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पुंछ में बनेगा गोजरी और पहाड़ी केंद्र : सचिव
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दो दिवसीय पहाड़ी साहित्य एवं सांस्कृतिक सम्मेलन के दौरान प्रस्तुतियां देते कलाकार फोटो अकादमी
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दो दिवसीय पहाड़ी साहित्य एवं सांस्कृतिक सम्मेलन के समापन अवसर पर की घोषणा
कहा, दोनों भाषाओं के संरक्षण पर होगा काम
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण को लेकर सरकार ने बड़ी पहल की है। पुंछ जिले में गोजरी और पहाड़ी केंद्र की स्थापना करेगी। इस केंद्र में इन दोनों भाषाओं के प्रचार-प्रसार और संरक्षण पर काम किया जाएगा। यह घोषणा जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी की सचिव हरविंद्र कौर ने दो दिवसीय पहाड़ी साहित्य एवं सांस्कृतिक सम्मेलन के समापन के दौरान की।
सम्मेलन में पहाड़ी भाषा के लोकाचार को ऑडियो-वीडियो और पुस्तक प्रारूपों में दस्तावेजीकरण, आने वाले पीढ़ियों के लिए इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए काम करने का संकल्प लिया गया। सम्मेलन के समापन पर थन्नामंडी राजोरी से विधायक मुजफ्फर अली खान मुख्य अतिथि थे।
उन्होंने जम्मू क्षेत्र में पहाड़ी भाषा खासकर पुंछ और राजोरी जिलों में बोली जाती है। इन जिलों के प्रत्येक क्षेत्र में सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करने की बात कही। सम्मेलन में गजनफर खोखर, सरदार रतन सिंह कंवल, इकबाल शॉल और शेख आजाद अहमद ने लघु कथाएं प्रस्तुत कीं। एडवोकेट अल्ताफ हुसैन जंजुआ, सलीम अली बुखारी और जावेद हक्कानी ने शोध पत्र पढ़ा।
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संगीत कार्यक्रम में मास्टर करतार चंद, मुजम्मिल शाह, परवेज मलिक व अन्य प्रसिद्ध कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। अध्यक्ष मंडल में एसएसपी रशीद भट, पहाड़ी बोर्ड के पूर्व सचिव शौकत काज़मी, पहाड़ी लेखक जमात अली शाहीन व अन्य लोग शामिल थे। दो दिवसीय सम्मेलन पहाड़ी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
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कहा, दोनों भाषाओं के संरक्षण पर होगा काम
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण को लेकर सरकार ने बड़ी पहल की है। पुंछ जिले में गोजरी और पहाड़ी केंद्र की स्थापना करेगी। इस केंद्र में इन दोनों भाषाओं के प्रचार-प्रसार और संरक्षण पर काम किया जाएगा। यह घोषणा जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी की सचिव हरविंद्र कौर ने दो दिवसीय पहाड़ी साहित्य एवं सांस्कृतिक सम्मेलन के समापन के दौरान की।
सम्मेलन में पहाड़ी भाषा के लोकाचार को ऑडियो-वीडियो और पुस्तक प्रारूपों में दस्तावेजीकरण, आने वाले पीढ़ियों के लिए इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए काम करने का संकल्प लिया गया। सम्मेलन के समापन पर थन्नामंडी राजोरी से विधायक मुजफ्फर अली खान मुख्य अतिथि थे।
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उन्होंने जम्मू क्षेत्र में पहाड़ी भाषा खासकर पुंछ और राजोरी जिलों में बोली जाती है। इन जिलों के प्रत्येक क्षेत्र में सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करने की बात कही। सम्मेलन में गजनफर खोखर, सरदार रतन सिंह कंवल, इकबाल शॉल और शेख आजाद अहमद ने लघु कथाएं प्रस्तुत कीं। एडवोकेट अल्ताफ हुसैन जंजुआ, सलीम अली बुखारी और जावेद हक्कानी ने शोध पत्र पढ़ा।
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संगीत कार्यक्रम में मास्टर करतार चंद, मुजम्मिल शाह, परवेज मलिक व अन्य प्रसिद्ध कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। अध्यक्ष मंडल में एसएसपी रशीद भट, पहाड़ी बोर्ड के पूर्व सचिव शौकत काज़मी, पहाड़ी लेखक जमात अली शाहीन व अन्य लोग शामिल थे। दो दिवसीय सम्मेलन पहाड़ी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।