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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   More than 66 thousand migrant workers in the state, factories and orther construction work start in lockdown. Most of the starting of daily wages do not want to go back

प्रदेश में 66 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक, फैक्ट्रियां और दैनिक मजदूरी शुरू होने पर नहीं जाना चाहते वापस

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sat, 02 May 2020 04:55 PM IST
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More than 66 thousand migrant workers in the state, factories and orther construction work start in lockdown. Most of the starting of daily wages do not want to go back
अमर उजाला ब्यूरो जम्मू। देशव्यापी लॉकडाउन के बाद पनपे हालात का सबसे अधिक असर दैनिक श्रमिक पर पड़ा है। लॉकडाउन के जो श्रमिक पहले अपने गृह राज्यों को जाने चाहते थे, अब लॉकडाउन में फैक्ट्रियां और दैनिक मजदूरी के कार्यों को शुरू करने की इजाजत मिलने के बाद अधिकांश श्रमिक अपने राज्य वापिस नहीं जाना चाहते है। 66 हजार श्रमिकों से सात हाजर के करीब ही श्रमिकों ने अपने गृह राज्यों को जाने की इच्छा जताई है। जम्मू-कश्मीर श्रम विभाग ने अंतर राज्य प्रवासी श्रमिकों का सर्वे करवाया था। प्रदेश में अंतर राज्य प्रवासी श्रमिक तीन विभिन्न स्थानों पर रूके है। इसमें सात हाजर के करीब श्रमिक सरकार द्वारा बनाए आवास में रूके है। 25 से तीस हजार के करीब श्रमिक जिन फैक्टिरयों के काम करते है वहां पर रुके और बाकि श्रमिक प्रदेश में अपने अस्थाई घरों में है। प्रदेश श्रम विभाग ने ऐसे सभी श्रमिकों का सर्वे करवाया है। इसमें इन श्रमिकों को नाम, राज्य का नाम और बैंक खाते की जानकरी जुटाई है। इन श्रमिकों के बैंक खाते की सूची भारत सरकार से सांझा भी की है। सरकार इन श्रमिकों के खाते में आर्थिक मदद देने की भी योजना बना रही है।प्रदेश में मौजूद अंतर राज्य प्रवासी श्रमिक को उनके गृह राज्यों को भेजनी की जिम्मेवारी श्रम विभाग को सौंपी गई है। श्रम विभाग के आयुक्त सौरभ भगत को इसका नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। श्रम विभाग आयुक्त सौरभ भगत ने कहा कि श्रम विभाग प्रदेश में मौजूद 66 हजार से अधिक श्रमिकों का सर्वे करवाया था। प्रदेश में फैक्ट्रियां और दैनिक मजदूरी के कार्य शुरू होने से अधिकांश श्रमिक अभी अपने राज्यों को नहीं जाने चाहते है। 66 हजार में से सात हजार के करीब श्रमिकों ने घर जाने की इच्छता व्यक्त की है। इन श्रमिकों को उनके राज्यों तक पहुंचाने के व्यवस्था की जा रही है।
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