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जम्मू सुंजवां हमलाः धरती से लेकर आसमान तक थी आतंकियों के खात्मे की तैयारी
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय,अमर उजाला,जम्मू
Updated Mon, 12 Feb 2018 12:44 AM IST
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JAMMU ATTACK
- फोटो : Amar ujala
सुंजवां आतंकी हमले में सेना ने आतंकियों के खात्मे के लिए धरती से लेकर आसमान तक उन्हें मार गिराने की तैयारी पूरी कर ली थी। आतंकियों के कैंप के भीतर दाखिल होते ही सेना के तीन हेलीकाप्टर लगातार कैंप के ऊपर मंडरा रहे थे। आतंकियों की निगरानी के लिए सेना ने ड्रोन का भी इस्तेमाल किया था।
सेना ने अपने स्पेशल पैरा कमांडों को मोर्चा संभालने के लिए कैंप के भीतर तैनात कर दिया था। बताया जा रहा है पैरा कमांडों ने इस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई और तीन फिदायीन हमलावरों को मार गिराया। कैंप के भीतर आतंकी जिस क्वार्टरों में मौजूद थे सेना ने उसके बाहर तीन टैंकों की तैनाती कर दी थी।
सूत्रों के मुताबिक सेना ने पहले रणनीति बनाई थी कि कैंप में फंसे जवानों के परिजनों को बचा कर निस्तनाबूत कर दिया जाए। लेकिन जब ये रणनीति सफल न हो पाई तो सेना ने झट से प्लान में बदलाव कर स्नाइपर से लैस जवानों को आतंकियों को मौत के घाट उतारने के लिए तैनात कर दिए। इस ऑपरेशन में वायुसेना के घातक कमांडो गरूड़ की भी मदद ली गई।
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30 घंटे तक उड़ता रहा हेलीकाप्टर
कैंप की निगरानी में भारतीय सेना के तीन हेलीकाप्टर लगातार मंडरा रहे थे। इसके अलावा सेना का एक हेलीकाप्टर पूरे शहर का लगभग 30 घंटे तक चक्कर लगाता रहा। इस दौरान हर संदिग्ध हरकत पर नजर रखी जा रही थी। पूरी रात ड्रोन की मदद से भी शहर में होने वाली हरकतों पर नजर जमाई गई थी।
देर रात हुआ तेज धमाका
कैंप के भीतर रात के करीब 9 बजे तेज आवाज के साथ धमाका हुआ। धमाका इतना जोरदार था कि आस-पास का पूरा इलाका थर्रा गया। माना जा रहा है कि सुरक्षाबलों टैंक की मदद से आतंकियों के छिपे होने जगह की पूरे क्वार्टरों को उड़ा दिया है।
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सेना ने अपने स्पेशल पैरा कमांडों को मोर्चा संभालने के लिए कैंप के भीतर तैनात कर दिया था। बताया जा रहा है पैरा कमांडों ने इस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई और तीन फिदायीन हमलावरों को मार गिराया। कैंप के भीतर आतंकी जिस क्वार्टरों में मौजूद थे सेना ने उसके बाहर तीन टैंकों की तैनाती कर दी थी।
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सूत्रों के मुताबिक सेना ने पहले रणनीति बनाई थी कि कैंप में फंसे जवानों के परिजनों को बचा कर निस्तनाबूत कर दिया जाए। लेकिन जब ये रणनीति सफल न हो पाई तो सेना ने झट से प्लान में बदलाव कर स्नाइपर से लैस जवानों को आतंकियों को मौत के घाट उतारने के लिए तैनात कर दिए। इस ऑपरेशन में वायुसेना के घातक कमांडो गरूड़ की भी मदद ली गई।
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30 घंटे तक उड़ता रहा हेलीकाप्टर
कैंप की निगरानी में भारतीय सेना के तीन हेलीकाप्टर लगातार मंडरा रहे थे। इसके अलावा सेना का एक हेलीकाप्टर पूरे शहर का लगभग 30 घंटे तक चक्कर लगाता रहा। इस दौरान हर संदिग्ध हरकत पर नजर रखी जा रही थी। पूरी रात ड्रोन की मदद से भी शहर में होने वाली हरकतों पर नजर जमाई गई थी।
देर रात हुआ तेज धमाका
कैंप के भीतर रात के करीब 9 बजे तेज आवाज के साथ धमाका हुआ। धमाका इतना जोरदार था कि आस-पास का पूरा इलाका थर्रा गया। माना जा रहा है कि सुरक्षाबलों टैंक की मदद से आतंकियों के छिपे होने जगह की पूरे क्वार्टरों को उड़ा दिया है।