अब विधान परिषद चुनाव के लिए गर्माएगी सियासत
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राज्यसभा चुनाव के बाद अब सियासी दलों में विधान परिषद चुनाव के लिए सियासत गर्माने लगी है। हालांकि चुनाव आयोग की तरफ से अभी इस दिशा में कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन मार्च महीने में पंद्रह विधान परिषद सदस्यों के कार्यकाल की समाप्ति को देखते हुए सियासी दलों में व्यूह रचना का काम शुरू हो चुका है।
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राज्यसभा चुनाव में भाजपा-पीडीपी के चक्रव्यूह को भेदकर राज्यसभा की सीट पर जीत हासिल करने वाले कांग्रेस प्रत्याशी गुलाम नबी आजाद की जीत के बाद आगामी विधान परिषद चुनाव में भाजपा-पीडीपी कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। इसलिए पार्टी स्तर पर अभी से ही चर्चाओं का दौर जारी हो चुका है।
समाप्त हो रहा 15 परिषद सदस्यों का कार्यकाल
मार्च महीने में आठ नेकां, पांच कांग्रेस, पीडीपी और पैंथर्स के एक-एक सदस्य का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनमें चेयरमैन अमृत मल्होत्रा, सईद असगर अली, विजय बकाया, नोरबू गियालचन, बीआर कुंडल, बशीर अहमद माग्रे, शेख गुलाम कादिर परदेसी, जावेद अहमद राणा, शेख गुलाम रसूल, आगा सईद अहमद रिजवी अजय कुमार सडोत्रा, सईद मोहम्मद रफीक शाह, रविंद्र कुमार शर्मा, अजातशत्रु सिंह और खालिद नजीब सोहरावर्दी भी शामिल है।
पार्टी स्तर पर कयासों का दौर भी तेज है। माना जा रहा है राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद की मदद करने पर नेशनल कांफ्रेंस के सदस्यों का कांग्रेस एमएलसी चुनाव में समर्थन करेगी। भाजपा-पीडीपी लगभग बराबर की सीटों पर गठबंधन में चुनाव लड़ सकते हैं।