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Jammu News: मई में पेयजल संकट के लिए रहें तैयार, ट्यूबवेल का गिरता जलस्तर करेगा परेशान
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गर्मी बढ़ते ही रेलवे स्टेशन, त्रिकुटा नगर, शास्त्री नगर, नरवाल इलाकों में आती है दिक्कत
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मई माह में गर्मी बढ़ने के साथ ही पेयजल संकट गहरा सकता है। शहर के ट्यूबवेलों का गिरता जलस्तर इस बार भी समस्या का सबब बन सकता है। इस दौरान 10 से 15 दिनों तक लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ता है। बीते साल ट्यूबवेल में पानी तीन से छह फुट तक नीचे चला गया था। इससे शहर की पांच लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित होती है।
इस कारण रेलवे स्टेशन, त्रिकुटा नगर, शास्त्री नगर, नरवाल, गंग्याल, सैनिक कालोनी, पुराना शहर, मुट्ठी, रूपनगर सहित कई इलाकों में पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी मई और जून माह के बीच आती है। इस दौरान लोगों को निजी टैंकर हायर कर पेयजल आपूर्ति करनी पड़ती है। लोगों को एक हजार से 15 सौ रुपये तक अदा करने पड़ते हैं।
समस्या आने पर नए सिरे से ट्यूबवेल की बोरिंग की जाती है। इस प्रक्रिया में दस से 15 दिन तक लग जाते हैं। ट्यूबवेल सूखने के बाद अन्य कोई भी विकल्प आपूर्ति का नहीं है। विभाग के पास टैंकरों का भी टोटा है। कुल 24 के करीब टैंकर ही है। लोगों को मजबूर निजी टैंकर हायर करने पड़ते हैं।
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कैसे होना है निदान
अमृत दो चरण में शहर में पहले पुरानी पाइपों को बदला जाना है। इसके बाद बड़े साइज की पाइप लाइन बिछाई जानी है। शहर में स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए टैंकों का निर्माण होना है। नए ट्यूबवेल भी लगाए जाने हैं। इससे गर्मी में पेयजल किल्लत से निजात मिलनी है। इस पर अभी तक कोई शुरू होना है।
2024 में इतने फुट गिरा जलस्तर0
2024 में त्रिकुटा नगर में पांच, रेलवे स्टेशन में चार, गंग्याल में चार, गांधी नगर में तीन, शास्त्री नगर में तीन, सैनिक कालोनी में पांच, पुराने शहर में पांच, मुट्ठी में चार और नरवाल में छह फुट पानी का स्तर गिर गया था।
पानी आपूर्ति के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। ट्यूबवेल सूखने पर टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति होगी। इसके अलावा मशीनरी पहले ही मुहैया करवा दी गई है।
- विकास शर्मा, मुख्य अभियंता, जल शक्ति विभाग
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मई माह में गर्मी बढ़ने के साथ ही पेयजल संकट गहरा सकता है। शहर के ट्यूबवेलों का गिरता जलस्तर इस बार भी समस्या का सबब बन सकता है। इस दौरान 10 से 15 दिनों तक लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ता है। बीते साल ट्यूबवेल में पानी तीन से छह फुट तक नीचे चला गया था। इससे शहर की पांच लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित होती है।
इस कारण रेलवे स्टेशन, त्रिकुटा नगर, शास्त्री नगर, नरवाल, गंग्याल, सैनिक कालोनी, पुराना शहर, मुट्ठी, रूपनगर सहित कई इलाकों में पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी मई और जून माह के बीच आती है। इस दौरान लोगों को निजी टैंकर हायर कर पेयजल आपूर्ति करनी पड़ती है। लोगों को एक हजार से 15 सौ रुपये तक अदा करने पड़ते हैं।
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समस्या आने पर नए सिरे से ट्यूबवेल की बोरिंग की जाती है। इस प्रक्रिया में दस से 15 दिन तक लग जाते हैं। ट्यूबवेल सूखने के बाद अन्य कोई भी विकल्प आपूर्ति का नहीं है। विभाग के पास टैंकरों का भी टोटा है। कुल 24 के करीब टैंकर ही है। लोगों को मजबूर निजी टैंकर हायर करने पड़ते हैं।
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कैसे होना है निदान
अमृत दो चरण में शहर में पहले पुरानी पाइपों को बदला जाना है। इसके बाद बड़े साइज की पाइप लाइन बिछाई जानी है। शहर में स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए टैंकों का निर्माण होना है। नए ट्यूबवेल भी लगाए जाने हैं। इससे गर्मी में पेयजल किल्लत से निजात मिलनी है। इस पर अभी तक कोई शुरू होना है।
2024 में इतने फुट गिरा जलस्तर0
2024 में त्रिकुटा नगर में पांच, रेलवे स्टेशन में चार, गंग्याल में चार, गांधी नगर में तीन, शास्त्री नगर में तीन, सैनिक कालोनी में पांच, पुराने शहर में पांच, मुट्ठी में चार और नरवाल में छह फुट पानी का स्तर गिर गया था।
पानी आपूर्ति के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। ट्यूबवेल सूखने पर टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति होगी। इसके अलावा मशीनरी पहले ही मुहैया करवा दी गई है।
- विकास शर्मा, मुख्य अभियंता, जल शक्ति विभाग