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घंटों की गूंज से घाटी के दोबारा आबाद होने का कश्मीरी पंडितों को इंतजार

Tue, 19 Jan 2021 05:00 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 19 Jan 2021 05:00 PM IST
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Kashmiri Pandits Displacement 19 January 1990 Pandits wait for the valley
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के तीन दशक बाद घर वापसी की दिशा में तो कोई प्रगति नजर नहीं आ रही है, लेकिन मंदिरों के संरक्षण की दिशा में कुछ काम शुरू हुआ है। पर्यटन विभाग की ओर से श्रीनगर के रघुनाथ मंदिर और सिद्धिविनायक मंदिर के जीर्णोंद्धार का काम शुरू हुआ है। अब पंडितों को इसका इंतजार है कि घाटी दोबारा घंटों की गूंज से आबाद होगी। अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र सरकार ने कहा था कि क्षतिग्रस्त मंदिरों के पुराने वैभव को लौटाया जाएगा। पंडितों की संपत्तियों को चिह्नित कर उन्हें उनका मालिकाना हक भी दिलाया जाएगा।

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घाटी में जब आतंकवाद का दौर शुरू हुआ तो आतंकियों ने पंडितों के घर जला दिए। कई घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। मंदिर भी जलाए गए। भगवान की मूर्तियों को तोड़ा गया। आंकड़ों के अनुसार 1989 से 1998 तक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की 4858 घटनाएं हुईं। इनमें से 1277 सरकारी भवनों, 770 शिक्षा संस्थानों, 10 अस्पतालों, 8560 निजी मकानों, 344 मकानों और 1708 दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया। वर्ष 2012 में जम्मू-कश्मीर सरकार ने विधानसभा में रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें बताया गया था कि पिछले दो दशक में घाटी में 208 मंदिरों को नुकसान पहुंचा है।
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यह भी पढ़ेंः कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का दर्दः हाथ पैर की हड्डियां तोड़ी, आंख फोड़ी फिर...   
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हालांकि, सरकार ने नुकसान के कारणों और जिम्मेदार लोगों के बारे में कुछ नहीं कहा था। सबसे अधिक श्रीनगर में 57 व अनंतनाग में 56 मंदिरों के नुकसान का रिपोर्ट में जिक्र है। सरकार ने यह भी बताया था कि आतंकवाद के दौर में 209 पंडित मारे गए। श्रीनगर में 1234 व कुलगाम में 754 ढांचों को जलाया गया। गृह मंत्रालय ने भी 1993 में एक रिपोर्ट जारी कर बताया था कि 1986 में सांप्रदायिक हिंसा की भेंट 36 मंदिर चढ़े। 1988 में आठ, 1989 में 12, 1990 में आठ, 1991 में पांच और 1992 में 24 मंदिरों को नुकसान पहुंचा।
 

घाटी में अब भी हैं 808 हिंदू परिवार

कश्मीरी पंडितों का कहना है कि सरकार की ओर से मारे गए लोगों की संख्या और मंदिरों की संख्या कम बताई गई है। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू का कहना है कि सरकार ने कोर्ट में एक मामले में रिपोर्ट दी है कि 457 मंदिर घाटी में हैं। उनकी संस्था की ओर से कराए गए सर्वे में 1845 मंदिर, आश्रम, नाग व कुएं की बात सामने आई है। साथ ही 342 श्मशान भूमि का पता चला है जिनमें से अधिकांश पर कब्जा हो गया है। उनका कहना है कि घाटी में अब भी कश्मीरी पंडितों समेत 808 हिंदू परिवार 245 जगहों पर रहते हैं। पूरी घाटी में 17 हजार सिख परिवार हैं। कश्मीरी पंडितों के 700 परिवारों के पास अपना मकान है, जबकि अन्य किराए पर रह रहे हैं। वे कहते हैं कि 1992 में बाबरी विध्वंस और 1995 में चरार ए शरीफ घटनाक्रम के दौरान मंदिरों को नुकसान पहुंचानेे की घटनाएं अधिक हुईं।

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