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Jammu News: हिल काउंसिलों की खस्ता वित्तीय हालत से लद्दाख के कर्मचारी चिंतित
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लेह। लद्दाख में छठी अनुसूची के लिए चल रहे आंदोलन के बीच विभिन्न हिल काउंसिलों में गंभीर वित्तीय संकट और महीनों तक वेतन देने में असमर्थता के बारे में रिपोर्टों ने प्रदेश के कई सरकारी मुलाजिमों को चिंता में डाल दिया है। बता दें, पुलिस और न्यायपालिका को छोड़कर जिला स्तर के सभी कर्मचारी लेह और कारगिल हिल काउंसिलों के तहत कार्य करते हैं।
रिपोर्टों के अनुसार गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (मेघालय) ने पिछले 30 महीनों से अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया है। इसके कर्मचारी लंबे समय से लंबित वेतन जारी करने की मांग को लेकर समय-समय पर विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं।
इसी तरह की समस्याओं का सामना जैंतिया हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (जेएचएडीसी) और खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद के कर्मचारियों को भी करना पड़ा। अक्तूबर 2023 में जेएचएडीसी कर्मचारियों ने 10 महीने से लंबित वेतन के भुगतान की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। हाल ही में, मुख्यमंत्री (मेघालय) कॉनराड संगमा ने कहा था, सरकार हर संभव तरीके से समर्थन कर रही है लेकिन प्राथमिक जिम्मेदारी स्वायत्त परिषदों की है क्योंकि वे स्वायत्त हैं और उन्हें अपने वित्त और उनके सुधारों और अन्य कदमों का ध्यान रखना है और अपना प्रशासन स्वतंत्र रूप से करना होगा। हम यहां मदद और समर्थन के लिए हैं, लेकिन हम वेतन देने की पूरी जिम्मेदारी नहीं ले सकते। राज्य में कार्यरत अन्य परिषदों से भी इसी तरह के मुद्दे सामने आए हैं।
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लद्दाख यूटी में एक कर्मचारी ने कहा, सरकारी कर्मचारियों के रूप में हम खुलकर बात नहीं कर सकते हैं। हालांकि हम छठी अनुसूची के तहत हिल काउंसिलों के प्रदर्शन को देखते हुए अपने भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हैं। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि लद्दाख को सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है, हालांकि, हमें अन्य राज्यों के अनुभवों से सीखना चाहिए और एक व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।
एक अन्य सरकारी कर्मचारी ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल छठी अनुसूची की कार्यप्रणाली का अध्ययन किए बिना आंख मूंदकर छठी अनुसूची की मांग कर रहे हैं। चिंता व्यक्त की कि छठी अनुसूची के तहत यूटी प्रशासन/केंद्र वेतन संबंधी खर्च वहन नहीं कर सकता है और कर्मचारियों को आर्थिक रूप से नुकसान होगा जैसा कि अन्य छठी अनुसूची क्षेत्रों में देखा गया है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने इस वर्ष उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठकों के दौरान भूमि, रोजगार और संस्कृति की सुरक्षा और एलएएचडीसी के सशक्तिकरण के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की पेशकश की थी। हालाँकि, लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के प्रतिनिधियों ने छठी अनुसूची पर जोर दिया। चूंकि दोनों पक्ष एक आम समाधान पर सहमत होने में विफल रहे, तो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के रूप में विरोध शुरू हो गया, जिसे लद्दाख और बाहर दोनों जगह महत्वपूर्ण समर्थन मिला।.
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रिपोर्टों के अनुसार गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (मेघालय) ने पिछले 30 महीनों से अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया है। इसके कर्मचारी लंबे समय से लंबित वेतन जारी करने की मांग को लेकर समय-समय पर विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं।
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इसी तरह की समस्याओं का सामना जैंतिया हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (जेएचएडीसी) और खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद के कर्मचारियों को भी करना पड़ा। अक्तूबर 2023 में जेएचएडीसी कर्मचारियों ने 10 महीने से लंबित वेतन के भुगतान की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। हाल ही में, मुख्यमंत्री (मेघालय) कॉनराड संगमा ने कहा था, सरकार हर संभव तरीके से समर्थन कर रही है लेकिन प्राथमिक जिम्मेदारी स्वायत्त परिषदों की है क्योंकि वे स्वायत्त हैं और उन्हें अपने वित्त और उनके सुधारों और अन्य कदमों का ध्यान रखना है और अपना प्रशासन स्वतंत्र रूप से करना होगा। हम यहां मदद और समर्थन के लिए हैं, लेकिन हम वेतन देने की पूरी जिम्मेदारी नहीं ले सकते। राज्य में कार्यरत अन्य परिषदों से भी इसी तरह के मुद्दे सामने आए हैं।
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लद्दाख यूटी में एक कर्मचारी ने कहा, सरकारी कर्मचारियों के रूप में हम खुलकर बात नहीं कर सकते हैं। हालांकि हम छठी अनुसूची के तहत हिल काउंसिलों के प्रदर्शन को देखते हुए अपने भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हैं। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि लद्दाख को सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है, हालांकि, हमें अन्य राज्यों के अनुभवों से सीखना चाहिए और एक व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।
एक अन्य सरकारी कर्मचारी ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल छठी अनुसूची की कार्यप्रणाली का अध्ययन किए बिना आंख मूंदकर छठी अनुसूची की मांग कर रहे हैं। चिंता व्यक्त की कि छठी अनुसूची के तहत यूटी प्रशासन/केंद्र वेतन संबंधी खर्च वहन नहीं कर सकता है और कर्मचारियों को आर्थिक रूप से नुकसान होगा जैसा कि अन्य छठी अनुसूची क्षेत्रों में देखा गया है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने इस वर्ष उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठकों के दौरान भूमि, रोजगार और संस्कृति की सुरक्षा और एलएएचडीसी के सशक्तिकरण के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की पेशकश की थी। हालाँकि, लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के प्रतिनिधियों ने छठी अनुसूची पर जोर दिया। चूंकि दोनों पक्ष एक आम समाधान पर सहमत होने में विफल रहे, तो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के रूप में विरोध शुरू हो गया, जिसे लद्दाख और बाहर दोनों जगह महत्वपूर्ण समर्थन मिला।.