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महबूबा ने दिया पाक से रिश्ते सुधारने पर जोर

Mon, 16 Jan 2017 11:43 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू Updated Mon, 16 Jan 2017 11:43 PM IST
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mehbooba adviCED TO IMPROVE RELATIONS WITH PAKISTAN
महबूबा मुफ्ती - फोटो : FILE PHOTO

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर में अमन के लिए पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने पर जोर दिया है। राज्यपाल के अभिभाषण पर विधान परिषद में चर्चा का उत्तर देते हुए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की नीति और संयम की याद दिलाई। महबूबा ने कहा कि जब वाजपेयी बस लकेर लाहौर गए तो राजोरी में आतंकी कांड हो गया।

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संद पर हमला हुआ और करगिल भी हुआ लेकिन वाजपेयी ने संयम से काम लिया। तब पाक्सिातन ने लाहौर घोषणा की जिसमें आतंकवाद के लिए पाक की जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देने का एलान था। इसका असर भी हुआ। घटनाएं कम हो गई। मुशर्रफ आगरा आए। उप प्रधानमंत्री आडवाणी ने कश्मीर में हर पक्ष से डायलाग शुरू किया। अब पाकिस्तान को लाहौर घोषणा की याद दिलानी होगी। 
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उन्होंने कहा कि हम इतिहास और भूगोल नहीं बदल सकते। वाजपेयी ने कहा था कि हम हमसाया नहीं बदल सकते। नई दिल्ली को इलाज ढ़ूढ़ना होगा। टकराव से सीमा पर रहने वाले लोग दरबदर होते हैं। पीएम मोदी ने वाजपेयी की नीति को आगे बढ़ाया लेकिन इस बीच कई घटनाएं हो गईं। पाक ने पहल नहीं की। अब जोड़ने की बात करनी होगी। पीओके को हम अपना हिस्सा मानते हैं। विधानसभा में सीटें भी रिजर्व कर रखी है। अब चीन वहां कारीडोर बना रहा है। हमें पीओके के सभी रास्ते खोलने होंगे। 

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रियासत का नाम रोशन करने वाले बच्चे असली हीरो

mehbooba adviCED TO IMPROVE RELATIONS WITH PAKISTAN
सीएम महबूबा मुफ्ती का बयान - फोटो : Amar Ujala

महबूबा ने कहा कि बच्चे कई क्षेत्रों में रियासत का नाम रोशन कर रहे हैं। 8 साल के बच्चे ने कराटे में देश का प्रतिनिधित्व किया है। जायरा ने दंगल फिल्म में अच्छा काम किया। यही लोग असली हीरो हैं। रियासत के कुछ बच्चे अन्य घटनाओं में शामिल हुए। कश्मीर के बच्चे जब बाहर जाते हैं तो उन्हें मुल्क अच्छा लगता है।

उन्हें गंगा जमुनी तहजीब दिखाना है। जब हिंसा के दौरान कुछ लोगों ने स्कूलों को नाजायज बताया तब अभिभावकों ने बच्चों को पढ़ाई के लिए बाहर भेजा। मुल्क पर विश्वास था तभी बच्चों को बाहर भेजा। कुछ बच्चे बंद और हड़ताल में सड़कों पर निकले, जाहिर है वैसे बच्चे अभिभावकों की बात नहीं मानते। उन्हें भी संभालना है।

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