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किश्तवाड़ में आतंक पर लगाम लगाने में सुरक्षा तंत्र फेल, 10 महीनों में हुई चौथी आतंकी वारदात
Sat, 14 Sep 2019 01:43 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sat, 14 Sep 2019 01:43 AM IST
सार
- पुलिस और अन्य खुफिया एजेंसियों की विफलता है किश्तवाड़ की घटना
- स्थानीय राजनेता आतंकियों के लिए बन रहे साफ्ट टारगेट
- भाजपा नेताओं की हत्या, संघ नेता की हत्या, डीसी के पीएसओ से बंदूक छीनने की घटनाएं हो चुकी
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जम्मू-कश्मीर पुलिस
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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विस्तार
पीडीपी नेता के परिवार को पूरी रात बंधक बनाए रखना। फिर सुबह होते ही उसके पीएसओ की बंदूक लेकर भाग जाना। आतंकियों की यह करतूत किश्तवाड़ में मौजूद सुरक्षा तंत्र की बड़ी विफलता है। दस महीनों में यह चौथी ऐसी आतंकी वारदात है। तमाम कोशिशों के बावजूद किश्तवाड़ में सुरक्षा तंत्र आतंक पर लगाम लगाने में पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है।
ठीक दस महीने पहले 2 नवंबर 2018 को किश्तवाड़ में आतंकियों ने भाजपा नेता अनिल परिहार और उनके भाई की हत्या कर दी थी। अब तक पुलिस इस केस को हल नहीं कर सकी। अभी यह मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि छह महीने के बाद ही 9 अप्रैल 2019 को आतंकियों ने आरएसएस के नेता चंद्रकांत शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी।
हालांकि इस घटना से एक महीना पहले ही आतंकियों ने किश्तवाड़ के जिला उपायुक्त के पीएसओ से 9 मार्च, 2019 को राइफल छीन ली थी। इन तीन घटनाओं ने किश्तवाड़ में आतंकियों की बड़ी मौजूदगी की एंट्री करा दी है। जिस पर नियंत्रण पाने में पुलिस पूरी तरह से फेल साबित हुई है। इस समय किश्तवाड़ में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। इस समय किश्तवाड़ में तमाम सुरक्षा एजेंसियों का खुफिया तंत्र भी सक्रिय है। बावजूद इसके पूरी रात आतंकी शहर में एक परिवार को बंधक बनाकर रुके और सुबह होते ही वहां से चंपत हो गए। यह घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक खुली चुनौती है। दस महीने में किश्तवाड़ में यह चौथी आतंकी वारदात है।
इन घटनाओं को अंजाम देने वाले आतंकियों तक पुलिस नहीं पहुंच पाई है। हालिया घटना को छोड़कर पहले की तीन घटनाओं में शामिल आतंकियों को पुलिस पकड़ नहीं पाई है। आतंकियों की पहचान होने के बावजूद वह पकड़ से बाहर हैं। किश्तवाड़ में इस समय एक दर्जन आतंकी सक्रिय हो चुके हैं। कभी किश्तवाड़ में दो ही आतंकी सक्रिय थे, जिनकी सक्रियता भी न के बराबर थी। लेकिन अब आतंकियों की मौजूदगी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।
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ठीक दस महीने पहले 2 नवंबर 2018 को किश्तवाड़ में आतंकियों ने भाजपा नेता अनिल परिहार और उनके भाई की हत्या कर दी थी। अब तक पुलिस इस केस को हल नहीं कर सकी। अभी यह मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि छह महीने के बाद ही 9 अप्रैल 2019 को आतंकियों ने आरएसएस के नेता चंद्रकांत शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी।
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हालांकि इस घटना से एक महीना पहले ही आतंकियों ने किश्तवाड़ के जिला उपायुक्त के पीएसओ से 9 मार्च, 2019 को राइफल छीन ली थी। इन तीन घटनाओं ने किश्तवाड़ में आतंकियों की बड़ी मौजूदगी की एंट्री करा दी है। जिस पर नियंत्रण पाने में पुलिस पूरी तरह से फेल साबित हुई है। इस समय किश्तवाड़ में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। इस समय किश्तवाड़ में तमाम सुरक्षा एजेंसियों का खुफिया तंत्र भी सक्रिय है। बावजूद इसके पूरी रात आतंकी शहर में एक परिवार को बंधक बनाकर रुके और सुबह होते ही वहां से चंपत हो गए। यह घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक खुली चुनौती है। दस महीने में किश्तवाड़ में यह चौथी आतंकी वारदात है।