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नाग मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब
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जम्मू। मंदिरों के शहर में वीरवार को नागपंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान मंदिरों में दिनभर आस्था का हुजूम उमड़ा रहा। लोगों ने बर्मी पर दूध चढ़ा कर व पूजा-अर्चना कर प्रदेश और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
नागपंचमी पर सुबह से ही लोगों का मंदिरों में पहुंचना शुरू हो गया था। शिवमंदिरों में जलाभिषेक और बरमी पर दूल-लस्सी चढ़ाई गई। गांधीनगर स्थित नाग देवता मंदिर में भी शाम तक भक्तोें का पहुंचना जारी रहा है। मान्यता है की नाग पंचमी पर्व पर नाग देवता की पूजा करने से नाग दोष नहीं लगता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की ऋषि पंचमी के दिन नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। पंजतीर्थी स्थित नाग मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इस दौरान श्रद्धालुओं ने कहा कि नागपंचमी का त्यौहार हमें यह बताता है कि सभी जीव जंतुओं का भी सम्मान करना चाहिए।
नागबनी के प्राचीन मंदिर में दिनभर लगी रहीं भक्तों की कतारें
नागबनी स्थित प्राचीन नाग देवता मंदिर में नागपंचमी पर दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। सुबह से ही भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था। लंबी कतारों में खड़े हो कर लोगों को दूध-कच्ची लस्सी चढ़ाने का इंतजार करते देखा गया है। मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए भंडारों का भी आयोजन किया गया। मंदिर के पुजारी साहिल खजूरिया ने बताया कि इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है। दूध से स्नान करवाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
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नागपंचमी पर सुबह से ही लोगों का मंदिरों में पहुंचना शुरू हो गया था। शिवमंदिरों में जलाभिषेक और बरमी पर दूल-लस्सी चढ़ाई गई। गांधीनगर स्थित नाग देवता मंदिर में भी शाम तक भक्तोें का पहुंचना जारी रहा है। मान्यता है की नाग पंचमी पर्व पर नाग देवता की पूजा करने से नाग दोष नहीं लगता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की ऋषि पंचमी के दिन नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। पंजतीर्थी स्थित नाग मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इस दौरान श्रद्धालुओं ने कहा कि नागपंचमी का त्यौहार हमें यह बताता है कि सभी जीव जंतुओं का भी सम्मान करना चाहिए।
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नागबनी के प्राचीन मंदिर में दिनभर लगी रहीं भक्तों की कतारें
नागबनी स्थित प्राचीन नाग देवता मंदिर में नागपंचमी पर दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। सुबह से ही भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था। लंबी कतारों में खड़े हो कर लोगों को दूध-कच्ची लस्सी चढ़ाने का इंतजार करते देखा गया है। मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए भंडारों का भी आयोजन किया गया। मंदिर के पुजारी साहिल खजूरिया ने बताया कि इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है। दूध से स्नान करवाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
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