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सनातन परंपरा का केंद्र है जंगमेश्वर महादेव मंदिर
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 10 Feb 2015 08:26 PM IST
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जम्मू का ऐतिहासिक जंगमेश्वर महादेव मंदिर सनातन परंपरा का केंद्र है। मंदिर परिसर में शिव परिवार विराजमान है। शिवलिंग की पूजा आराधना प्रतिदिन सुबह संध्या मुहूर्त के अनुसार की जाती है, जिसमें जंगम बाबा और मंदिर के महंत स्वयं सम्मिलित होते हैं। महाशिवरात्रि की तैयारियां इन दिनों तेज हैं। मंदिर की सजावट और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
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शहर के प्रेमनगर में स्थित जंगमेश्वर महादेव मंदिर जंगम बाबाओं की महंत गद्दी है। सौ के करीब जम्मू में जंगम बाबा निवास करते हैं। मुख्य स्थान प्रेमनगर है, जहां जंगमेश्वर मंदिर के महंत श्रीनिवास जंगम के साथ करीब चालीस जंगम बाबा रहते हैं, जो सनातन परंपरा का प्रचार-प्रसार करने में जुटे हैं। महादेव की पूजा-अर्चना करना और उनका गुणगान करना, भक्तों को शिवप्रेम से अभिभूत करना उनका उद्देश्य है।
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मंदिर में शिवरात्रि की तैयारी में स्थानीय भक्त जुट चुके हैं, वहीं परंपरा के आधार पर रात में विधि-विधान से चार चरणों में भगवान महादेव की पूजा अर्चना होती है। धूमधाम से शिवरात्रि के दिन प्रसाद का वितरण होता है। जंगम आश्रम प्रेम नगर जिसे जंगमेश्वर महादेव मंदिर के रूप में जाना जाता है। यह प्राचीन स्थान है, जबकि 1993 में इस स्थान की पुनर्स्थापना की गई। यहां पर दूर-दूर से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश से जंगम बाबा आते हैं। यहां पर आने वाले हर शिवभक्तों को पूरा विश्वास मिलता है और उनकी हर मनोकामना पूरी होती है। महंत ने बताया कि यहां पर जम्मू कश्मीर में सदा सुख-शांति और आपसी भाईचारा बना रहे, जिसको लेकर जंगम बाबा प्रतिदिन भगवान महादेव से अरदास करते हैं।
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जंगमेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास
जिला उधमपुर के चिनैनी के सुद्धमहादेव में जंगम बाबा प्रकट हुए थे। जंगमेश्वर महादेव मंदिर जम्मू के महंत श्रीनिवास जंगम ने बताया कि भगवान शिव का विवाह सुद्धमहादेव मंदिर (चिनैनी तहसील, जम्मू-कश्मीर) में जब माता पार्वती गिरिजा से हो रहा था तो विवाह के दौरान माता पार्वती और भगवान महादेव दान स्वरूप पंडित आचार्य को कुछ देना चाहते थे।
उस दान को जहां ब्रह्मा ने लेने से इनकार कर दिया, वहीं भगवान विष्णु ने भी दान में कुछ नहीं लिया। तभी वहां पर माता पार्वती और भगवान महादेव द्वारा जंगम बाबा को प्रकट कि या गया और उन्हें दानदिया गया। कहा गया कि आज से आप ही पुरोहित होंगे। मेरे नाम का प्रचार करेंगे और भक्तों की जय-जयकार करेंगे। भिक्षा मांग कर खाना और बुरा बोल कभी नहीं बोलना। मेरे नाम का प्रचार-प्रसार करते रहने का भगवान ने आदेश दिया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
जंगम बाबा की विशेष वेशभूषा पांच देवों ने प्रदान की
जंगम बाबा को विशेष वेशभूषा पांच देवों ने प्रदान की थी जो उनकी खास निशानी हैं। सबसे पहले मुकुट और शेषनाग भगवान शिव द्वारा प्रदान कि ए, जबकि भगवान विष्णु ने मोरपंख, कान में पहनने के लिए फूल माता पार्वती द्वारा प्रदान किए गए थे। ब्रह्मा द्वारा जनेऊ प्रदान किया गया था, जबकि नंदीगण ने घंटी प्रदान की, जिसमें महादेव के गुणगान के बाद दान घंटी में ही ग्रहण करने की परंपरा है।