फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   jammu, sahitya akadamy

Jammu News: सामाजिक ताना-बाना, प्रकृति से संवाद के अनछुए शृंगार में पगी है इक होर अश्वत्थामा

विज्ञापन
jammu, sahitya akadamy
- डोगरी भाषा के प्रसिद्ध कथाकार दिवंगत चमन अरोड़ा की रचनाधर्मिता को लेकर निर्णायक मंडल ने कही ये बातें
विज्ञापन

- डाॅ. सुषमा रानी, डाॅ. वीणा गुप्ता व जीतेंद्र उधमपुरी ने कहानियों के संग्रह को अनूठा बताया
ज्ञानेंद्र कुमार शुक्ल
जम्मू। साहित्य अकादमी की ओर से इस बार डोगरी भाषा के प्रसिद्ध कथाकार दिवंगत चमन अरोड़ा को दिए जाने की घोषणा हो गई है। उनकी पुस्तक इक होर अश्वत्थामा के लिए यह सम्मान दिया जाएगा। निर्णायक मंडल में शामिल तीन सदस्यों डाॅ. सुषमा रानी, डाॅ. वीणा गुप्ता व जितेंद्र उधमपुरी ने किताब के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
जम्मू निवासी साहित्यकार, ज्यूरी सदस्य और जम्मू विश्वविद्यालय में डोगरी भाषा विभाग की अध्यक्ष डॉ. वीणा गुप्ता ने बताया कि इस किताब में कुल 15 कहानियां हैं, जो सामाजिक ताने-बाने को आसानी से डोगरी भाषा में व्यक्त करती हैं। प्रथम पृष्ठ से जैसे ही पाठक पढ़ना शुरू करेगा, अंत तक पढ़ता जाएगा।
विज्ञापन

इसमें एक लड़की, जो परिवार में अकेली कमाने वाली है, परिवार के अन्य सदस्य जिसमें बुजुर्ग पिता, एक भाई के साथ रहती है। सामाजिक तानों को सहन करते हुए आगे बढ़ती है। यह निश्चित तौर पर सामाजिक रूढि़वादिता की प्रभावी अभिव्यक्ति है।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक और अश्वत्थामा किताब का शीर्षक है, जिसका अर्थ यह है कि एक आदमी, जिसके परिवार में पत्नी, बेटी व बेटा उसकी कमाई से ऐश कर रहे हैं। वह अनमना होकर देख रहा है और कुछ कर नहीं पा रहा। जीवन के हर स्तर पर पश्चाताप के आंसू हैं।


अद्भुत है कहानी कहने का तरीका और भाषा पर मजबूत पकड़
वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री डाॅ. जितेंद्र उधमपुरी ने दिवंगत चमन अरोड़ा की किताब इक होर अश्वत्थामा को लेकर कहा कि कहानी कहने का तरीका अद्भुत है। भाषा पर मजबूत पकड़ा उनकी कहानियों में दिखाई देती है। यह सीधे पाठकों को जोड़ती है, उनके बीच की कहानी लगती है। उनकी पुस्तक को इस सम्मान के लिए चुनने की प्रमुख वजह यही है कि वह आमजन के कहानीकार नजर आ रहे हैं। सभी 15 कहानियों में भाषाई तारतम्य शुरुआत से ही है। प्रकृति का सौंदर्य विमर्श भी है।

प्राकृति से जुड़ाव के साथ सहज अभिव्यक्ति भी

डोगरी की सशक्त हस्ताक्षर डाॅ. सुषमा रानी कहती हैं कि उनकी रचना प्रकृति के सौंदर्य का प्रतीक है। एक कहानी में दो सेबों के बीच बातचीत को उन्होंने डोगरी के आसान शब्दों, भाषा की उच्चता में पिरोया है। वह प्रशंसनीय है। आसान बोलचाल में कहानियों की प्रस्तुति बेमिसाल है। पढ़ने के बाद ऐसा लग रहा है कि जैसे हर कहानी अपने घर की कहानी है। किताब के शीर्षक को लेकर उनका कहना था कि उनकी कहानी में एक पात्र मनमोहन है, जो दिन रात काम करता है और पूरे जीवन परिवार की जरूरतों को पूरा करने में लगा रहता है। वह मशीन सा बन जाता है। वह चाहता है कि इसी तरह काम करता रहे और उम्र भर अश्वत्थामा जैसे ही कभी नहीं मरेगा। इसी से प्रेरित होकर किताब का नाम इक होर अश्वत्थामा रखा गया है।



परिवार में बचपन से रहा डोगरी साहित्य का माहौल
दिवंगत चमन अरोड़ा के पुत्र गौतम अरोड़ा ने बताया कि बचपन से ही सैनिक काॅलोनी के अपने घर में डोगरी साहित्य का माहौल मिला। दो भाईयों व एक बहन के छोटे से परिवार में साहित्य से जुड़े लोगों का आना जाना लगा रहता था। बड़े होने पर हम भाई व बहन ने भी डोगरी को पढ़ा, समझा। पिता हमारे लिए एक धरोहर व प्रेरणास्त्रोत से कम नहीं हैं। पिता 28 अगस्त 2024 को इस दुनिया से गए। मां वर्ष 2016 में इस संसार से चली गई थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed