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मुख्यमंत्री महबूबा और नाराज पूर्व मंत्री बशारत की मुलाकात रही बेनतीजा

Sun, 19 Feb 2017 08:54 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू Updated Sun, 19 Feb 2017 08:54 PM IST
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Mehbooba-Basharat meeting failed
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और मंत्री सैयद बशारत बुखारी - फोटो : file photo
महबूबा मंत्रिमंडल के पहले विस्तार के बाद दो मंत्रियों के इस्तीफों से उत्पन्न अनिश्चितता की बर्फ फिलहाल पिघलती नजर नहीं आ रही है।
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इस्तीफा देने वाले मंत्री सैयद बशारत बुखारी ने रविवार सुबह श्रीनगर में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। गुपकार रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पर दोनों के बीच दो घंटे से अधिक समय तक बातचीत हुई। सूत्रों के अनुसार बातचीत में इस्तीफा वापस लेने पर सहमति नहीं बन सकी। इस बीच, इस्तीफा देने वाले दोनों मंत्रियों को मनाने की कोशिशें चल रहीं हैं। 

सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री महबूबा ने खुद इस संकट के समाधान का मसला अपने हाथ में लिया है। शनिवार देर शाम उन्होंने बशारत बुखारी से फोन पर संपर्क किया। उनसे मुख्यमंत्री आवास पर सुबह आने का आग्रह किया ताकि इस मसले पर बातचीत की जा सके। सूत्रों ने बताया कि मुलाकात में मुख्यमंत्री ने बुखारी से इस्तीफा वापस लेने का आग्रह किया ताकि लोगों तक सही संदेश जा सके।
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​खफा विधायकों पर नजर

Mehbooba-Basharat meeting failed
mehbooba mufti - फोटो : Amar Ujala
बुखारी ने मुख्यमंत्री से विभाग बदले जाने पर नाराजगी जाहिर की। साथ ही संकेत दिया कि इस्तीफा वापस लेने से क्षेत्र में उनकी किरकिरी होगी। कुछ बीच का रास्ता निकले तो फिर बात बन सकती है। उधर, इस्तीफा देने वाले अन्य मंत्री इमरान रजा अंसारी भी इस्तीफा वापस न लेने पर अड़े हुए हैं। इमरान की मुख्यमंत्री से बातचीत में भी कोई नतीजा सामने नहीं आ सका है।

महबूबा के अलावा पार्टी के उपाध्यक्ष सरताज मदनी व अन्य नेता भी इस संकट के समाधान में जुटे हुए हैं। पार्टी का मानना है कि दोनों क द्दावर नेता हैं। बशारत दूसरी बार चुने गए हैं तो इमरान अंसारी पार्टी में शिया समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। उधर, कुछ विधायक भी मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए लाबिंग करने में जुट गए हैं। 

मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने से पार्टी के असंतुष्ट बताए जा रहे छह विधायकों पर भी पैनी नजर है। उनकी गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी विश्वस्त विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों को सौंपी गई है। संगठन के पदाधिकारी इनसे लगातार संपर्क में हैं ताकि उन्हें यह लगे कि पार्टी उनकी सुध ले रही है। 
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