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गुलाब सिंह थे 18वीं सदी के गौरवशाली महाराज: उपराज्यपाल

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maharaja gulab singh
जम्मू। 18वीं शताब्दी में देश के सबसे गौरवशाली महाराजा गुलाब सिंह थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर का भूगोल और इतिहास बदलकर देश की सीमाओं का विस्तार किया है। यह बातें उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने महाराजा गुलाब सिंह के राजतिलक समारोह के 200 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में हरि निवास में आयोजित कार्यक्रम में कहीं। इस मौके पर महाराजा को श्रद्धांजलि अर्पित कर शौर्य गाथा को याद किया गया।
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उपराज्यपाल ने डॉ. पानेकर की किताब का जिक्र करते हुए कहा कि महाराजा गुलाब सिंह के समय में देश में ईस्ट इंडिया कंपनी की मनमानी की वजह से कई राज्यों में हाहाकार मचा था। लेकिन महाराजा गुलाब सिंह ने अपने शौर्य का परिचय देते हुए सीमाओं का विस्तार गिलगित, बाल्टीस्तान और तिब्बत तक किया। आजादी के बाद के इतिहास से सभी लोग परिचित हैं। जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद, भ्रष्टाचार और परिवारवाद हावी रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 की समाप्ति कर जम्मू-कश्मीर के सभी क्षेत्रों के साथ एक सामान व्यवहार और विकास को सुनिश्चित किया है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, पूर्व एमएलसी विक्रमादित्य सिंह, अजातशत्रु सिंह, सांसद जुगल किशोर शर्मा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना भी मौजूद रहे।
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महाराजा के साथ इतिहास ने किया अन्याय
महाराजा गुलाब सिंह मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व सदर-ए-रियासत डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि महाराजा के साथ इतिहास ने अन्याय किया है। महाराजा गुलाब सिंह ने अपने शासनकाल में प्रजा को हर सुख सुविधा दी। अपने पराक्रम का परिचय देते हुए देश की सीमाओं का विस्तार गिलगित, बाल्टीस्तान और तिब्बत से लेकर रूस की सीमा तक किया था। लेकिन देश के लोगों को उनका सही इतिहास नहीं पढ़ाया गया।
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महाराजा ने रखी डोगरा शासन काल की नींव: डॉ. जितेंद्र
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि महाराज गुलाब सिंह ने जम्मू-कश्मीर में डोगरा शासन काल की नींव रखी। महाराजा के राज तिलक समारोह के 200 साल पूरे होने का दिन ऐतिहासिक ही नहीं बल्कि उत्सव मनाने का है। डोगरा शासनकाल में न्याय आधारित प्रशासन पर बल दिया गया। मौलिक विषयों को प्राथमिकता दी गई। डोगरा शासन काल में उस समय दो डिग्री कॉलेज महाराजा ने बनवाए थे, जब देश के दूसरे हिस्सों से लोग सनातक तक की पढ़ाई करने लाहौर जाते थे।
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