लोकसभा चुनाव: 370 हटने से बढ़े 11 लाख वोटर, पश्चिमी पाकिस्तानी रिफ्यूजियों सहित इन्हें मिला मतदान का हक
वर्ष 2019 में मतदाताओं की कुल संख्या 76 लाख के करीब थी। इनमें 39.45 लाख पुरुष व 36.38 लाख महिला मतदाता थीं। एक जनवरी 2024 को आधार मानकर 2023 में शुरू मतदाता पुनरीक्षण अभियान में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 86.93 लाख हो गई। यानी जम्मू-कश्मीर में 2019 से लगभग 11 लाख वोटर बढ़ गए हैं।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में बदले परिदृश्य में चुनाव को लेकर लोगों में उत्साह बढ़ गया है। प्रदेश में वोट बनवाने के लिए बड़ी संख्या में लोग आगे आ रहे हैं। 370 हटने के बाद पश्चिमी पाकिस्तान रिफ्यूजियों, वाल्मीकि व गोरखा समाज जैसे वर्गों के लोगों को पहली बार नागरिकता मिली है।
राज्य पुनर्गठन अधिनियम के प्रभावी होने की वजह से यहां विधानसभा व लोकसभा सीटों के परिसीमन का काम पांच मई 2022 को पूरा हुआ था। इसके चलते 2019 से मतदाता बनाने का काम ठप रहा। जब तीन साल बाद मतदाता बनाने का काम शुरू हुआ तो वोटर बनने वालों की संख्या अचानक बढ़ गई। नतीजतन जम्मू-कश्मीर में पांच साल में करीब 11 लाख वोटर बढ़ गए हैं।
परिसीमन पूरा होने पर जब तीन साल बाद मतदाता बनाने का अभियान सितंबर 2022 में शुरू हुआ तो आश्चर्यजनक ढंग से 11 लाख से अधिक लोगों ने वोटर बनने के लिए आवेदन किया।हालांकि, 11 लाख आवेदनों में से साढ़े तीन लाख को खारिज कर दिया गया। ऐसे में परिसीमन के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर में 7.72 लाख मतदाता बढ़ गए। कुल मतदाताओं की संख्या नवंबर 2022 में प्रकाशित मतदाता सूची के अनुसार 83.59 लाख तक पहुंच गई। इनमें 42.91 लाख पुरुष व 40.67 लाख महिला मतदाता थीं।
वर्ष 2019 में मतदाताओं की कुल संख्या 76 लाख के करीब थी। इनमें 39.45 लाख पुरुष व 36.38 लाख महिला मतदाता थीं। एक जनवरी 2024 को आधार मानकर 2023 में शुरू मतदाता पुनरीक्षण अभियान में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 86.93 लाख हो गई। यानी जम्मू-कश्मीर में 2019 से लगभग 11 लाख वोटर बढ़ गए हैं।
जानकार बताते हैं कि इतनी अधिक संख्या में मतदाताओं के बढ़ने के पीछे 370 हटने के बाद विभिन्न समुदायों को नागरिकता का अधिकार मिलने से आया उत्साह है। पश्चिमी पाकिस्तान रिफ्यूजियों, वाल्मीकि समाज, गोरखा समाज की बड़ी आबादी को प्रदेश से जुड़े चुनावों मसलन विधानसभा, पंचायत, नगर निकाय में वोटिंग अधिकार से वंचित रखा गया था। ऐसे में एक बड़ा तबका मताधिकार से वंचित था।
पहले विधानसभा व लोकसभा की अलग-अलग सूची होती थी। हालांकि, इन्हें लोकसभा चुनावों में वोट डालने का अधिकार था, लेकिन विधानसभा में मताधिकार न होने के कारण एक तबका वोट बनवाने के लिए ही आगे नहीं आता था।
देशभर में बसे कश्मीरी पंडितों को वोटर बनाने के लिए अलग से अभियान चलाया गया। कश्मीर के अलावा जम्मू, मुंबई, पुणे, बंगलूरू, अहमदाबाद, दिल्ली व चंडीगढ़ में विशेष टीमें भेजकर इन्हें वोटर बनाया गया। कुल 22 टीमें अलग-अलग इलाकों में भेजी गईं जिन्होंने घर-घर जाकर 18 साल की आयु पूरी करने वाले तथा वोटर बनने से छूट गए लोगों को वोटर सूची में जोड़ा।
आखिरी बार 1995 में हुआ था परिसीमन
जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार परिसीमन 1995 में हुआ था। उस समय जम्मू-कश्मीर में 12 जिले और 58 तहसीलें हुआ करती थीं। वर्तमान में प्रदेश में 20 जिले हैं और 270 तहसील हैं। पिछला परिसीमन 1981 की जनगणना के आधार पर हुआ था। नया परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया। सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग ने काम किया। इसमें प्रदेश में विधानसभा की सीटें 83 से बढ़कर 90 हो गईं।
मतदाता की संख्या (लाख में)
- मतदाता 2019 2022 2024
- पुरुष 39.45 42.91 44.35
- महिला 36.38 40.67 42.58
- कुल 75.83 83.59 86.93
- कुपवाड़ा 531678
- बारामुला 714413
- बांदीपोरा 258779
- गांदबल 204427
- श्रीनगर 748531
- बडगाम 511472
- पुलवामा 403795
- शोपियां 205755
- कुलगाम 323813
- अनंतनाग 666390
- किश्तवाड़ 122385
- डोडा 304311
- रामबन 218922
- रियासी 234706
- उधमपुर 419851
- कठुआ 501663
- सांबा 258110
- जम्मू 1178431
- राजोरी 485464
- पुंछ 347630
- कुल 8693788
- 1999 32.34
- 2004 35.20
- 2009 39.68
- 2014 49.72
- 2019 44.97