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शिक्षक दिवस: छात्रों को संस्कार व संस्कृति से जोड़ने की जरूरत, मूल्य आधारित शिक्षा पाठ्यक्रम का बने हिस्सा
Mon, 05 Sep 2022 03:27 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Mon, 05 Sep 2022 03:27 PM IST
सार
शिक्षक दिवस पर आयोजित अमर उजाला संवाद में जम्मू के अलावा रियासी, उधमपुर व कठुआ से आए शिक्षकों का कहना है कि आज युवा संस्कार व संस्कृति से दूर होता जा रहा है। राष्ट्र प्रथम का भाव जगाने की जरूरत है।
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Jammu
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर के शिक्षकों का मानना है कि स्कूली शिक्षा के साथ ही यह जरूरी है कि विद्यार्थियों को संस्कार व संस्कृति का ज्ञान होना चाहिए। इसके लिए विद्यालयों में मूल्य आधारित शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। शिक्षक दिवस पर आयोजित अमर उजाला संवाद में जम्मू के अलावा रियासी, उधमपुर व कठुआ से आए शिक्षकों का कहना है कि आज युवा संस्कार व संस्कृति से दूर होता जा रहा है। राष्ट्र प्रथम का भाव जगाने की जरूरत है। रोजगार के साथ ही दक्षता विकसित करने की आवश्यकता है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जरूरी है कि शिक्षकों की प्रोन्नति और नियुक्ति परीक्षा के माध्यम से हो। प्राथमिक कक्षाओं में मातृभाषा को शिक्षा की भाषा बनाए जाने की जरूरत है।
मिशन के तौर पर काम करें शिक्षक
बच्चों के उज्जवल भविष्य में एक शिक्षक का बड़ा योगदान होता है। शिक्षक को एक मिशन के तौर पर काम करना चाहिए, जिसका उद्देश्य मूल्यों पर आधारित शिक्षा होनी चाहिए। बच्चों के स्तर व बौद्धिक क्षमता के अनुरूप तैयार करना होगा। वर्तमान में पाठ्यक्रम सहित नैतिक शिक्षा का बड़ा महत्व है। नैतिकता का विकास की जरूरत है। उन्हें तर्क-विर्तक के लिए तैयार करना होगा। - कुलदीप गुप्ता, सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कर विजेता, वरिष्ठ लेक्चरर, जीएचएसएस अरनिया।
बच्चों को जोड़ना होगा स्थानीय भाषा से
शिक्षक का पहला कर्तव्य सभी बच्चों को एक नजर से देखना है। बिना भेदभाव के शिक्षा देना वाला ही सच्चा शिक्षक है। देश में नई शिक्षा नीति लागू हो रही है। इसमें बुनियादी स्तर की शिक्षा स्थानीय भाषा में देने पर जोर है। बच्चों को स्थानीय भाषा से जोड़ना होगा। शिक्षक को हर तरह की चुनौती के लिए खुद को तैयार करना होगा। नई तकनीक से खुद को अपडेट करना होगा। - सचिन गोयल, शिक्षक, जीएचएसएस रिहाड़ी।
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छात्र केंद्रित होनी चाहिए शिक्षा पद्धति
शिक्षा पद्धति छात्र केंद्रित होनी चाहिए। बच्चों को क्षमता के हिसाब से देखना चाहिए। बच्चों को तनाव रहित वातावरण देना होगा। वैचारिक शिक्षा पर भी महत्व देना होगा, ताकि व्यवस्था अंक लेने तक समिति न रहे। नई शिक्षा नीति से तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं का अहम योगदान होगा। इससे शिक्षकों के पास संभावना है कि वह बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकें। - अमोल शर्मा, शिक्षक, गवर्नमेंट मिडिल स्कूल पथवा (कठुआ)।
नई शिक्षा नीति के होंगे कई फायदे
पहले कक्षा एक में दाखिला लेने वाले बच्चे स्कूली पढ़ाई के लिए तैयार नहीं होते थे। इसका कारण आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देना है। लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं से यह समस्या दूर होगी। नई शिक्षा नीति में वोकेशनल शिक्षा पर जोर दिया जाएगा। नैतिक शिक्षा समय की मांग की है। इसके लिए बच्चों को जागरूक करना होगा। - सुनील कुमार, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता, शिक्षक, गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल जाकर टिकरी (उधमपुर)।
शिक्षक हर चुनौतियों को दूर करने में सक्षम
ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में चुनौतियां ज्यादा हैं, लेकिन शिक्षक उन्हें दूर करने में सक्षम है। सरकारी शिक्षक होने के नाते में अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में ही पढ़ा रहा हूं। आज शिक्षक से अन्य काम भी करवाए जा रहे हैं, जिससे वह अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पा रहे हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार से मिले पैसे से प्रोजेक्टर खरीदा ताकि बच्चों को अगल अनुभव मिले। ग्रामीण बच्चे जल्दी सीखते हैं। - संजीव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता, गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल पौनी (रियासी)।
समझना होगा छात्र-शिक्षक संबंध
प्राचीन शिक्षा व्यवस्था को देखने होगा। छात्र-शिक्षक का संबंध को समझना होगा। शिक्षा संस्कार के साथ रोजगारपरक होनी चाहिए। छात्र शिक्षक और समाज से सीखते हैं। नई शिक्षा नीति में सभी चीजों का ध्यान रखा गया है। आज हर स्तर पर चुनौतियां हैं। प्रदेश में शिक्षण संस्थानों के बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की कमी है। शिक्षक को पढ़ाने के साथ विभिन्न कार्यों में जोड़ा जा रहा है। - डॉ. परमेंद्र सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, स्कॉस्ट जम्मू।
नई शिक्षा नीति से कई समस्याएं होंगी दूर
सरकार स्कूली में पढ़ाई के साथ अब शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। नई शिक्षा नीति में ये गतिविधियां अब पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गई हैं। नई शिक्षा नीति लागू होने से काफी समस्याओं का अंत हो जाएगा। शारीरिक रूप से बच्चों को स्वस्थ्य रखना वर्तमान समय की मांग है। कोविड के बाद बच्चों में आ रही समस्या का समाधन शारीरिक और खेल गतिविधियों में है। - गोविंद शर्मा, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कर विजेता, नोडल अधिकारी, स्कूल शिक्षा निदेशालय, जम्मू।
बदलनी होगी बच्चों-अभिभावकों की सोच
सरकारी स्कूलों के प्रति बच्चों और अभिभावकों की सोच बदलनी होगी। शिक्षकों को पद्दोन्नति परीक्षा से मिलनी चाहिए, ताकि युवा और योग्य लोग आगे आएं। शिक्षक समाज के निर्माण में योगदान देता है। इस पेशे में लोगों को लाने के लिए एक नीति की जरूरत है। स्कूली परीक्षा व्यवस्था सिर्फ परीक्षा देने तक समिति न हो। इसमें बच्चों के कौशल व मनोवज्ञानिक विकास का भी आकलन हो। - डॉ. रमेश कुमार, लेक्चरर, इंचार्ज काउंसलिंग सेल, स्कूल शिक्षा निदेशालय जम्मू।
बच्चों में गणित के भय को दूर करने की जरूरत
लगाव के कारण इस पेशे को अपनाया है। बच्चों में गणित के भय को दूर करने की जरूरत है। शिक्षकों की पद्दोन्नति परीक्षा के आधार पर हो। शिक्षों के प्रशिक्षण में भी सुधार करना होगा। बच्चों में नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसमें शिक्षक के साथ समाज और अभिभावकों का बड़ा योगदान होना चाहिए। शिक्षक को इमानदारी से काम काम करना होगा। - राकेश कुमार चौबर, सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार विजेता, अकादमिक अधिकारी, एससीईआरटी जम्मू।
