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सिंधु जल समझौते से जम्मू-कश्मीर को हो रहा अरबों का नुकसान
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sat, 24 Sep 2016 12:40 PM IST
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sindhu river
- फोटो : sindhu river
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पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते से जम्मू-कश्मीर को दशकों से हजारों करोड़ का नुकसान हो चुका है। लद्दाख में सिंधु, कश्मीर में झेलम और जम्मू में चिनाब दरिया के जल का पर्याप्त प्रयोग रियासत नहीं कर पाई है। इस वजह से न तो क्षमता के मुताबिक बिजली उत्पादन हो पा रहा है और न की सिंचाई के लिए पानी का भरपूर इस्तेमाल हो पा रहा है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 19 सितंबर 1960 को तत्काल प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के मध्य सिंधु जल समझौता हुआ था। समझौते का सबसे ज्यादा नुकसान जम्मू कश्मीर को हुआ।
यहां की सिंधु नदी व झेलम तथा चिनाब दरिया का नियंत्रण पाकिस्तान को और पंजाब में बहने वाले दरिया ब्यास, रावी और सतलुज का नियंत्रण भारत को सौंपा गया। इस वजह से जम्मू कश्मीर में सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी का सीमित इस्तेमाल ही किया जा सका।
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आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 19 सितंबर 1960 को तत्काल प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के मध्य सिंधु जल समझौता हुआ था। समझौते का सबसे ज्यादा नुकसान जम्मू कश्मीर को हुआ।
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यहां की सिंधु नदी व झेलम तथा चिनाब दरिया का नियंत्रण पाकिस्तान को और पंजाब में बहने वाले दरिया ब्यास, रावी और सतलुज का नियंत्रण भारत को सौंपा गया। इस वजह से जम्मू कश्मीर में सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी का सीमित इस्तेमाल ही किया जा सका।
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सालाना होता है 6500 करोड़ का नुकसान
INDUS
- फोटो : File Photo
यहां पर पन बिजली परियोजनाएं केवल रन द वाटर स्कीम पर ही लगी हैं। इस वजह से सर्दियों में उत्पादन एक चौथाई से भी ज्यादा गिर जाता है। डैम की ऊंचाई सीमित होने की वजह से वाटर टूरिज्म भी विकसित नहीं हो पाया और सबसे अहम कृषि उत्पादन पर व्यापक असर पड़ा।
आईडब्लूएमआई- टाटा वाटर पालिसी प्रोग्राम की रिपोर्ट के अनुसार सिंधु जल समझौते की वजह से जम्मू कश्मीर को सालाना 6500 करोड़ के करीब का नुकसान झेलना पड़ रहा है। हालांकि रियासत के बिजली क्षेत्र के आला अधिकारी इस मामले में ज्यादा कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
राज्य विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन एवं जम्मू कश्मीर पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के पूर्व प्रबंधक निदेशक बशारत अहमद डार के अनुसार सिंधु जल समझौते से नुकसान पर वह कुछ वक्तव्य देने की स्थिति में नहीं हैं।
आईडब्लूएमआई- टाटा वाटर पालिसी प्रोग्राम की रिपोर्ट के अनुसार सिंधु जल समझौते की वजह से जम्मू कश्मीर को सालाना 6500 करोड़ के करीब का नुकसान झेलना पड़ रहा है। हालांकि रियासत के बिजली क्षेत्र के आला अधिकारी इस मामले में ज्यादा कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
राज्य विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन एवं जम्मू कश्मीर पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के पूर्व प्रबंधक निदेशक बशारत अहमद डार के अनुसार सिंधु जल समझौते से नुकसान पर वह कुछ वक्तव्य देने की स्थिति में नहीं हैं।
'तत्काल रद्द हो सिंधु जल समझौता'
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- फोटो : File Photo
भाजपा विधायक रविंद्र रैणा का कहना है कि पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता तत्काल रद्द होना चाहिए। उनका कहना है कि सिंधु जल समझौते से जम्मू संभाग के चिनाब दरिया और लद्दाख खित्ते की सिंधु नदी और कश्मीर के झेलम के पानी का रियासत जम्मू कश्मीर सीमित इस्तेमाल ही कर पाई है।
भारी नुकसान रियासत को झेलना पड़ा है। पाकिस्तान इसके बावजूद बाज नहीं आया और भारत विरोधी रहा है। सिंधु जल समझौते को खारिज कर इन नदियों का पानी देश के सूखाग्रस्त इलाकों तक पहुंचे इसके लिए ठोस योजना बनाई जानी चाहिए। बाढ़ की स्थिति में नदियों का पानी पाकिस्तान में भेजा जा सकता है।
भारी नुकसान रियासत को झेलना पड़ा है। पाकिस्तान इसके बावजूद बाज नहीं आया और भारत विरोधी रहा है। सिंधु जल समझौते को खारिज कर इन नदियों का पानी देश के सूखाग्रस्त इलाकों तक पहुंचे इसके लिए ठोस योजना बनाई जानी चाहिए। बाढ़ की स्थिति में नदियों का पानी पाकिस्तान में भेजा जा सकता है।