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नेकां और पीडीपी के पांच नेता रिहा, पूर्व सीएम फारूक, उमर और महबूबा अभी भी नजरबंद
Tue, 31 Dec 2019 12:14 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 31 Dec 2019 12:14 PM IST
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Omar, Farooq Abdullah, Mehbooba Mufti
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पांच अगस्त के बाद से हिरासत में रखे गए पांच राजनीतिक नेताओं को सोमवार को रिहा कर दिया। ये पांचों नेता नेकां और पीडीपी के हैं, जिन्हें एहतियातन हिरासत में रखा गया था। अव इन्हें रिहा कर दिया गया है। फिलहाल, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती अब भी नजरबंद हैं।
रिहा किए गए नेताओं में नेकां के इशफाक जब्बर व गुलाम नबी भट तथा पीडीपी के बशीर मीर, जहूर मीर और यासिर रेशी शामिल हैं। रेशी पीडीपी के बागी नेता माने जाते हैं, जिन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के खिलाफ बगावत कर दी थी। नए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने 25 नवंबर को दो नेताओ पीडीपी के दिलावर मीर और डेमोक्रेटिक पार्टी नेशनलिस्ट के गुलाम हसन मीर को रिहा किया था।
नेकां ने नेताओं की रिहाई का स्वागत किया है। संभागीय प्रधान देवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि अन्य नेताओं को भी जल्द से जल्द रिहा किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि पांच अगस्त को केंद्र ने जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने और इस राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने की घोषणा की थी। इसके बाद 34 राजनीतिक नेताओं को होटल सेंटूर से लाकर एमएलए हॉस्टल में रखा गया था।
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रिहा किए गए नेताओं में नेकां के इशफाक जब्बर व गुलाम नबी भट तथा पीडीपी के बशीर मीर, जहूर मीर और यासिर रेशी शामिल हैं। रेशी पीडीपी के बागी नेता माने जाते हैं, जिन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के खिलाफ बगावत कर दी थी। नए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने 25 नवंबर को दो नेताओ पीडीपी के दिलावर मीर और डेमोक्रेटिक पार्टी नेशनलिस्ट के गुलाम हसन मीर को रिहा किया था।
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नेकां ने नेताओं की रिहाई का स्वागत किया है। संभागीय प्रधान देवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि अन्य नेताओं को भी जल्द से जल्द रिहा किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि पांच अगस्त को केंद्र ने जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने और इस राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने की घोषणा की थी। इसके बाद 34 राजनीतिक नेताओं को होटल सेंटूर से लाकर एमएलए हॉस्टल में रखा गया था।
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