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Jammu News: दो साल में नाबालिगों के वाहन चलाने पर काटे गए 1,36,100 के चालान
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- पूरे देश में बिहार के बाद दूसरे नंबर पर जम्मू-कश्मीर
- नाबालिगों की वजह से हुए दो साल में हुए 237 एक्सीडेंट
गौरव रावत
जम्मू। देशभर में नाबालिगों के हाथों में स्टेयरिंग और दोपहिया वाहनों की कमान पुलिस और ट्रैफिक विभाग के लिए बड़ी चिंता बनती जा रही है। बीते दो सालों में नाबालिगों के वाहन चलाने की वजह से काटे गए चालानों की राशि के मामले में जम्मू-कश्मीर पूरे देश में दूसरे नंबर पर रहा है। चिंता की बात यह भी है कि नाबालिगों की लापरवाही और अनुभवहीनता की वजह से प्रदेश में दो साल में 237 सड़क हादसे हुए हैं।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023 और 2024 में जम्मू-कश्मीर में दोपहिया और चार पहिया वाहन चलाने वाले नाबालिगों के 65 ई-चालान काटे गए। इन ई-चालानों के जरिए 1,36,100 रुपये की राशि वसूली गई। यह राशि बिहार के बाद पूरे देश में सबसे ज्यादा है। बिहार में दो साल में नाबालिगों के 1,316 ई-चालान काटे गए, जिनके 44,27,600 रुपये वसूले गए। वहीं नाबालिगों की वजह से होने वाले सड़क हादसों की बात करें तो देशभर में 11,890 सड़क हादसे हुए। इनमें से 237 सड़क हादसे जम्मू-कश्मीर में हुए।
अभिभावकों को हो सकती है तीन साल की सजा
भारत सरकार के मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अनुसार नाबालिग के वाहन चलाने के मामले में अभिभावक या वाहन मालिक को तीन साल तक की जेल और पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही वाहन का पंजीकरण बारह महीने के लिए रद्द किया जा सकता है। साथ ही ऐसे नाबालिग को 25 साल की आयु पूरी कर लेने तक लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। हालांकि अभिभावक या वाहन मालिक यह सिद्ध कर दे कि नाबालिग ने उसकी जानकारी के बिना वाहन चलाया या उसने उसे रोकने की पूरी कोशिश की थी, उसे दंड का भागी नहीं माना जाएगा।
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ट्रैफिक पुलिस का हमेशा से ही प्रयास रहता है कि नाबालिग वाहन न चलाएं। इसके लिए समय-समय पर जागरुकता अभियान भी चलाए जाते रहते हैं। इस साल भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। पुलिस की पूरी कोशिश है कि नाबालिगों की वजह से सड़क हादसे न हों।
फारूक कैसर
एसएसपी ट्रैफिक, जम्मू
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- नाबालिगों की वजह से हुए दो साल में हुए 237 एक्सीडेंट
गौरव रावत
जम्मू। देशभर में नाबालिगों के हाथों में स्टेयरिंग और दोपहिया वाहनों की कमान पुलिस और ट्रैफिक विभाग के लिए बड़ी चिंता बनती जा रही है। बीते दो सालों में नाबालिगों के वाहन चलाने की वजह से काटे गए चालानों की राशि के मामले में जम्मू-कश्मीर पूरे देश में दूसरे नंबर पर रहा है। चिंता की बात यह भी है कि नाबालिगों की लापरवाही और अनुभवहीनता की वजह से प्रदेश में दो साल में 237 सड़क हादसे हुए हैं।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023 और 2024 में जम्मू-कश्मीर में दोपहिया और चार पहिया वाहन चलाने वाले नाबालिगों के 65 ई-चालान काटे गए। इन ई-चालानों के जरिए 1,36,100 रुपये की राशि वसूली गई। यह राशि बिहार के बाद पूरे देश में सबसे ज्यादा है। बिहार में दो साल में नाबालिगों के 1,316 ई-चालान काटे गए, जिनके 44,27,600 रुपये वसूले गए। वहीं नाबालिगों की वजह से होने वाले सड़क हादसों की बात करें तो देशभर में 11,890 सड़क हादसे हुए। इनमें से 237 सड़क हादसे जम्मू-कश्मीर में हुए।
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अभिभावकों को हो सकती है तीन साल की सजा
भारत सरकार के मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अनुसार नाबालिग के वाहन चलाने के मामले में अभिभावक या वाहन मालिक को तीन साल तक की जेल और पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही वाहन का पंजीकरण बारह महीने के लिए रद्द किया जा सकता है। साथ ही ऐसे नाबालिग को 25 साल की आयु पूरी कर लेने तक लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। हालांकि अभिभावक या वाहन मालिक यह सिद्ध कर दे कि नाबालिग ने उसकी जानकारी के बिना वाहन चलाया या उसने उसे रोकने की पूरी कोशिश की थी, उसे दंड का भागी नहीं माना जाएगा।
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ट्रैफिक पुलिस का हमेशा से ही प्रयास रहता है कि नाबालिग वाहन न चलाएं। इसके लिए समय-समय पर जागरुकता अभियान भी चलाए जाते रहते हैं। इस साल भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। पुलिस की पूरी कोशिश है कि नाबालिगों की वजह से सड़क हादसे न हों।
फारूक कैसर
एसएसपी ट्रैफिक, जम्मू