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हुर्रियत नेता बोले, वार्ता में कोई गतिरोध न डालने पाए

Sun, 27 Dec 2015 09:41 PM IST
Updated Sun, 27 Dec 2015 09:41 PM IST
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 mirwaiz for bold Indo-Pak peace talks, wants 'rabble rousers' reined in

भारत और पाकिस्तान में बढ़ती नजदीकियों और दोनों देशों की ओर से फिर से शुरू की गई वार्ता प्रक्रिया का मीरवाइज धड़े वाली हुर्रियत ने स्वागत किया है। हुर्रियत के नरमपंथी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फारूक ने दोनों देशों से वार्ता प्रक्रिया में गतिरोध डालने वाली ताकतों को नजरअंदाज करने को कहा है।

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मीरवाइज की ओर से दोनों देशों की सरकारों से खुले दिमाग से सभी विवादित और लंबित मुद्दों पर बेबाकी से चर्चा करने की भी अपील की गई है।

इसके साथ ही मीरवाइज धड़े का मानना है कि वार्ता प्रक्रिया को सकारात्मक अंजाम तक पहुंचाने के लिए और इस प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश करने वाले तत्वों से दूर रखने के लिए कश्मीरी अवाम को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।
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वार्ता को अवाम का भी पूरा समर्थन हासिल हो

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मीरवाइज का कहना है कि दोनों देशों के प्रधानमंत्री लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए हैं। दोनों के पास अपार जनादेश है। इसके चलते दोनों प्रधानमंत्री अगर वार्ता प्रक्रिया को आगे ले जाना चाहते हैं और कुछ ऐतिहासिक कदम उठाने चाहते हैं तो इसके लिए आवश्यक है कि दोनों को अपने-अपने देश के विपक्ष और विशेषतौर पर अवाम का भी पूरा समर्थन हासिल हो।

मीरवाइज ने कहा कि जो भी पार्टी अथवा ग्रुप इस वार्ता प्रक्रिया के आड़े आते हैं उन्हें दक्षिण एशिया में शांति बहाली की कोशिश का विरोधी समझा जाएगा।

हालांकि, एक समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान मीरवाइज ने यह भी कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व को इस वार्ता प्रक्रिया में सभी हित धारकों को शामिल करना चाहिए और प्रतिभागी बनाना चाहिए।

वार्ता के सकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे

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मीरवाइज ने उम्मीद जताई कि तमाम बाधाओं को पार कर एक बार फिर से भारत और पाकिस्तान में बहाल हुई वार्ता को गति मिलेगी और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे।

मीरवाइज ने कहा कि हुर्रियत ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और यहां तक कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से वार्ता कर दोनों देशों में वार्ता को आगे बढ़ाने और विवाद का हल ढूंढने के संबंध में कुछ सुझाव भी दिए थे।

उन्होंने कहा कि अगर कश्मीर मसला हल करने में कोई गंभीर कदम उठाए जाते हैं तो हुर्रियत अन्य हितधारकों सहित इसका समर्थन करेगी और इसमें सहयोग भी करेगी।

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