{"_id":"64f6447297378d7d9c04dd66","slug":"meeting-municipal-corporation-jammu-news-c-10-jam1008-195471-2023-09-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू: शहर में कुत्तों की संख्या 43,540, अब तक 36,256 की नसबंदी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू: शहर में कुत्तों की संख्या 43,540, अब तक 36,256 की नसबंदी
Tue, 05 Sep 2023 02:51 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Tue, 05 Sep 2023 02:51 PM IST
सार
जम्मू शहर में कुत्तों की अनुमानित संख्या 43540 है। दो साल में 17,822 आवारा कुत्तों की वार्डवार नसबंदी की गई है। अब तक 36,256 की नसबंदी की जा चुकी है।
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : iStock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दो साल में 17,822 आवारा कुत्तों की वार्डवार नसबंदी की गई है। अब तक 36,256 की नसबंदी की जा चुकी है। विभागीय आंकड़े के अनुसार जम्मू शहर में कुत्तों की अनुमानित संख्या 43540 है। जेएमसी आयुक्त राहुल यादव ने कहा कि सड़क पर कुत्तों की संख्या के प्रभावी प्रबंधन के अलावा मनुष्यों और जानवरों दोनों में रेबीज के प्रसार को रोकने के लिए एबीसी, एआरवी कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
विज्ञापन
पशु देखभाल केंद्र रूपनगर में बैठक के दौरान फ्रेंडिकोइस-एसईसीए (दिल्ली स्थित पशु कल्याण संगठन) के सहयोग से कार्यान्वित किए जा रहे कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं और प्रगति पर चर्चा हुई। डाॅ. सुशील कुमार ने कहा कि नसबंदी के लिए वार्डवार टीमों के माध्यम से कुत्तों को पकड़ा जा रहा है और ऑपरेशन के बाद छोड़ा जा रहा है।
विज्ञापन
समिति ने फैसला लिया कि जेएमसी जागरूकता अभियान के साथ पालतू कुत्तों की अनिवार्य नसबंदी पर काम तेज किया जाएगा। आयुक्त ने सीमा के भीतर एबीसी कार्यक्रम के कार्यान्वयन के बारे में संतुष्टि दिखाई।
विज्ञापन
सलाह दी कि उन क्षेत्रों पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए जहां अभी भी अधिक असंक्रमित कुत्तों की संख्या है और कुत्ते के बच्चे (पिल्ले) पैदा हो रहे हैं। उन्होंने एमवीओ, जेएमसी को सड़क पर कुत्तों की संख्या को कम करने के साथ-साथ रेबीज उन्मूलन में मदद करने के लिए एबीसी/एआरवी कार्यक्रम की प्रभावशीलता के बारे में स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और निवासी कल्याण संगठनों को शामिल करके आम जनता को शिक्षित करने के लिए आईईसी गतिविधियों को तेज करने का निर्देश दिया है।