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जम्मू-कश्मीर: आतंकियों ने शोपियां में पुलिस पर किया हमला, 4 जवान शहीद, सर्च ऑपरेशन जारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर
Updated Tue, 11 Dec 2018 02:45 PM IST
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आतंकी हमले में शहीद हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान
- फोटो : अमर उजाला
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दक्षिणी कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकियों की ओर से मंगलवार को दोपहर बाद पुलिस पोस्ट पर किए गए हमले में चार पुलिसकर्मी शहीद हो गए। हमले के बाद आतंकी पुलिसकर्मियों के हथियार लेकर फरार हो गए। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली है।
जिले के जैनापोरा इलाके में कश्मीरी पंडितों (अल्पसंख्यक समुदाय) की रक्षा के लिए तैनात पुलिस पोस्ट पर हमला करते हुए आतंकियों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। एक अधिकारी ने बताया कि वहां पांच पुलिसकर्मियों की ड्यूटी थी, लेकिन जिस वक्त हमला हुआ चार पुलिसकर्मी ही मौजूद थे। अंधाधुंध फायरिंग के कारण पुलिसकर्मियों को जवाबी कार्रवाई का मौका नहीं मिला। मौके पर ही तीन पुलिसकर्मी शहीद हो गए। गंभीर रूप से जख्मी चौथे पुलिसकर्मी को श्रीनगर अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
पुलिस के अनुसार आतंकी अपने साथ पुलिसकर्मियों के चार एसएलआर राइफल भी ले गए हैं। घटना के तुरंत बाद सेना और एसओजी द्वारा आस-पास के इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान छेड़ा गया ताकि फरार आतंकियों को तलाशा जा सके।
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यह हुए शहीद
हमले में मारे गए पुलिसकर्मियों की शिनाख्त चीवा अजस बांदीपोरा के कांस्टेबल मेहराजुद्दीन, फतेहपोरा अनंतनाग के हमीदुल्ला, सुच कुलगाम के अनीस अहमद मीर और शालीबुग गांदरबल के अब्दुल मजीद के तौर पर हुई है।
हमले में फरार एसपीओ शामिल
शोपियां हमले में वाचि के पूर्व विधायक के श्रीनगर स्थित आवास से आठ हथियार लेकर फरार हुए एसपीओ आदिल बशीर का हाथ है। पुलिस के अनुसार आदिल ने अपने पांच साथियों के साथ पहुंचकर हमले को अंजाम दिया।
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जिले के जैनापोरा इलाके में कश्मीरी पंडितों (अल्पसंख्यक समुदाय) की रक्षा के लिए तैनात पुलिस पोस्ट पर हमला करते हुए आतंकियों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। एक अधिकारी ने बताया कि वहां पांच पुलिसकर्मियों की ड्यूटी थी, लेकिन जिस वक्त हमला हुआ चार पुलिसकर्मी ही मौजूद थे। अंधाधुंध फायरिंग के कारण पुलिसकर्मियों को जवाबी कार्रवाई का मौका नहीं मिला। मौके पर ही तीन पुलिसकर्मी शहीद हो गए। गंभीर रूप से जख्मी चौथे पुलिसकर्मी को श्रीनगर अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
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पुलिस के अनुसार आतंकी अपने साथ पुलिसकर्मियों के चार एसएलआर राइफल भी ले गए हैं। घटना के तुरंत बाद सेना और एसओजी द्वारा आस-पास के इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान छेड़ा गया ताकि फरार आतंकियों को तलाशा जा सके।
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यह हुए शहीद
हमले में मारे गए पुलिसकर्मियों की शिनाख्त चीवा अजस बांदीपोरा के कांस्टेबल मेहराजुद्दीन, फतेहपोरा अनंतनाग के हमीदुल्ला, सुच कुलगाम के अनीस अहमद मीर और शालीबुग गांदरबल के अब्दुल मजीद के तौर पर हुई है।
हमले में फरार एसपीओ शामिल
शोपियां हमले में वाचि के पूर्व विधायक के श्रीनगर स्थित आवास से आठ हथियार लेकर फरार हुए एसपीओ आदिल बशीर का हाथ है। पुलिस के अनुसार आदिल ने अपने पांच साथियों के साथ पहुंचकर हमले को अंजाम दिया।
गवर्नर और राजनीतिक दलों ने जताया दुख
शोपियां हमले की राज्यपाल सत्यपाल मलिक और नेकां, पीडीपी व कांग्रेस ने निंदा की है। राज्यपाल ने जैनापोरा हमले पर दुख व्यक्त करते हुए शहीदों के परिवारवालों के प्रति सहानुभूति जताई। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने घटना पर दुख व्यक्त किया है। उमर ने हमले को कायरतापूर्ण बताते हुए ट्विटर पर शहीद जवानों की आत्मा की शांति के लिए दुआ की है।
पीडीपी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी शोपियां हमले की निंदा करते हुए शहीद जवानों के परिवारों के साथ सहानुभूति जताई है। उन्होंने ट्विटर पर लिखे संदेश में राहत जताई है कि वहां अल्पसंख्यक समुदाय से किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। कांग्रेस प्रवक्ता ने भी दुख जताते हुए कहा है कि हत्या या हिंसा से किसी उद्देश्य की प्राप्ति नहीं होती है।
हमले के वक्त केवल एक परिवार था
जहां हमला हुआ वहां कश्मीरी पंडितों के छह परिवार रहते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए ही पुलिस पोस्ट है। यह संयोग है कि किसी भी पंडित परिवार को नुकसान नहीं पहुंचा। हमले के वक्त केवल एक ही कश्मीरी पंडित का परिवार वहां मौजूद था।
पीडीपी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी शोपियां हमले की निंदा करते हुए शहीद जवानों के परिवारों के साथ सहानुभूति जताई है। उन्होंने ट्विटर पर लिखे संदेश में राहत जताई है कि वहां अल्पसंख्यक समुदाय से किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। कांग्रेस प्रवक्ता ने भी दुख जताते हुए कहा है कि हत्या या हिंसा से किसी उद्देश्य की प्राप्ति नहीं होती है।
हमले के वक्त केवल एक परिवार था
जहां हमला हुआ वहां कश्मीरी पंडितों के छह परिवार रहते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए ही पुलिस पोस्ट है। यह संयोग है कि किसी भी पंडित परिवार को नुकसान नहीं पहुंचा। हमले के वक्त केवल एक ही कश्मीरी पंडित का परिवार वहां मौजूद था।