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Ladakh Election: केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख में पहला संसदीय चुनाव, 577 केंद्र में पड़ेंगे वोट
Sun, 19 May 2024 05:48 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लद्दाख
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लद्दाख
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Sun, 19 May 2024 05:48 PM IST
सार
लद्दाख निर्वाचन क्षेत्र में 182,571 पंजीकृत मतदाता हैं और 2019 के चुनावों में सराहनीय 76.4% मतदान हुआ, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में क्षेत्र की मजबूत भागीदारी को दर्शाता है।
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लद्दाख लोकसभा चुनाव
- फोटो : डीपीआईआर, लद्दाख
विस्तार
केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख में सोमवार 20 मई को पहला संसदीय चुनाव होने जा रहा है। इसे लेकर सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। रविवार को पोलिंग पार्टियां अधिकारियों से जरूरी निर्देश लेकर अपने पोलिंग स्टेशन के लिए रवाना हुईं।
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2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के साथ ही लद्दाख को जम्मू-कश्मीर अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।
लद्दाख के दो जिला लेह और कारगिल में कुल 577 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। लद्दाख क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा संसदीय क्षेत्र है। इनमें से उल्लेखनीय नवीन व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। इनमें 15,000 फीट की ऊंचाई पर तम्बू निर्मित मतदान केंद्र और वारशी के सुदूर गांव में एक एकल परिवार के लिए विशेष रूप से बनाया गया एक मतदान केंद्र भी शामिल है।
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मुख्य निर्वाचन अधिकारी यतिंद्र एम. मरालकर ने समावेशिता और सभी के लिए मतदान की पहुंच के प्रति चुनाव आयोग की प्रतिबद्धता के बारे में बताया। इसमें यह सुनिश्चित किया जा गया है कि सबसे दूरस्थ मतदाता भी मतदान में आसानी से भाग ले सकें। बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
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लद्दाख निर्वाचन क्षेत्र में 182,571 पंजीकृत मतदाता हैं और 2019 के चुनावों में सराहनीय 76.4% मतदान हुआ, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में क्षेत्र की मजबूत भागीदारी को दर्शाता है।
तीन उम्मीदवार मैदान में
लद्दाख सीट से तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने मौजूदा सांसद की जगह ताशी ग्यालसन और कांग्रेस ने त्सेरिंग नामग्याल को मैदान में उतारा है। यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने जा रहा है। लेह से भाजपा और कांग्रेस ने उम्मीदवार उतारे गए हैं। वहीं, कारगिल से स्वतंत्र उम्मीदवार हाजी हनीफा जान चुनाव लड़ रहे हैं। कारगिल में हनीफा को नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां), कांग्रेस और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के समर्थकों का भी साथ मिला है। अब देखना चार जून को होगा कि तीनों में से किस उम्मीदवार का समर्थन जीत में बदलता है।