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Omar Abdullah: तीसरी पीढ़ी के उमर दूसरी बार बने मुख्यमंत्री... चौथी पीढ़ी भी राजनीति की पिच को भांप रही
Thu, 17 Oct 2024 03:49 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 17 Oct 2024 03:49 PM IST
सार
तीसरी पीढ़ी के उमर अब्दुल्ला दूसरी बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने हैं। चौथी पीढ़ी भी राजनीति की पिच को भांप रही है। 1971 से अब तक जम्मू कश्मीर को 13 मुख्यमंत्री मिले। दो बार शेख अब्दुल्ला और तीन बार फारूक मुख्यमंत्री बने।
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Omar Abdullah
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री के रूप में नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला अब्दुल्ला परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं। वह दूसरी बार सत्ता में आए हैं। इससे पहले उनके दादा शेख अब्दुल्ला दो बार मुख्यमंत्री की बागडोर संभाल चुके हैं। पिता फारूक अब्दुल्ला तीन बार सूबे के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
दादा शेख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बनने से पहले जम्मू कश्मीर रियासत के प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। इसी विधानसभा चुनाव से अब्दुल्ला परिवार की चौथी पीढ़ी भी राजनीति की पिच को भांव चुकी है।
उमर अब्दुल्ला के बेटे जहीर अब्दुल्ला और जमीर अब्दुल्ला ने इस चुनाव में प्रचार की कमान संभाली थी। कई प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार किया और रोड शो में भी शामिल हुए।
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पूरे देश में वंशवाद, परिवारवाद की राजनीति की चर्चा होती है। चुनावी मुद्दे भी बनते रहे, जम्मू कश्मीर में भी चुनावी मुद्दा बना, लेकिन चुनावी परिणाम पर इसका असर नहीं दिखा। अब्दुल्ला परिवार की तीसरी पीढ़ी सत्ता में लौट आई तो चौथी पीढ़ी की ट्रेनिंग हो रही है।
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दादा शेख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बनने से पहले जम्मू कश्मीर रियासत के प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। इसी विधानसभा चुनाव से अब्दुल्ला परिवार की चौथी पीढ़ी भी राजनीति की पिच को भांव चुकी है।
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उमर अब्दुल्ला के बेटे जहीर अब्दुल्ला और जमीर अब्दुल्ला ने इस चुनाव में प्रचार की कमान संभाली थी। कई प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार किया और रोड शो में भी शामिल हुए।
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पूरे देश में वंशवाद, परिवारवाद की राजनीति की चर्चा होती है। चुनावी मुद्दे भी बनते रहे, जम्मू कश्मीर में भी चुनावी मुद्दा बना, लेकिन चुनावी परिणाम पर इसका असर नहीं दिखा। अब्दुल्ला परिवार की तीसरी पीढ़ी सत्ता में लौट आई तो चौथी पीढ़ी की ट्रेनिंग हो रही है।
शुरूआत होती है, 1932 में जब कश्मीर में श्रीनगर से सटे सौर गांव में 5 दिसंबर 1905 को जन्मे शेख अब्दुल्ला शिक्षक की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए और राजनीतिक पार्टी ऑल जम्मू एंड कश्मीर मुस्लिम कॉन्फ्रेंस का गठन किया।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में एमएससी करने वाले शेख अब्दुल्ला ने राजनीति की शुरूआत कश्मीरियों की भलाई के मुद्दों के साथ की थी। समय के साथ उनकी राजनीति वंशवाद की ओर चली गई।
5 मार्च 1948 को वह जम्मू कश्मीर के दूसरे प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 25 फरवरी 1975 को मुख्यमंत्री बने और फिर दूसरी बार 9 जुलाई 1977 को सीएम बने। शेख अब्दुल्ला के निधन के बाद फारूक अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने। फारूक 1982, 1986 और 1996 में मुख्यमंत्री रहे।
वर्ष 1996 में हुई उमर की एंट्री
वर्ष 1996 में फारूक अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री रहते हुए उमर अब्दुल्ला को भी राजनीति उतार दिया। दो साल तक पार्टी की बैठकों, रैलियों में शामिल हुए। पिता फारूक के मुख्यमंत्री रहते हुए प्रशासनिक कार्यों को भी नजदीकी से देखा और 1998 के लोकसभा चुनाव में नेकां के टिकट पर श्रीनगर सीट से सांसद बने। मात्र 28 साल की उम्र में सांसद बने और केंद्रीय मंत्री भी।
वर्ष 1996 में फारूक अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री रहते हुए उमर अब्दुल्ला को भी राजनीति उतार दिया। दो साल तक पार्टी की बैठकों, रैलियों में शामिल हुए। पिता फारूक के मुख्यमंत्री रहते हुए प्रशासनिक कार्यों को भी नजदीकी से देखा और 1998 के लोकसभा चुनाव में नेकां के टिकट पर श्रीनगर सीट से सांसद बने। मात्र 28 साल की उम्र में सांसद बने और केंद्रीय मंत्री भी।
1999 के लोकसभा चुनाव में महबूबा मुफ्ती को हराकर फिर संसद पहुंचे और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री बने। 2001 में वो देश के सबसे युवा विदेश मंत्री बने। 2002 में फारूक ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया। उसी साल हुए विधानसभा चुनाव में उमर गांदरबल सीट से हार गए। 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में नेकां सत्ता में आई।
फारूक ने उमर को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे किया और जनवरी, 2009 में शेख अब्दुल्ला की तीसरी पीढ़ी उमर अब्दुल्ला पहली बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने। 2024 विस चुनाव में उमर के बेटे जहीर और जमीर भी प्रचार में उतरे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगले लोकसभा चुनावों में उमर का कोई एक बेटा मैदान में उतर सकता है।