जम्मू। स्पोर्ट्स काउंसिल में अस्थायी प्रशिक्षकों को एक साल से वेतन नहीं मिला है, लेकिन खिलाड़ियों को निजि प्रशिक्षण प्रदान करके घर का खर्च चल जाता था। अब प्रशिक्षकों के लिए कोरोना संकट और देशव्यापी लॉकडाउन से खेल गतिविधियां बंद होने के कारण घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। आर्थिक तंगी ने प्रशिक्षकों की परेशानी बढ़ा दी है। अस्थायी प्रशिक्षकों को अंतिम बार मई 2019 में वेतन मिला था। इसके बाद से यह लोग वेतन के इंतजार में हैं।
कोरोना संकट में जहां सरकार हर नागरिक को सहायता प्रदान करने का आश्वासन दे रही है। वहीं काउंसिल में कार्यरत अस्थाई प्रशिक्षक सरकार और स्पोर्ट्स काउंसिल की उदासीनता का शिकार हैं। जम्मू और कश्मीर संभाग में कार्यरत अस्थाई प्रशिक्षकों ने स्पोर्ट्स काउंसिल के सचिव से कई बार वेतन जारी करने की गुहार लगाई है, लेकिन इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब इन प्रशिक्षकों ने उपराज्यपाल के सलाहकार फारूख खान तक अपनी बात पहुंचाई है। प्रशिक्षकों ने कहा कि काउंसिल उनके साथ सौतेला व्यवहार करती है। कोरोना संकट और लॉकडाउन जैसे कठिन समय में वेतन जारी नहीं करना काउंसिल के सौतेले व्यवहार को उजागर करता है। इन प्रशिक्षकों में किसी को सात हजार तो किसी को 13 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिलता है।