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आतंकवाद पर मोदी-मुफ्ती का गठबंधन एजेंडा मौन

Wed, 04 Mar 2015 12:45 PM IST
Updated Wed, 04 Mar 2015 12:45 PM IST
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modi-mufti coalition agenda is silent on terrorism

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद के बीच हुए करार का दस्तावेज आतंकवाद से लड़ाई पर मौन है। मोदी और मुफ्ती ने जिस गठबंधन के एजेंडे पर मुहर लगाई उसमें पाकिस्तान और हुर्रियत से बातचीत की जरूरत तो बताई गई है, लेकिन, पाक पोषित आतंकवाद से मुकाबले का कोई जिक्र नहीं है।

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जबकि 13 साल पहले पीडीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार के लिए बनाए गए न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) में साफ कहा गया था कि रियासत सरकार पाक पोषित आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में केंद्र का पूरा सहयोग करेगी।
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तब सोनिया गांधी और मुफ्ती की मुलाकात के बाद सीएमपी जारी किया गया था। क्षेत्रीय संतुलन कायम कर विकास का वादा पुराने सीएमपी में भी था और इस बार भी उसे नए शब्दों में दोहराया गया है।
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दिलों को जोड़ने की बात पर जोर

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इस बार सीएमपी जारी होने से पहले अफस्पा की वापसी के मुद्दे पर पीडीपी अड़ गई थी। हालांकि, गठबंधन एजेंडे में इसकी समीक्षा की बात कहकर लगभग यथा स्थिति को ही कायम रखने का संकेत दिया गया है। कांग्रेस से 13 साल पहले गठबंधन करते वक्त पीडीपी ने पोटा का विरोध किया था।

कांग्रेस-पीडीपी के सीएमपी में जम्मू कश्मीर में पोटा नहीं लागू करने का निर्णय शुमार था। 2002 से पहले आतंकवाद चरम पर रहा था लिहाजा तब सीएमपी बनाते वक्त पीडीपी ने आतंकवाद से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और राहत पर ज्यादा जोर दिया था।

पीडीपी-कांग्रेस की गठबंधन सरकार ने लोगों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक घावों को भरने को मुख्य लक्ष्य बताया था। इस बार पीडीपी और भाजपा ने सामंजस्य और दिलों को जोड़ने की बात पर जोर दिया है।

अनुच्छेद 370 की चर्चा की जरूरत नहीं

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पीडीपी और कांग्रेस का सीएमपी अलगाववादियों से बातचीत के मुद्दे पर मौन था। इस बार पीडीपी ने बार-बार इस पर जोर दिया और सीएमपी में भी इसे स्थान दिलाया। विकास के सभी वादे पुराने ही हैं। पीडीपी-कांग्रेस की गठबंधन सरकार ने बिजली उत्पादन बढ़ाने की बात की थी और भाजपा-पीडीपी के गठबंधन एजेंडे में केंद्र से पावर प्रोजेक्टों की वापसी की चर्चा है।

कांग्रेस और पीडीपी के गठबंधन एजेंडे में मानवाधिकार आयोग मजबूत करने, निर्दोष लोगों पर चलाए गए मुकदमे वापस लेने, और कानूनों की समीक्षा के साथ कुछ विशेष अधिकार कायम रखने पर सहमति थी। इस बार पीडीपी सेना को विशेष अधिकार के पक्ष में नहीं है।

कश्मीरी पंडितों की सम्मान के साथ वापसी का जिक्र कांग्रेस-पीडीपी के एजेंडे में भी था। यह मुद्दा इस बार भी शुमार है। बार्डर पर रहने वाले लोगों को विशेष सुविधाएं देने और उनके पुनर्वास का बिंदु पहले भी था और इस बार के एजेंडे में भी है। पहले अनुच्छेद 370 की चर्चा की जरूरत नहीं समझी गई थी और अब उस पर यथा स्थिति बरकरार रखने का वादा है।

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