एलजी सिन्हा: जम्मू-कश्मीर में पारदर्शिता के आधार पर दी जा रहीं नौकरियां, पहले वाला भर्ती माफिया बौखलाहट में
उपराज्यपाल ने कहा कि अब जम्मू-कश्मीर में मेरिट और पारदर्शिता के आधार पर ही सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं। प्रदेश में पहले वाला भर्ती माफिया बौखलाहट में है लेकिन अब ऐसे माफियाओं की नहीं चलेगी। देश के कानून के तहत जम्मू-कश्मीर में भर्तियां की जा रही है।
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जम्मू-कश्मीर में मेरिट और पारदर्शिता के आधार पर ही सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं। प्रदेश में पहले वाला भर्ती माफिया बौखलाहट में है लेकिन अब ऐसे माफियाओं की नहीं चलेगी। देश के कानून के तहत जम्मू-कश्मीर में भर्तियां की जा रही हैं।
कई मामलों में प्रमाणित रूप से मिला है कि ऐसे कर्मियों के प्रमाणपत्र गलत थे, वे देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त थे, दफ्तरों में बैठकर काम नहीं कर रहे थे उन्हें नौकरी से बाहर किया गया है। यह बातें उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कन्वेंशन सेंटर जम्मू में बुधवार को कहीं।
एप्टेक परीक्षा भर्ती एजेंसी पर पूछे सवाल पर उपराज्यपाल ने कहा कि पिछली बार तीन भर्तियों पर लोगों ने संदेह व्यक्त किया। हमने समिति बनाकर जांच कराई और कुछ तथ्य पाए गए जिसके बाद इन मामलों को सीबीआई को जांच के लिए भेजा गया। जो एजेंसी परीक्षा करवा रही थी उसे निरस्त कर दिया गया।
एप्टेक मामले में पारदर्शी ढंग से निविदा हुई और उसे परीक्षा की जिम्मेदारी मिली, लेकिन हाल ही में होने वाली एक परीक्षा से पहले कुछ लोग न्यायालय में चले गए। इस बीच डबल बेंच ने सिंगल बेंच को सुनवाई करके फैसला करने को कहा।
लेकिन लोगों के मन में कोई संदेह न हो इसलिए हमने परीक्षा को स्थगित कर दिया। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी पर बख्शा नहीं जाएगा। मैं नौजवानों को कहना चाहता हूं जम्मू कश्मीर में जो 25000 भर्ती हुई है उनमें एक भी गलत नियुक्ति बताएं तो हम ठोस कार्रवाई करेंगे।
अमृतपाल के मामले पर कड़ी नजर
अमृतपाल के मामले में जम्मू कश्मीर से जुड़े तार के सवाल पर उपराज्यपाल ने कहा कि हमारे सुरक्षाबल स्थिति पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं। हम आश्वस्त करते हैं कि पंजाब की घटनाओं का असर जम्मू-कश्मीर में नहीं होगा। सीमावर्ती गांवों में सीमा पुलिस पोस्ट बनाने का उद्देश्य विकास के साथ सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
संपत्ति कर के मामले में लोगों से सुझाव मांगे
एलजी ने कहा-संपत्ति कर के बेहतर कार्यान्वयन के लिए लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। एक समिति इस पर काम कर रही है। हम संपत्ति कर पर पहले ही सारी बातें स्पष्ट कर चुके हैं। देश में सबसे बाद में जम्मू-कश्मीर में संपत्ति कर लगाया जा रहा है। दूसरे राज्यों की तुलना में बहुत कम कर लगाया जा रहा है।
नियमों के उल्लंघन पर ठेकेदारों को भुगतान से होगी दिक्कत
मुख्य सचिव ने कहा कि वर्ष 2018-19 से पहले बिना किसी उचित प्रणाली के सरकारी ठेके दे दिए जाते थे। इनमें अधिकांश में निविदा प्रक्रिया को नहीं अपनाया जाता था और फिर ये नियमों के तहत जांच में फंस जाते थे। लेकिन अब निविदाओं में प्रशासनिक मंजूरी, ई निविदा आदि का पालन किया जा रहा है।
इनमें जो ठेकेदार नियमों का उल्लंघन करेंगे उन्हें भुगतान में मुश्किलें आएंगी। सरकार किसी भी गलत काम का भुगतान नहीं करेगी। पहले यूटिलाइजेशन प्रमाणपत्र दे दिए जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। हमारी नजर में नियमों के तहत सभी बिलों का भुगतान कर दिया गया है। ऐसे किसी ठेकेदार का भुगतान लंबित नहीं है।
प्रदेश में 1994 के बाद ढाई लाख लोगों ने गलत ढंग से हासिल कीं नौकरियां : मेहता
मुख्य सचिव डॉ. अरुण मेहता ने कहा कि जम्मू -कश्मीर में करीब ढाई लाख लोगों ने विभिन्न सरकारी विभागों में गलत तरीके से नौकरियां हासिल की हैं। वर्ष 1994 के बाद विभिन्न एसआरओ (स्टेटचुरी रूल्स आर्डर ) के तहत लोगों को लगाया गया। एसआरओ 64 के तहत हजारों लोगों को लगा दिया गया।
करीब 60 हजार को नियमित भी कर दिया गया। इसी तरह विभिन्न विभागों में एक लाख से अधिक दिहाड़ीदार लगा दिए गए, जो आज तक स्थायी नहीं हो पाए। एसआरओ 520 के तहत भी ऐसा किया गया जो भारतीय संविधान और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है।