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मिड-डे-मील फंड में राज्य की स्थिति खराब
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Wed, 06 May 2015 12:35 PM IST
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मिड-डे-मील की राशि की वितरण प्रणाली में जम्मू कश्मीर राज्य की स्थिति बहुत बुरी है। प्रत्येक शिक्षा सत्र में मिड-डे-मील की राशि लेने के लिए शिक्षकों को परेशानियों से जूझना पड़ता है। इसी कारण कई बार मिड-डे-मील प्रभावित होती है।
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जबकि देश के कई राज्यों में शिक्षा विभाग को तीन महीने एडवांस राशि दी जाती है, जिससे की मिड-डे-मील पर कोई असर न पड़ सके। वहीं शिक्षा निदेशक का कहना है कि इसमें सुधार को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील चलाने के लिए हर वर्ष सर्व शिक्षा अभियान के तहत केंद्र सरकार राशि जारी करती है। केंद्र सरकार की तरफ से यह राशि पहले राज्य सरकार के वित्त विभाग के पास भेजी जाती है और वित्त विभाग इस राशि को शिक्षा विभाग के पास भेजता है।
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राजस्थान, हिमाचल प्रदेश व अन्य कई राज्यों में शिक्षा विभाग तीन महीने की एडवांस राशि शिक्षा विभाग को देता है। जम्मू कश्मीर में यह राशि शिक्षकों को मिड-डे-मील खिलाने के बाद मिलती है। शिक्षक महीनों उधार लेकर मिड-डे-मील चलाते हैं।
फिर इसके बिल शिक्षा विभाग के पास जमा करवाते हैं और वित्त विभाग से राशि मिलने के बाद शिक्षा विभाग यह राशि शिक्षकों को जारी करता है। इसमें कभी छह महीने लगते हैं तो कभी आठ और कभी एक वर्ष तक लग जाता है।
जब तक राशि नहीं मिलती है दुकानदार शिक्षकों के पीछे पड़ते हैं। कई बार उधार देना बंद कर देते हैं। केंद्र सरकार की तरफ से जब इसकी समीक्षा बैठक की जाती है तो राज्य सरकार की तरफ से हिस्सा लेने वाले शिक्षा अधिकारियों को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ता है। शिक्षा अधिकारियों द्वारा कई बार मांग करने के बाद भी शिक्षा विभाग को एडवांस राशि नहीं मिल पा रही है।