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मां के आंसू देख नहीं पिघला था आतंकी मन्नान वानी का दिल, एक साल के भीतर ही मारा गया
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Updated Fri, 12 Oct 2018 04:45 PM IST
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आतंकी मन्नान बशीर वानी
- फोटो : फाइल
उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के टिक्कीपोरा, लोलाब के मन्नान बशीर वानी को आतंकी बने एक साल पूरा भी नहीं हुआ था कि उसे हंदवाड़ा में हुई मुठभेड़ में मार गिराया गया। वह 5 जनवरी, 2018 को आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था। मन्नान के आतंकी संगठन में शामिल होने के बाद परिवार सदमे में था। उनके अनुसार उन्हें अपने बेटे से ऐसी उम्मीद नहीं थी।
दरअसल मन्नान बशीर वानी की फोटो 7 जनवरी, 2018 को सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें यह बताया गया था कि वह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया है। उसे संगठन ने हमजा भाई का कोड दिया था। उस समय एक स्थानीय न्यूज एजेंसी के मुताबिक संगठन के चीफ सैयद सलाहुद्दीन ने मन्नान का स्वागत किया था और इसे कश्मीरी मुहिम के लिए एक अच्छा संकेत बताया था।
सदमे में थे मन्नान के मां-बाप
मन्नान के आतंकी संगठन में शामिल होने पर उसके घर पर उस समय दुख का माहौल था। उसके माता पिता, बहन, भाई और रिश्तेदार सभी सदमे में थे। उनका कहना था कि मन्नान से उन्हें ऐसी उम्मीद नहीं थी। मन्नान के पिता बशीर वानी ने इस घटना को अपनी बदकिस्मती ठहराया था। उन्होंने बताया था कि प्राइमरी से पीएचडी तक मन्नान ने अच्छी तरह से पढ़ाई की। उसके पास बहुत हुनर था, बहुत कुछ कर सकता था, लेकिन यह खबर सुनकर काफी दुख पहुंचा। उन्होंने कहा था कि उससे आखिरी संपर्क तीन जनवरी को हुआ था। उसने बहन को अपनी कुछ तस्वीरें भी भेजी थीं, लेकिन उसके बाद कोई संपर्क नहीं हुआ।
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दरअसल मन्नान बशीर वानी की फोटो 7 जनवरी, 2018 को सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें यह बताया गया था कि वह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया है। उसे संगठन ने हमजा भाई का कोड दिया था। उस समय एक स्थानीय न्यूज एजेंसी के मुताबिक संगठन के चीफ सैयद सलाहुद्दीन ने मन्नान का स्वागत किया था और इसे कश्मीरी मुहिम के लिए एक अच्छा संकेत बताया था।
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सदमे में थे मन्नान के मां-बाप
मन्नान के आतंकी संगठन में शामिल होने पर उसके घर पर उस समय दुख का माहौल था। उसके माता पिता, बहन, भाई और रिश्तेदार सभी सदमे में थे। उनका कहना था कि मन्नान से उन्हें ऐसी उम्मीद नहीं थी। मन्नान के पिता बशीर वानी ने इस घटना को अपनी बदकिस्मती ठहराया था। उन्होंने बताया था कि प्राइमरी से पीएचडी तक मन्नान ने अच्छी तरह से पढ़ाई की। उसके पास बहुत हुनर था, बहुत कुछ कर सकता था, लेकिन यह खबर सुनकर काफी दुख पहुंचा। उन्होंने कहा था कि उससे आखिरी संपर्क तीन जनवरी को हुआ था। उसने बहन को अपनी कुछ तस्वीरें भी भेजी थीं, लेकिन उसके बाद कोई संपर्क नहीं हुआ।
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बेस्ट पेपर अवार्ड भी मिला था
मन्नान वानी
- फोटो : फाइल
मन्नान 10वीं कक्षा तक जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) का छात्र था और आतंकी संगठन में शामिल होने से पूर्व वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जियोलोजी में पीएचडी कर रहा था। वह एक पढे़ लिखे परिवार से था, उसके पिता लेक्चरर और भाई मुबाशिर अहमद जूनियर इंजीनियर हैं। मन्नान को एआईएसईसीटी यूनिवर्सिटी भोपाल में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन वॉटर एनवायरमेंट, एनर्जी एंड सोसाइटी (आईसीडबल्यूईईएस) में ‘बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन अवार्ड’ भी मिला था। इस कॉन्फ्रेंस में 20 देशों से करीब 400 डेलीगेट शामिल हुए थे।
मां के आंसू से भी नहीं पिघला
इस बीच मन्नान की मां का कहना था, ‘मैंने अपने खून का कतरा-कतरा उसे पढ़ाने लिखाने में लगा दिया। वो हमें धोखा दे गया’। मां ने उस समय मन्नान से लौट आने की अपील भी की थी लेकिन मां के आंसू देख भी उसका दिल नहीं पसीजा।
मां के आंसू से भी नहीं पिघला
इस बीच मन्नान की मां का कहना था, ‘मैंने अपने खून का कतरा-कतरा उसे पढ़ाने लिखाने में लगा दिया। वो हमें धोखा दे गया’। मां ने उस समय मन्नान से लौट आने की अपील भी की थी लेकिन मां के आंसू देख भी उसका दिल नहीं पसीजा।