लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला: देश सेवा से कभी पीछे नहीं हटे लद्दाखी, सभी के लिए राष्ट्र हो सर्वोपरि
लोकसभा अध्यक्ष ने लद्दाख में पंचायती राज संस्थानों के सशक्तीकरण कार्यक्रम का किया उद्घाटन। उन्होंने बोला लद्दाख के लोग शांतिप्रिय, प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों में आत्मनिर्भर इकाई के रूप में उभर रहा।
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि लद्दाख के शांतिप्रिय लोग प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों में चुनौतियों का सामना करते हुए अनुकरणीय भूमिका में हैं। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों ने देश सेवा में आगे बढ़कर भूमिका निभाई है। सभी देशवासियों के हर प्रयास के केंद्र में राष्ट्रीय हित होना चाहिए। देश के लोगों का हित सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एकजुटता और सामूहिक प्रयासों की भावना से ही राष्ट्र का विकास हो सकता है। लेह के सिंधु सांस्कृतिक केंद्र में लद्दाख के पंचायती राज संस्थानों के सशक्तीकरण के लिए संसदीय आउटरीच कार्यक्रम के उद्घाटन पर शुक्रवार को उन्होंने यह बातें कहीं।
क्षेत्र की त्वरित विकास यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि 5 अगस्त 2019 के बाद लद्दाख के लोगाें को विकास में भागीदारी के ज्यादा अवसर मिले हैं। भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि लद्दाख का विकास क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दोनों ही पहलुओं से महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। क्षेत्र की अनूठी वास्तुकला, हस्तशिल्प और अन्य उत्पाद लंबी अवधि में लोगों के लिए आत्मनिर्भरता और विकास का आधार बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि देश को जब भी जरूरत पड़ी, लद्दाख के लोग राष्ट्र को सर्वोच्च बलिदान देने के लिए तत्पर रहे। लद्दाख के लोगों ने दूसरों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश किया है और कारगिल विजय इस भावना का एक उदाहरण है। कार्यक्रम में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, नवीन-नवीकरणीय ऊर्जा, रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा, लद्दाख के उपराज्यपाल आरके माथुर, सांसद सत्यपाल सिंह, सांसद नामग्याल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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लद्दाख के गांवों में रही है स्वशासन की व्यवस्था
क्षेत्र में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की मजबूती पर कहा कि लद्दाख में पारंपरिक रूप से गांवों में स्वशासन की व्यवस्था रही है। पंचायती राज संस्थाएं लोगों से सीधे जुड़ी हुई हैं जिससे वे लोगों की समस्याओं का समाधान भी कर सकती हैं।
लोकतांत्रिक संस्थानों की मजबूती के लिए लगातार संवाद
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उनका हमेशा से प्रयास रहा है कि देश भर के विभिन्न क्षेत्रों के लोकतांत्रिक संस्थानों के साथ नियमित चर्चा और संवाद किया जाए ताकि विचारों और अनुभवों का परस्पर आदान-प्रदान सुनिश्चित हो सके। नियमित चर्चा और रचनात्मक संवाद से लोकतंत्र में लोगों का विश्वास मजबूत होता है। इस दृष्टिकोण से लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत, जवाबदेह और पारदर्शी बनाया जा सकता है।