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करोड़ों के नुकसान के बाद अब बर्फ के फाहों पर टिकी जन्नत के पर्यटन की आस

Tue, 29 Nov 2016 03:56 PM IST
ओमपाल संब्याल, अमर उजाला/जम्मू
ओमपाल संब्याल, अमर उजाला/जम्मू Updated Tue, 29 Nov 2016 03:56 PM IST
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kashmir tourism industry in hope of recovery in snowfall sessions
कश्मीर में पर्यटन विस्तार की कवायद - फोटो : File Photo

हिंसा से बेजार हुई जन्नत की आस अब बर्फ के फाहों पर टिक गई है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद भड़की हिंसा से चौपट हुए टूरिस्ट सीजन की भरपाई के लिए सरकार बर्फबारी को पूरी तरह से कैश करने की तैयारी में है। इसके लिए देश भर में सीजन से पहले होने वाली प्रमोशन गतिविधियों को दुगना कर दिया गया है।

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पर्यटन उद्योग से जुड़े सरकारी होटल और रेस्त्राओं सहित अन्य सेवाओं में 50 फीसदी तक छूट देने की योजना है। दिसंबर से मार्च तक के मौसम में न सिर्फ इस साल के नुकसान बल्कि आने वाले दो वर्षों के संभावित असर को भी कम करने के लिए पर्यटन विभाग पूरी ताकत झोंकने जा रहा है।
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पर्यटन विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार पिछले नुकसान की भरपाई सरकार की प्राथमिकता बन गई है। इसके लिए हर मुमकिन कोशिश करने के निर्देश दिए गए हैं। 

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पर्यटन की प्रमोशन गतिविधियों को किया दोगुना

kashmir tourism industry in hope of recovery in snowfall sessions
कश्मीर में पर्यटन विस्तार की कवायद - फोटो : File Photo

जम्मू-कश्मीर टूरिजम डेवलपमेंट कारपोरेशन (जेकेटीडीसी) ने बर्फबारी के सीजन से ऐन पहले देश भर में होने वाली प्रमोशन गतिविधियों को दुगना कर दिया है। अमूमन यह गतिविधियां दिसंबर में जोर पकड़ती थीं लेकिन इस बार नवंबर महीने में ही कानपुर, लखनऊ, गोवा और दिल्ली में आयोजन हो चुके हैं।

15 से 31 दिसंबर तक दिल्ली में कश्मीर फेस्टिवल आयोजित करने की भी तैयारी है। जेकेटीडीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. शाहिद इकबाल के अनुसार गरमियाें का टूरिस्ट सीजन सबसे अहम रहता है। इस बार तनावपूर्ण हालात में पर्यटन उद्योग को 3 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

ऐसे हालात का असर कई सालाें तक रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए बर्फबारी के सीजन में सैलानियों को आकर्षित करने के लिए जेकेटीडीसी 50 फीसदी तक छूट दी जाएगी। देश भर में सैलानियों को आकर्षित करने के लिए आयोजन किए जा रहे हैं। 15 दिसंबर से दिल्ली में प्रस्तावित कश्मीर फेस्टिवल इसी अभियान का हिस्सा होगा।

हिंसा में और बढ़े विदेशी सैलानी

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कश्मीर में पर्यटन विस्तार की कवायद - फोटो : File Photo
हिंसा ने भले ही पूरा सीजन चौपट कर दिया हो लेकिन कश्मीर घाटी की खूबसूरती के मुरीद विदेशी सैलानियों ने ऐसे हालात में भी कश्मीर आना नहीं छोड़ा। सबसे ज्यादा हिंसा वाले जुलाई और अगस्त महीनों में स्वदेशी सैलानियों की संख्या में नब्बे फीसदी तक गिरावट दर्ज हुई, लेकिन, विदेशी सैलानियों का आंकड़ा और भी बढ़ गया।

जुलाई 2015 में कुल 2400 विदेशी सैलानी आए थे जिनकी संख्या इस बार जुलाई महीने में बढ़कर 3600 पहुंच गई। अगस्त 2015 के 2200 की तुलना में हालांकि इस वर्ष संख्या घटकर 1800 रह गई। अगस्त के बाद से आंकड़ों में फिर इजाफा हो रहा है। 
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