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जस्टिस बावा सिंह वालिया ने शपथ
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Thu, 12 Feb 2015 11:36 PM IST
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जस्टिस बावा सिंह वालिया ने वीरवार को जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश की शपथ ली। रियासत के मुख्य न्यायाधीश नारायण नादर पाल वसंथाकुमार की कोर्ट में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में बड़ी संख्या में उच्च पुलिस, प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे। मुख्य न्यायाधीश ने जस्टिस वालिया को पद की शपथ दिलाई।
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हाईकोर्ट की रजिस्ट्रार जनरल कनीज फातिमा ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा जस्टिस वालिया के स्थानांतरण और नियुक्ति का जारी वारंट पढ़कर सुनाया। साथ ही नए जज को शपथ दिलाने के लिए राज्यपाल एनएन वोहरा की ओर से मुख्य न्यायाधीश को भेजे प्राधिकार पत्र को पढ़कर सुनाया। जस्टिस वालिया के शपथ लेने के साथ रियासत के उच्च न्यायालय में जजों की संख्या मुख्य न्यायाधीश सहित दस हो गई। इनमें मुख्य न्यायाधीश सहित आठ स्थायी और दो अतिरिक्त न्यायाधीश हैं। उच्च न्यायालय में 17 न्यायाधीशों के पद हैं। इनमें से सात रिक्त हैं।
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समारोह में जस्टिस मोहम्मद याकूब मीर, जस्टिस हसनैन मसूदी, जस्टिस अली मोहम्मद माग्रे, जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर, जस्टिस ताशी राबस्तन, जस्टिस बंसी लाल भट, जस्टिस जनक राज कोतवाल, डीजीपी के राजेंद्रा कुमार के अलावा कानून, न्याय एवं संसदीय मामलों के सचिव मोहम्मद अशरफ मीर, जम्मू के प्रधान जिला न्यायाधीश आरएस जैन, बार एसोसिएशन (जम्मू) के प्रेसीडेंट और सीनियर एडवोकेट एमके भारद्वाज, सूचना निदेशक, हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी, बार के सदस्य एवं अन्य उपस्थित थे।
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जस्टिस वालिया का संक्षिप्त परिचय
जस्टिस वालिया का जन्म 28 अगस्त, 1961 को जालंधर शहर में हुआ। 1978 में सेंट जोन हाई स्कूल चंडीगढ़ से आईसीएसई करने के बाद उन्होंने 1982 में चंडीगढ़ के डीएवी कालेज से स्नातक की। 1985 में उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी की। 1984 में उन्होंने कानून के स्नातकों में पहला स्थान पाया। उन्हें वाइस चांसलर मेरिट स्कालरशिप के साथ राय बहादुर बद्री दास मेडल प्रदान किया गया।
1990-96 तक पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ डिपार्टमेंट में पार्ट टाइम फैकल्टी के रूप में योगदान किया। 1985 में बार काउंसिल आफ पंजाब एंड हरियाणा के सदस्य बने। वह पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय में भारत सरकार के सीनियर वकीलों के पैनल में भी रहे। इसके अलावा एक नवंबर 2012 से पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय में पंजाब के एडिशनल एडवोकेट जनरल भी रहे। 25 सितंबर, 2014 को वालिया उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और अब उनका तबादला जेएंडके उच्च न्यायालय में हुआ है।
68 नए अधिवक्ताओं ने ली शपथ
प्रदेश न्यायिक अकादमी कांप्लेक्स में वीरवार को आयोजित एक समारोह में 68 नए अधिवक्ताओं ने शपथ ली। मुख्य न्यायाधीश और प्रदेश न्यायिक अकादमी के मुख्य संरक्षक एन पाल वसंथाकुमार, अकादमी के चेयरमैन न्यायाधीश मुजफ्फर हुसैन अत्तर और न्यायाधीश हसनैन मसूदी के निर्देश पर शपथ ग्रहण समारोह हुआ। अकादमी के निदेशक पवन देव कोतवाल ने अधिवक्ताओं को शपथ दिलाई और उन्हें अधिवक्ता लाइसेंस प्रदान किए।
समारोह में ‘अधिवक्ताओं की पेशेवर नैतिकता’ विषय पर व्याख्यान भी हुआ। जस्टिस (रिटायर्ड) ओपी शर्मा ने कुछ महान न्यायविदों को याद किया, जिन्होंने बार की सीमाओं से ऊपर उठकर कानून और न्याय के क्षेत्र में ऊंचे मुकाम को हासिल कर उत्कृष्ट कैरियर की छाप छोड़ी। उन्होंने नए अधिवक्ताओं को एमसी छगला, पालकी वाला, फली नरीमन, सोली सोराबजी, एचआर खन्ना और मार्शल (अमेरिका के चीफ जस्टिस) जैसी शख्सियतों की बायोग्राफी पढ़ने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रणाली को कैरियर के रूप में अपनाने वालों के लिए इन महान हस्तियों की जीवनी मार्गदर्शक का काम करती है। शर्मा ने अदालत के अफसर और बार के सदस्य के रूप में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका भी याद दिलाई। इस मौके पर महमूद अलनासिर, याहया फिरदौस अहंगर, रजनी शर्मा, अकादमी के डिप्टी रजिस्ट्रार पंकज कुमार गुप्ता, जगदीश राज ठाकुर व अन्य स्टाफ उपस्थित थे।