ही शांति के लिए दोनों के बीच वार्ता की वकालत की। कार्यसमिति ने अपने चुनावी वादों के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दोहराया और लोकतांत्रिक तरीके से जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया। पहलगाम हमले के बाद स्थानीय लोगों द्वारा दिखाए गए सहयोग और पर्यटकों के प्रति अपनाए गए सौहार्द की भी सराहना की गई।
मनमानी गिरफ्तारियां और उत्पीड़न पर भी हुई बात
नेकां के एक प्रस्ताव में चेतावनी दी गई कि मनमानी गिरफ्तारियां, युवाओं का उत्पीड़न, बुलडोजर की राजनीति और मीडिया पर दबाव जैसे कदम शांति समर्थकों को अलग-थलग कर सकते हैं। साथ ही देश के अन्य हिस्सों में कश्मीरियों के खिलाफ हो रहे भेदभाव और उत्पीड़न पर भी गहरी चिंता जताई गई। सभी राज्य सरकारों से जम्मू-कश्मीर के लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की अपील की गई।
विधायक बोले- पूर्ण राज्य बिना शक्तिहीन
बैठक के दौरान विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने कई परेशानियां रखीं। उन्होंने कहा कि पूर्ण राज्य का दर्जा न होने के कारण वे खुद को शक्तिहीन महसूस कर रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने सदस्यों से लोगों से बेहतर जुड़ाव बनाने और सरकार को सुचारु रूप से चलाने पर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में सभी विधायकों के सुझाव सुने गए।
हर छह महीने में होती है बैठक
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि हमारी पार्टी की बैठक 5- 6 महीने बाद होती रहती है। जिसमें पार्टी अफेयर्स पर बातचीत की जाती है।
पीडीपी पर लगाए आरोप
बिजबेहाड़ा से एनसी विधायक डॉ. वीरी ने पीडीपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पीडीपी ने उनके साक्षात्कार के चुनिंदा हिस्सों का दुरुपयोग करके उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की है। कहा, आप नमाज मत पढ़िए, लेकिन जब आप नशे में होंगे, उसी तरह कई लोग जो हमारे दुश्मन हैं। उन्होंने मेरे साक्षात्कार को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया, ताकि मेरे और मेरी पार्टी के खिलाफ गलत धारणा बनाई जा सके। उन्होंने बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कार्य समिति की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि पार्टी को जनता से किए गए सभी वादों को पूरा करना है।
सात प्रस्तावों पर एक नजर
1- पहलगाम आतंकी हमले व सीमा पार से हुई गोलाबारी की भी निंदा
2-जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए पार्टी की प्रतिबद्धता की पुष्टि
3-जम्मू-कश्मीर को तुरंत पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का आग्रह किया।
4-संघर्ष विराम की घोषणा का स्वागत व दोनों देशों के बीच वार्ता की अपील
5-घोषणापत्र के प्रति प्रतिबद्धता व लोगों के अधिकारों के लिए राजनीतिक और संवैधानिक प्रयासों को जारी रखना
6-फंसे हुए पर्यटकों को दिए गए स्थानीय समर्थन को स्वीकार किया गया
7-दूसरे राज्यों में कश्मीरी छात्रों, व्यापारियों और निवासियों के साथ होने वाले उत्पीड़न की निंदा, केंद्र से सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने का आग्रह