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Kheer Bhawani Mela: जम्मू से कश्मीरी पंडितों का जत्था खीर भावानी मेले के लिए रवाना

Tue, 07 Jun 2022 02:58 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Tue, 07 Jun 2022 02:58 PM IST
सार

गांदरबल में खीर भवानी मेले में शामिल होने के लिए 50 बसों में कश्मीरी पंडित परिवार जम्मू से रवाना हुए।  हालांकि, जम्मू में रहने वाले अधिकांश कश्मीरी पंडित संगठनों ने इस बार मेले में नहीं जाने का फैसला लिया है। इसका असर भी यात्रा पर दिखा।

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Kheer Bhawani mela batch of Kashmiri Pandits families leave for Kheer Bhawani temple from Jammu to ganderbal
Kheer Bhawani Mela - फोटो : संजय कुमार

विस्तार

दो साल बाद मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के तुलमुला इलाके में स्थित खीर भवानी मंदिर में बुधवार को वार्षिक मेले का आयोजन होने जा रहा है। इसमें शामिल होने के लिए मंगलवार को कड़ी सुरक्षा में 50 बसों में कश्मीरी पंडित परिवार जम्मू से रवाना हुए। जम्मू के मंडल आयुक्त रमेश कुमार ने झंडी दिखाकर श्रद्धालुओं को मेले के लिए रवाना किया।
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मंडल आयुक्त रमेश कुमार ने कहा कि यात्रा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में लोग बिना किसी डर के माता के मेले में शामिल होने के लिए जाएं।
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इससे पहले राहत और पुनर्वास विभाग के आयुक्त अजय पंडिता ने खीर भावनी मंदिर का दौरा कर सोमवार को सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि मेले में सभी प्रबंध पूरे हो चुके हैं। जम्मू से कई कश्मीरी पंडितों ने खीर भवानी मेले में शामिल होने के लिए पंजीकरण किया है। लोगों की सुविधा के लिए 50 बसों का प्रबंध किया है।
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Kheer Bhawani mela batch of Kashmiri Pandits families leave for Kheer Bhawani temple from Jammu to ganderbal
Kheer Bhawani Mela - फोटो : संजय कुमार
जम्मू के करीब 250 कश्मीरी पंडित और स्थानीय लोग कश्मीर के लिए रवाना हो गए हैं। तीर्थयात्री बुधवार को मंदिर में दर्शन करेंगे और एक दिन बाद जम्मू लौटेंगे। कश्मीर में पांच मंदिरों में खीर भवानी मेलों का आयोजन किया जाता है। गांदरबल के तुलमुल्ला में, कुलगाम के मंजगाम व देवसर में, अनंतनाग के लोगरीपोरा में और कुपवाड़ा के टिक्कर में रागनी भगवती मंदिर में मेले का आयोजन होता है।

इनमें से विशाल चिनार के पेड़ों की छाया में बसे तुलमुल्ला मंदिर में गांदरबल के तुलमुल्ला स्थित खीर भवानी मंदिर में बड़ी संख्या में कश्मीर और देश के विभिन्न हिस्सों में बसे पंडित के माता का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं ने कहा कि दो साल बाद इस मेले का आयोजन हो रहा है। ऐसे में वे इसमें शामिल होने के जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में शांति और समृद्धि के लिए माता से प्रार्थना करेंगे। मेले से कश्मीरी पंडितों की कई यादें जुड़ी हैं, जिसके चलते कश्मीरी पंडितों को इसका बेसब्री से इंतजार रहता है।


 

Kheer Bhawani mela batch of Kashmiri Pandits families leave for Kheer Bhawani temple from Jammu to ganderbal
Kheer Bhawani Mela - फोटो : संजय कुमार
1912 में हुआ था मंदिर का निर्माण

इस मंदिर का निर्माण 1912 में महाराजा प्रताप सिंह ने कराया था। बाद में महाराजा हरी सिंह ने जीर्णोद्धार कराया। यह कश्मीरी पंडितों का प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यता है कि रावण की भक्ति से प्रसन्न होकर मां राज्ञा माता ( खीर भवानी या राग्याना देवी) ने रावण को दर्शन दिए थे। जिसके बाद रावण ने उनकी स्थापना श्रीलंका की कुलदेवी के रूप में की थी। 

कुछ समय बाद रावण के व्यवहार और बुरे कर्मों के चलते देवी उससे रुष्ट हो गईं और श्रीलंका से जाने की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद जब भगवान राम ने रावण का वध कर दिया तो उन्होंने भगवान हनुमान को यह काम दिया कि वह देवी के लिए उनका पसंदीदा स्थान चुनें और स्थापित करें। इस पर देवी ने कश्मीर के तुलमुला को चुना।

माना जाता है कि वनवास के दौरान राम राग्याना माता की आराधना करते थे तो मां राज्ञा माता को रागिनी कुंड में स्थापित किया गया।
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