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Jammu News: विस्थापित कश्मीरी पंडितों के सबसे बड़े संगठन पनुन कश्मीर ने अपना लिखित संविधान अपनाया
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जम्मू। विस्थापित कश्मीरी पंडितों के सबसे बड़े संगठन पनुन कश्मीर ने रविवार को जम्मू में आयोजित सम्मेलन में औपचारिक रूप से अपना लिखित संविधान अपनाया। वक्ताओं ने कहा कि यह सम्मेलन आंदोलन के लिए औपचारिक रूप से संहिताबद्ध संवैधानिक ढांचे की ओर बढ़ा है। इसका उद्देश्य भावी पीढ़ियों के लिए संगठनात्मक निरंतरता, राजनीतिक स्पष्टता और सभ्यतागत संकल्प को संरक्षित करना है।
आयोजन सचिव बिहारी लाल कौल ने पनुन कश्मीर को समुदाय के सामने मौजूद संचित ऐतिहासिक, राजनीतिक और अस्तित्व को संरक्षित करने की संजीवनी बताया। महासचिव कुलदीप रैना ने अलिखित संविधान से लिखित संविधान में परिवर्तन के महत्व पर चर्चा की। पनुन कश्मीर के युवा अध्यक्ष नितिन धर ने संविधान को अपनाने को स्मृति और भावी पीढ़ियों के बीच एक सेतु बताया।
अध्यक्ष टीटू गंजू ने कार्यक्रम को संस्थागत संकल्प का संवैधानिक पुनर्जन्म बताया। उन्होंने बताया कि पनुन कश्मीर के संविधान के प्रत्येक अनुच्छेद को अलग-अलग विधानसभा के समक्ष रखा गया। उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से इसे अपनाया। इस दौरान संजय रैना ने संविधान की औपचारिक पूजा की। अंत में विधानसभा के प्रत्येक सदस्य ने संवैधानिक प्रतिज्ञान रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर औपचारिक रूप से संविधान की पुष्टि और उसे अपनाया।
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डॉ. अग्निशेखर संयोजक और टीटू गंजू अध्यक्ष चुने गए
पनुन कश्मीर के अध्यक्ष टीटू गंजू ने संगठनात्मक निकायों को भंग कर दिया। इसके बाद विधानसभा के समक्ष आयोजित चुनाव के जरिये पदाधिकारियों को चुना गया। संयोजक डॉ. अग्निशेखर, अध्यक्ष टीटू गंजू, क्षमा कौल कश्मीरा वाहिनी की अध्यक्ष, संजय रैना, रविंदर गुरतू और कमल हक उपाध्यक्ष चुने गए। कुलदीप रैना महासचिव, बिहारी लाल कौल संगठनात्मक सचिव, प्यारे लाल पंडिता वित्त सचिव, एमके धर प्रचार सचिव और कनवाल पेझिन सांस्कृतिक सचिव चुने गए। इसके अलावा अन्य पदों पर भी पदाधिकारियों को मनोनीत किया गया। सम्मेलन में रमेश हांगलू को रेडियो शारदा से कश्मीरी भाषा और संस्कृति के संरक्षण में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
संयोजक डॉ. अग्निशेखर ने समापन भाषण देते हुए लिखित संविधान को अपनाने को कश्मीरी हिंदुओं की सामूहिक यात्रा में निर्णायक संस्थागत और सभ्यतागत क्षण बताया। कहा कि संवैधानिक अनुशासन का अभाव रखने वाले आंदोलन खंडन और वैचारिक थकावट के शिकार हो जाते हैं। सम्मेलन का समापन चेष्ठा बख्शी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।
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आयोजन सचिव बिहारी लाल कौल ने पनुन कश्मीर को समुदाय के सामने मौजूद संचित ऐतिहासिक, राजनीतिक और अस्तित्व को संरक्षित करने की संजीवनी बताया। महासचिव कुलदीप रैना ने अलिखित संविधान से लिखित संविधान में परिवर्तन के महत्व पर चर्चा की। पनुन कश्मीर के युवा अध्यक्ष नितिन धर ने संविधान को अपनाने को स्मृति और भावी पीढ़ियों के बीच एक सेतु बताया।
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अध्यक्ष टीटू गंजू ने कार्यक्रम को संस्थागत संकल्प का संवैधानिक पुनर्जन्म बताया। उन्होंने बताया कि पनुन कश्मीर के संविधान के प्रत्येक अनुच्छेद को अलग-अलग विधानसभा के समक्ष रखा गया। उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से इसे अपनाया। इस दौरान संजय रैना ने संविधान की औपचारिक पूजा की। अंत में विधानसभा के प्रत्येक सदस्य ने संवैधानिक प्रतिज्ञान रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर औपचारिक रूप से संविधान की पुष्टि और उसे अपनाया।
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डॉ. अग्निशेखर संयोजक और टीटू गंजू अध्यक्ष चुने गए
पनुन कश्मीर के अध्यक्ष टीटू गंजू ने संगठनात्मक निकायों को भंग कर दिया। इसके बाद विधानसभा के समक्ष आयोजित चुनाव के जरिये पदाधिकारियों को चुना गया। संयोजक डॉ. अग्निशेखर, अध्यक्ष टीटू गंजू, क्षमा कौल कश्मीरा वाहिनी की अध्यक्ष, संजय रैना, रविंदर गुरतू और कमल हक उपाध्यक्ष चुने गए। कुलदीप रैना महासचिव, बिहारी लाल कौल संगठनात्मक सचिव, प्यारे लाल पंडिता वित्त सचिव, एमके धर प्रचार सचिव और कनवाल पेझिन सांस्कृतिक सचिव चुने गए। इसके अलावा अन्य पदों पर भी पदाधिकारियों को मनोनीत किया गया। सम्मेलन में रमेश हांगलू को रेडियो शारदा से कश्मीरी भाषा और संस्कृति के संरक्षण में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
संयोजक डॉ. अग्निशेखर ने समापन भाषण देते हुए लिखित संविधान को अपनाने को कश्मीरी हिंदुओं की सामूहिक यात्रा में निर्णायक संस्थागत और सभ्यतागत क्षण बताया। कहा कि संवैधानिक अनुशासन का अभाव रखने वाले आंदोलन खंडन और वैचारिक थकावट के शिकार हो जाते हैं। सम्मेलन का समापन चेष्ठा बख्शी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।