बच्चों को एक कलाकार की तरह पढ़ाना चाहिए
मैं कलाकार था और कभी शिक्षक नहीं बनना चाहता था। लेकिन हालात ऐसे बने की इस पेशे से लगाव हो गया। बच्चों को एक कलाकार की तरह पढ़ाना चाहिए। बच्चों को रोजगार से जोड़ने की जरूरत है। अच्छा शिक्षक वह है जो बच्चों में कुछ करने की भावना जगाए। नई शिक्षा नीति बच्चों को स्थानीय भाषा में पढ़ाने को मत्हव देती है जो एक अच्छी पहल है। - चंद्र शेखर, शिक्षक बीएसएफ स्कूल, जम्मू।
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मिशन के तौर पर काम करें शिक्षक
बच्चों के उज्जवल भविष्य में एक शिक्षक का बड़ा योगदान होता है। शिक्षक को एक मिशन के तौर पर काम करना चाहिए, जिसका उद्देश्य मूल्यों पर आधारित शिक्षा होनी चाहिए। बच्चों के स्तर व बौद्धिक क्षमता के अनुरूप तैयार करना होगा। वर्तमान में पाठ्यक्रम सहित नैतिक शिक्षा का बड़ा महत्व है। नैतिकता का विकास की जरूरत है। उन्हें तर्क-विर्तक के लिए तैयार करना होगा। - कुलदीप गुप्ता, सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कर विजेता, वरिष्ठ लेक्चरर, जीएचएसएस अरनिया।
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बच्चों को जोड़ना होगा स्थानीय भाषा से
शिक्षक का पहला कर्तव्य सभी बच्चों को एक नजर से देखना है। बिना भेदभाव के शिक्षा देना वाला ही सच्चा शिक्षक है। देश में नई शिक्षा नीति लागू हो रही है। इसमें बुनियादी स्तर की शिक्षा स्थानीय भाषा में देने पर जोर है। बच्चों को स्थानीय भाषा से जोड़ना होगा। शिक्षक को हर तरह की चुनौती के लिए खुद को तैयार करना होगा। नई तकनीक से खुद को अपडेट करना होगा। - सचिन गोयल, शिक्षक, जीएचएसएस रिहाड़ी।
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छात्र केंद्रित होनी चाहिए शिक्षा पद्धति
शिक्षा पद्धति छात्र केंद्रित होनी चाहिए। बच्चों को क्षमता के हिसाब से देखना चाहिए। बच्चों को तनाव रहित वातावरण देना होगा। वैचारिक शिक्षा पर भी महत्व देना होगा, ताकि व्यवस्था अंक लेने तक समिति न रहे। नई शिक्षा नीति से तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं का अहम योगदान होगा। इससे शिक्षकों के पास संभावना है कि वह बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकें। - अमोल शर्मा, शिक्षक, गवर्नमेंट मिडिल स्कूल पथवा (कठुआ)।
नई शिक्षा नीति के होंगे कई फायदे
पहले कक्षा एक में दाखिला लेने वाले बच्चे स्कूली पढ़ाई के लिए तैयार नहीं होते थे। इसका कारण आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देना है। लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं से यह समस्या दूर होगी। नई शिक्षा नीति में वोकेशनल शिक्षा पर जोर दिया जाएगा। नैतिक शिक्षा समय की मांग की है। इसके लिए बच्चों को जागरूक करना होगा। - सुनील कुमार, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता, शिक्षक, गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल जाकर टिकरी (उधमपुर)।
शिक्षक हर चुनौतियों को दूर करने में सक्षम
ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में चुनौतियां ज्यादा हैं, लेकिन शिक्षक उन्हें दूर करने में सक्षम है। सरकारी शिक्षक होने के नाते में अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में ही पढ़ा रहा हूं। आज शिक्षक से अन्य काम भी करवाए जा रहे हैं, जिससे वह अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पा रहे हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार से मिले पैसे से प्रोजेक्टर खरीदा ताकि बच्चों को अगल अनुभव मिले। ग्रामीण बच्चे जल्दी सीखते हैं। - संजीव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता, गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल पौनी (रियासी)।
समझना होगा छात्र-शिक्षक संबंध
प्राचीन शिक्षा व्यवस्था को देखने होगा। छात्र-शिक्षक का संबंध को समझना होगा। शिक्षा संस्कार के साथ रोजगारपरक होनी चाहिए। छात्र शिक्षक और समाज से सीखते हैं। नई शिक्षा नीति में सभी चीजों का ध्यान रखा गया है। आज हर स्तर पर चुनौतियां हैं। प्रदेश में शिक्षण संस्थानों के बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की कमी है। शिक्षक को पढ़ाने के साथ विभिन्न कार्यों में जोड़ा जा रहा है। - डॉ. परमेंद्र सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, स्कॉस्ट जम्मू।
नई शिक्षा नीति से कई समस्याएं होंगी दूर
सरकार स्कूली में पढ़ाई के साथ अब शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। नई शिक्षा नीति में ये गतिविधियां अब पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गई हैं। नई शिक्षा नीति लागू होने से काफी समस्याओं का अंत हो जाएगा। शारीरिक रूप से बच्चों को स्वस्थ्य रखना वर्तमान समय की मांग है। कोविड के बाद बच्चों में आ रही समस्या का समाधन शारीरिक और खेल गतिविधियों में है। - गोविंद शर्मा, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कर विजेता, नोडल अधिकारी, स्कूल शिक्षा निदेशालय, जम्मू।
बदलनी होगी बच्चों-अभिभावकों की सोच
सरकारी स्कूलों के प्रति बच्चों और अभिभावकों की सोच बदलनी होगी। शिक्षकों को पद्दोन्नति परीक्षा से मिलनी चाहिए, ताकि युवा और योग्य लोग आगे आएं। शिक्षक समाज के निर्माण में योगदान देता है। इस पेशे में लोगों को लाने के लिए एक नीति की जरूरत है। स्कूली परीक्षा व्यवस्था सिर्फ परीक्षा देने तक समिति न हो। इसमें बच्चों के कौशल व मनोवज्ञानिक विकास का भी आकलन हो। - डॉ. रमेश कुमार, लेक्चरर, इंचार्ज काउंसलिंग सेल, स्कूल शिक्षा निदेशालय जम्मू।
बच्चों में गणित के भय को दूर करने की जरूरत
लगाव के कारण इस पेशे को अपनाया है। बच्चों में गणित के भय को दूर करने की जरूरत है। शिक्षकों की पद्दोन्नति परीक्षा के आधार पर हो। शिक्षों के प्रशिक्षण में भी सुधार करना होगा। बच्चों में नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसमें शिक्षक के साथ समाज और अभिभावकों का बड़ा योगदान होना चाहिए। शिक्षक को इमानदारी से काम काम करना होगा। - राकेश कुमार चौबर, सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार विजेता, अकादमिक अधिकारी, एससीईआरटी जम्मू।
बच्चों को एक कलाकार की तरह पढ़ाना चाहिए
मैं कलाकार था और कभी शिक्षक नहीं बनना चाहता था। लेकिन हालात ऐसे बने की इस पेशे से लगाव हो गया। बच्चों को एक कलाकार की तरह पढ़ाना चाहिए। बच्चों को रोजगार से जोड़ने की जरूरत है। अच्छा शिक्षक वह है जो बच्चों में कुछ करने की भावना जगाए। नई शिक्षा नीति बच्चों को स्थानीय भाषा में पढ़ाने को मत्हव देती है जो एक अच्छी पहल है। - चंद्र शेखर, शिक्षक बीएसएफ स्कूल, जम्मू।