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उपराज्यपाल ने कहा: नए मतदाताओं के नाम पर जम्मू-कश्मीर के लोगों को भड़काया गया
Thu, 26 Jan 2023 12:13 AM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Thu, 26 Jan 2023 12:13 AM IST
सार
उपराज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के संविधान के तहत अब जम्मू-कश्मीर के हर नागरिक को लोकतंत्र के यज्ञ में आहुति डालने का अधिकार प्रदान किया गया है।
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LG Manoj Sinha
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
केद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि पिछले दिनों कुछ तत्वों ने नए मतदाताओं के नाम पर जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की भावनाओं को भड़काने का काम किया। मतदाता सूची अंतिम प्रकाशन में 11 लाख 28 हजार मतदाता ही बढ़े, जबकि बाहरी मतदाताओं के साथ 75 लाख नए मतदाताओं को जोड़ने की बात कही जा रही थी, लेकिन सच्चाई लोगों के सामने आ गई है। जिन लोगों ने मतदाता सूची में नाम नहीं जोड़ा है वह जल्द जुड़वाएं।
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खासतौर पर अधिक से अधिक संख्या में युवाओं, महिलाओं और कमजोर वर्ग के लोगों को जोड़ा जाए। उपराज्यपाल बुधवार को कन्वेंशन सेंटर जम्मू में 13 वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस के कार्यक्रम में बोल रहे थे।
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उपराज्यपाल ने कहा कि 5 अगस्त 2019 के पहले जम्मू-कश्मीर में स्थिति अलग थी। कई वर्गों के साथ भेदभाव हो रहा था। उन्हें मतदान का अधिकार नहीं था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के संविधान के तहत अब जम्मू-कश्मीर के हर नागरिक को लोकतंत्र के यज्ञ में आहुति डालने का अधिकार प्रदान किया गया है।
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इससे लोकतंत्र की भावना मजबूत हुई है। परिसीमन प्रक्रिया के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार विधानसभा में नौ सीटें आरक्षित की गई हैं। इसका उद्देश्य पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस पर यह दिवस मनाया जा रहा है। गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले 25 जनवरी 1950 को निष्पक्ष और मजबूत निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई थी।
यह लोकतांत्रिक परंपराओं और राष्ट्र के निर्माताओं के अटूट विश्वास का प्रतीक है। यह प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक है और उसे मतदान के कर्त्तव्य के लिए याद दिलाता है। चुनाव के दौरान मतदान करना राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना है। चुनाव का मतलब सिर्फ वर्तमान नहीं, बल्कि समाज और देश का भविष्य होता है। इससे मजबूत लोकतंत्र बनता है। जम्मू-कश्मीर में पिछले पंचायत चुनावों में संबंधित अधिकारियों के साथ मतदाताओं ने पंचायती राज व्यवस्था की परिकल्पना को अमली जामा पहनाने में सहयोग दिया। वीडीसी चुनाव में भी युवाओं ने उत्साह दिखाया।
जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए सभी चुनावों में हर वर्ग के लोगों ने खुलकर मतदान किया। सामान्य लोगों की भागीदारी बढ़ने से लोकतंत्र मजबूत होगा। जम्मू-कश्मीर में पहले दो तरह के विधायक होते थे जिसमें जनता का निर्वाचित और दूसरे नामित, लेकिन अब इससे जम्मू-कश्मीर मुक्त हो गया है। उम्मीद है कि निर्वाचन आयोग जम्मू-कश्मीर में निष्पक्ष विधानसभा चुनाव करवाएगा। हमने कई उपलब्धियों को हासिल किया है।
जम्मू-कश्मीर की तुलना देश में कई बड़े क्षेत्रों से की जा रही है। ऐसा लोकतांत्रिक ढांचा विकसित किया गया है जिससे आम लोगों की आकांक्षाओं और उम्मीदों पर काम हो सके। भारत के लोकतंत्र का पूरी दुनिया में अलग स्थान हासिल है। चुनाव प्रक्रिया में नवीन तकनीक का इस्तेमाल किया जाए। इससे पूर्व हाल में सभी लोगों ने मतदान को लेकर प्रतिज्ञा ली। इस दौरान देश के मुख्य चुनाव अधिकारी राजीव कुमार ने वर्चुअल माध्यम से मतदान और मतदान प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं के महत्व पर प्रकाश डाला।
मतदान के समय दिव्यांगों का दर्द दिखाया
राष्ट्रीय मतदाता दिवस कार्यक्रम में लघु नाटकों में मतदान के महत्व और दिव्यांगों के लिए चुनाव प्रक्रिया के दौरान होने वाली परेशानियों को दिखाया गया। कॉलेज छात्रों द्वारा पेश किए गए लघु नाटक में दिखाया गया कि मतदान करना हमारे लिए कितना जरूरी है। यह मतदान हमारा और हमारे देश का भविष्य तय करता है। मतदान न करना जीवन में एक बड़ी भूल की तरह है। इसी तरह दिव्यांगों द्वारा पेश किए गए नाटक में दिखाया गया कि मतदान प्रक्रिया के दौरान उन्हें किन परेशानियों से गुजरना पड़ता है। हालांकि इसके साथ यह भी बताया गया कि निर्वाचन आयोग की ओर से दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाएं मुहैया करवाई जाती हैं।