जम्मू कश्मीर में लश्कर सक्रिय कर रहा है पुराने आतंकियों को
- लश्कर-ए-तोयबा और हिजबुल मुजाहिदीन सहित अन्य आतंकी संगठनों ने रियासत के पुराने आतंकियों को सक्रिय किया है।
- ओवर ग्राउंड वर्करों की मदद से पुराने आतंकियों को फिर से सक्रिय किया गया है
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भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा में भले ही गोलाबारी तथा घुसपैठ की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन आतंकी संगठनों ने जम्मू-कश्मीर में वारदातों के अंजाम देने के लिए नया रुख अख्तियार किया है।
लश्कर-ए-तोयबा और हिजबुल मुजाहिदीन सहित अन्य आतंकी संगठनों ने रियासत के पुराने आतंकियों को सक्रिय किया है, जो आंतरिक सुरक्षा में नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ की हाल की घटनाओं पर नजर दौड़ाएं तो मारे गए आतंकियों में पाकिस्तानी कम, रियासत के ज्यादा हैं।
घुसपैठ करवाने में असफल होने के बाद जम्मू कश्मीर में सक्रिय ओवर ग्राउंड वर्करों की मदद से पुराने आतंकियों को फिर से सक्रिय किया गया है। एक उच्च पुलिस अधिकारी का कहना है कि मुठभेड़ में जब भी स्थानीय आतंकी ढेर होता है तो लोग सड़कों पर उतर आते हैं।
इतना ही नहीं, यदि किसी स्थान पर मुठभेड़ चल रही होती है तो स्थानीय लोग नारेबाजी और पथराव कर अभियान में व्यवधान डाल रहे हैं, जो बड़ी समस्या है। इससे सुरक्षा बलों को आतंकियों से निपटने के अलावा स्थानीय लोगों के विरोध का भी सामना कर पड़ रहा है।
कई बार हिंसक प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ती है, जिसमें कई नागरिक भी जख्मी हो रहे हैं।
दो दिन पहले मारा गया था कुख्यात आतंकी
रविवार को कुलगाम जिले के बुचरु गांव में एक मकान में छिपे आतंकियों में से एक को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। इसकी शिनाख्त दाउद अहमद शेख के रूप में हुई, जो ऋषिपोरा कुलगाम का था। 16 जुलाई 2014 को हुई टेरीटोरियल आर्मी (टीए) के एक लांस नायक की हत्या में भी दाउद शामिल रहा है।
घटना स्थल से फरार होने वाले मृतक आतंकी के साथी भी कुलगाम के बताए जा रहे हैं। इसी सप्ताह पुलवामा जिले में त्राल के डडसारा इलाके में सुरक्षा बलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया। तीनों आतंकी स्थानीय थे और 2014 में हिजबुल में शामिल हुए थे।
मारा गया एक आतंकी आशिक हुसैन भट्ट ए प्लस प्लस श्रेणी का आतंकी था। उधमपुर में बीएसएफ हमले में शामिल पाकिस्तानी आतंकियों को उसने अभियान में आर्थिक और योजना में मदद की थी, जिसकी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को तलाश थी।