{"_id":"6ac565cee06559a585050936","slug":"health-news-jammu-news-c-10-jmu1059-1032362-2026-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: जीएमसी जम्मू में पहली बार सफलतापूर्वक लगाया लीडलेस पेसमेकर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: जीएमसी जम्मू में पहली बार सफलतापूर्वक लगाया लीडलेस पेसमेकर
विज्ञापन
- दो बार सामान्य पेसमेकर में संक्रमण के बाद मरीज के लिए अपनाया गया नया तरीका
- दिल के अंदर सीधे लगाया गया एवीईआईआर वीआर, नस के रास्ते तार डालने की जरूरत नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। दो बार पेसमेकर में संक्रमण हो चुके एक मरीज के इलाज में सुपरस्पेशलिटी अस्पताल, जीएमसी जम्मू के कार्डियोलॉजी विभाग ने पहली बार एवीईआईआर वीआर लीडलेस पेसमेकर सफलतापूर्वक लगाया है। मरीज को कंप्लीट हार्ट ब्लॉक था और वह बार-बार बेहोश हो रहा था। कुछ मौकों पर उसके दिल की धड़कन रुकने की स्थिति भी बनी। पहले जान बचाने के लिए उसे अस्थायी पेसमेकर लगाया गया। पुराने पेसमेकर में दो बार संक्रमण हो चुका था, इसलिए इस बार डॉक्टरों ने ऐसा पेसमेकर चुना, जिसे सीधे दिल के अंदर लगाया जाता है और इसमें नस के रास्ते तार डालने की जरूरत नहीं होती।
मरीज के बाईं ओर पहले पेसमेकर दूसरे केंद्र में लगाया गया था, लेकिन उसमें संक्रमण हो गया। इसके बाद दाईं ओर दूसरा पेसमेकर लगाया गया, उसमें भी संक्रमण हो गया। इसके बाद मरीज के शरीर में स्थायी पेसमेकर नहीं था। बाद में उसे कंप्लीट हार्ट ब्लॉक, बार-बार बेहोशी और दिल की धड़कन रुकने की समस्या के साथ अस्पताल लाया गया। मरीज की हालत को देखते हुए शुरुआत में नस के रास्ते अस्थायी पेसमेकर लगाया गया। बार-बार पेसमेकर में संक्रमण हो चुका था, इसलिए स्थायी पेसमेकर लगाने के लिए ऐसा विकल्प चुना गया जिसमें संक्रमण की पुरानी समस्या को देखते हुए शरीर में सामान्य पेसमेकर की तरह अलग जगह और तार की जरूरत न पड़े।
-- -- -- -- -- -- -- -- --
सीधे दिल के अंदर ही लगाया जाता है लीडलेस पेसमेकर
एवीईआईआर वीआर लीडलेस पेसमेकर सीधे दिल के अंदर लगाया जाता है। सामान्य पेसमेकर की तरह इसके लिए त्वचा के नीचे अलग जगह बनाने और नस के रास्ते तार को दिल तक पहुंचाने की जरूरत नहीं होती। बार-बार पेसमेकर से जुड़ा संक्रमण झेल चुके मरीजों में यह एक विकल्प हो सकता है।
विज्ञापन
यह प्रक्रिया कार्डियोलॉजी विभाग की टीम ने प्रोफेसर डॉ. धर्मिंदर कुमार और प्रोफेसर डॉ. संजीव भाट की अगुवाई में की। फोर्टिस अस्पताल, नई दिल्ली के डॉ. सुधांशु शेखर परिडा ने विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया।
विज्ञापन
- दिल के अंदर सीधे लगाया गया एवीईआईआर वीआर, नस के रास्ते तार डालने की जरूरत नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। दो बार पेसमेकर में संक्रमण हो चुके एक मरीज के इलाज में सुपरस्पेशलिटी अस्पताल, जीएमसी जम्मू के कार्डियोलॉजी विभाग ने पहली बार एवीईआईआर वीआर लीडलेस पेसमेकर सफलतापूर्वक लगाया है। मरीज को कंप्लीट हार्ट ब्लॉक था और वह बार-बार बेहोश हो रहा था। कुछ मौकों पर उसके दिल की धड़कन रुकने की स्थिति भी बनी। पहले जान बचाने के लिए उसे अस्थायी पेसमेकर लगाया गया। पुराने पेसमेकर में दो बार संक्रमण हो चुका था, इसलिए इस बार डॉक्टरों ने ऐसा पेसमेकर चुना, जिसे सीधे दिल के अंदर लगाया जाता है और इसमें नस के रास्ते तार डालने की जरूरत नहीं होती।
मरीज के बाईं ओर पहले पेसमेकर दूसरे केंद्र में लगाया गया था, लेकिन उसमें संक्रमण हो गया। इसके बाद दाईं ओर दूसरा पेसमेकर लगाया गया, उसमें भी संक्रमण हो गया। इसके बाद मरीज के शरीर में स्थायी पेसमेकर नहीं था। बाद में उसे कंप्लीट हार्ट ब्लॉक, बार-बार बेहोशी और दिल की धड़कन रुकने की समस्या के साथ अस्पताल लाया गया। मरीज की हालत को देखते हुए शुरुआत में नस के रास्ते अस्थायी पेसमेकर लगाया गया। बार-बार पेसमेकर में संक्रमण हो चुका था, इसलिए स्थायी पेसमेकर लगाने के लिए ऐसा विकल्प चुना गया जिसमें संक्रमण की पुरानी समस्या को देखते हुए शरीर में सामान्य पेसमेकर की तरह अलग जगह और तार की जरूरत न पड़े।
विज्ञापन
सीधे दिल के अंदर ही लगाया जाता है लीडलेस पेसमेकर
एवीईआईआर वीआर लीडलेस पेसमेकर सीधे दिल के अंदर लगाया जाता है। सामान्य पेसमेकर की तरह इसके लिए त्वचा के नीचे अलग जगह बनाने और नस के रास्ते तार को दिल तक पहुंचाने की जरूरत नहीं होती। बार-बार पेसमेकर से जुड़ा संक्रमण झेल चुके मरीजों में यह एक विकल्प हो सकता है।
विज्ञापन
यह प्रक्रिया कार्डियोलॉजी विभाग की टीम ने प्रोफेसर डॉ. धर्मिंदर कुमार और प्रोफेसर डॉ. संजीव भाट की अगुवाई में की। फोर्टिस अस्पताल, नई दिल्ली के डॉ. सुधांशु शेखर परिडा ने विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया।