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Jammu: भाजपा में विपक्ष के नेता को लेकर लामबंदी, दौड़ में कई नेता, केंद्रीय पर्यवेक्षक लगाएंगे नाम पर मुहर
Sun, 13 Oct 2024 02:46 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 13 Oct 2024 02:46 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर में भाजपा में विपक्ष के नेता को लेकर लामबंदी शुरू हो गई है। कई नेता दौड़ में शामिल हैं। विधानसभा में राष्ट्रवाद, जम्मू-कश्मीर के हितों की रक्षा और जन मुद्दे उजागर करना भाजपा का एजेंडा रहेगा।
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विस्तार
अब्दुल्ला सरकार बनने की प्रक्रिया के साथ भाजपा में विपक्ष के नेता को लेकर लामबंदी शुरू हो गई है। भाजपा के चार नेता इस दौड़ में हैं। इनमें एक मंत्री, एक प्रदेश महासचिव, एक पीओके विस्थापित चेहरा, एक नेकां से आए नेता और उधमपुर से भाजपा सांसद डॉ. जितेंद्र सिंह के भाई हैं। हालांकि भाजपा इनसे हटकर नाम देकर भी चौंका सकती है।
कई नेताओं ने विपक्ष के नेता के पद को लेकर दिल्ली तक दौड़ लगानी शुरू कर दी है। सभी अपने-अपने आकाओं से इस पद को पाने के लिए जुगत भिड़ा रहे हैं। भाजपा विपक्ष के नेता के रूप में ऐसा चेहरा चाहती है जो विधानसभा में सरकार को मुद्दों पर मजबूती से घेर सके।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा विधानसभा में राष्ट्रवाद, जनता के मुद्दों को उजागर करने, जम्मू के साथ कश्मीर के उन मतदाताओं के हितों की रक्षा के लिए उतरेगी, जिन्होंने चुनाव में सत्तापक्ष को नकारा है। भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के मूड़ में है।
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शपथ ग्रहण और विधानसभा का गठन होने के बाद विपक्ष का नेता चुना जाना है। विधानसभा सेशन के दौरान विपक्ष का नेता ही पूरे विपक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की 42 सीटों के बाद भाजपा के पास सबसे ज्यादा 29 सीटें हैं।
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कई नेताओं ने विपक्ष के नेता के पद को लेकर दिल्ली तक दौड़ लगानी शुरू कर दी है। सभी अपने-अपने आकाओं से इस पद को पाने के लिए जुगत भिड़ा रहे हैं। भाजपा विपक्ष के नेता के रूप में ऐसा चेहरा चाहती है जो विधानसभा में सरकार को मुद्दों पर मजबूती से घेर सके।
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पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा विधानसभा में राष्ट्रवाद, जनता के मुद्दों को उजागर करने, जम्मू के साथ कश्मीर के उन मतदाताओं के हितों की रक्षा के लिए उतरेगी, जिन्होंने चुनाव में सत्तापक्ष को नकारा है। भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के मूड़ में है।
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शपथ ग्रहण और विधानसभा का गठन होने के बाद विपक्ष का नेता चुना जाना है। विधानसभा सेशन के दौरान विपक्ष का नेता ही पूरे विपक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की 42 सीटों के बाद भाजपा के पास सबसे ज्यादा 29 सीटें हैं।
सबसे वरिष्ठ सदस्य दिलाता है शपथ
विधानसभा में प्रावधान होता है कि सबसे वरिष्ठ सदस्य अन्य सदस्यों को शपथ दिलाए। इसमें देखा जाए तो नेकां से सात बार के विधायक रह चुके अब्दुल रहमान राथर, अली मोहम्मद सागर जैसे वरिष्ठ सदस्य मौजूद हैं। सांविधानिक प्रक्रिया में स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का चुनाव किया जाता है।
विधानसभा में प्रावधान होता है कि सबसे वरिष्ठ सदस्य अन्य सदस्यों को शपथ दिलाए। इसमें देखा जाए तो नेकां से सात बार के विधायक रह चुके अब्दुल रहमान राथर, अली मोहम्मद सागर जैसे वरिष्ठ सदस्य मौजूद हैं। सांविधानिक प्रक्रिया में स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का चुनाव किया जाता है।
भाजपा उपसभापति का दावा करेगी
भाजपा की ओर से विधानसभा में उपसभापति के पद का दावा किया जाएगा। पिछली गठबंधन सरकार में भी यह प्रावधान किया गया था, जिसमें पीडीपी-भाजपा की सरकार में नेकां से नजीर अहमद खान को उपसभापति बनाया गया था। वह तीन बार के विधायक थे। इसका उद्देश्य विधानसभा में सत्तापक्ष से स्पीकर और विपक्ष से डिप्टी स्पीकर को नियुक्त करके संतुलन बनाना रहता है। हालांकि यह सत्तापक्ष पर निर्भर करेगा कि विधानसभा में इसको लेकर कैसी परिस्थितियां रहेंगी।
भाजपा की ओर से विधानसभा में उपसभापति के पद का दावा किया जाएगा। पिछली गठबंधन सरकार में भी यह प्रावधान किया गया था, जिसमें पीडीपी-भाजपा की सरकार में नेकां से नजीर अहमद खान को उपसभापति बनाया गया था। वह तीन बार के विधायक थे। इसका उद्देश्य विधानसभा में सत्तापक्ष से स्पीकर और विपक्ष से डिप्टी स्पीकर को नियुक्त करके संतुलन बनाना रहता है। हालांकि यह सत्तापक्ष पर निर्भर करेगा कि विधानसभा में इसको लेकर कैसी परिस्थितियां रहेंगी।
डिप्टी स्पीकर हमारा सांविधानिक अधिकार
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र रैना का कहना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। ऐसे में विधानसभा में हमारा डिप्टी स्पीकर होना सांविधानिक अधिकार है। हम उम्मीद करते हैं कि सत्तापक्ष इस सांविधानिक प्रक्रिया की मर्यादा का पालन करेगी और विधानसभा में संतुलन बनाएगी।
पिछली सरकारों में भी यह व्यवस्था लागू रही है। पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक जल्द जम्मू पहुंचकर विधायक दल के साथ बैठक करके विपक्ष के नेता के नाम पर चर्चा करेंगे।
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र रैना का कहना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। ऐसे में विधानसभा में हमारा डिप्टी स्पीकर होना सांविधानिक अधिकार है। हम उम्मीद करते हैं कि सत्तापक्ष इस सांविधानिक प्रक्रिया की मर्यादा का पालन करेगी और विधानसभा में संतुलन बनाएगी।
पिछली सरकारों में भी यह व्यवस्था लागू रही है। पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक जल्द जम्मू पहुंचकर विधायक दल के साथ बैठक करके विपक्ष के नेता के नाम पर चर्चा करेंगे।
विपक्ष के नेता की दौड़ में कई नाम, चौंका सकती है भाजपा
विपक्ष के नेता की दौड़ में एक नाम पाडर नागसेनी से जीते प्रदेश महासचिव सुनील कुमार शर्मा का शामिल है। वह लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं। पिछली सरकार में वह किश्तवाड़ सीट से विजयी रहकर मंत्री भी रहे हैं। ये भाजपा के साथ लंबे समय से जुड़े हुए हैं।
विपक्ष के नेता की दौड़ में एक नाम पाडर नागसेनी से जीते प्रदेश महासचिव सुनील कुमार शर्मा का शामिल है। वह लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं। पिछली सरकार में वह किश्तवाड़ सीट से विजयी रहकर मंत्री भी रहे हैं। ये भाजपा के साथ लंबे समय से जुड़े हुए हैं।
रामगढ़ (एससी) सीट से जीते डॉ. देवेंद्र कुमार मनियाल के नाम पर भी विपक्ष के नेता के लिए चर्चा चल रही है। 2014 के विधानसभा चुनाव में वह सांवा (एससी) से जीते थे और स्वास्थ्य मंत्री रहे। डॉ. मनियाल मौजूदा समय में पार्टी में प्रदेश महासचिव पद पर हैं।
नरेंद्र सिंह पीओके विस्थापित का चेहरा, राष्ट्रीय राजनीति का भी अनुभव
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रहे नरेंद्र सिंह का नाम भी विपक्ष के नेता के तौर पर राजनीतिक हलकों में लिया जा रहा है। वह पहली बार 2024 में आरएस पुरा-जम्मू दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक बने हैं। वह पीओके विस्थापितों का भी चेहरा हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें राजनीतिक का अनुभव है।
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रहे नरेंद्र सिंह का नाम भी विपक्ष के नेता के तौर पर राजनीतिक हलकों में लिया जा रहा है। वह पहली बार 2024 में आरएस पुरा-जम्मू दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक बने हैं। वह पीओके विस्थापितों का भी चेहरा हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें राजनीतिक का अनुभव है।
राणा को भी खड़ा किया जा सकता है उमर के सामने
विपक्ष के नेता के तौर पर एक और नाम देवेंद्र सिंह राणा का भी चर्चा में है। राणा दूसरी बार नगरोटा से विधायक बने हैं। । ये केंद्रीय मंत्री और उधमपुर से सांसद डॉ. जितेंद्र सिंह के भाई हैं। भाजपा-पीडीपी की 2014 की सरकार में नेशनल कॉन्फ्रेंस से विपक्ष के नेता की भूमिका निभा चुके हैं। मुख्यमंत्री बनने जा रहे उमर अब्दुल्ला के करीबी और राजनीतिक सलाहकार भी रहे हैं। ऐसे में विधानसभा में उमर के सामने इन्हें भी विपक्ष के नेता के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उमर का राजनीतिक सलाहकार होना उनके लिए निगेटिव प्वाइंट के रूप में भी देखा जा रहा है।
विपक्ष के नेता के तौर पर एक और नाम देवेंद्र सिंह राणा का भी चर्चा में है। राणा दूसरी बार नगरोटा से विधायक बने हैं। । ये केंद्रीय मंत्री और उधमपुर से सांसद डॉ. जितेंद्र सिंह के भाई हैं। भाजपा-पीडीपी की 2014 की सरकार में नेशनल कॉन्फ्रेंस से विपक्ष के नेता की भूमिका निभा चुके हैं। मुख्यमंत्री बनने जा रहे उमर अब्दुल्ला के करीबी और राजनीतिक सलाहकार भी रहे हैं। ऐसे में विधानसभा में उमर के सामने इन्हें भी विपक्ष के नेता के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उमर का राजनीतिक सलाहकार होना उनके लिए निगेटिव प्वाइंट के रूप में भी देखा जा रहा है।
विपक्ष के नेता के साथ उप नेता, चीफ व्हीप का भी प्रावधान
विधानसभा में विपक्ष के नेता के साथ उप नेता और चीफ व्हीप के पद का भी प्रावधान है। इसके अलावा विभिन्न समितियों का गठन किया जाना है, जिसमें विधायक दल के सदस्यों को जिम्मेदारियां दी जाती हैं। शपथ ग्रहण के बाद यह सब प्रक्रियाएं संपन्न होंगी।
विधानसभा में विपक्ष के नेता के साथ उप नेता और चीफ व्हीप के पद का भी प्रावधान है। इसके अलावा विभिन्न समितियों का गठन किया जाना है, जिसमें विधायक दल के सदस्यों को जिम्मेदारियां दी जाती हैं। शपथ ग्रहण के बाद यह सब प्रक्रियाएं संपन्न होंगी।