जम्मू-कश्मीर: वैष्णो देवी माता परिसर में हिमपात ने बढ़ाया भक्तों का उत्साह, बैटरी कार-रोपवे सेवा से मिली राहत
बारिश व हिमपात से यात्रा पर आए लोगों को थोड़ी परेशानी हुई। शुक्रवार को कटड़ा व सांझी छत के बीच चलने वाली हेलिकॉप्टर सेवा धुंध व बारिश के कारण प्रभावित रही। बैटरी कार सेवा जारी रहने से भक्तों को राहत मिली। इसके अलावा भवन सहित त्रिकुटा पर्वत पर हिमपात ने ठंड काफी बढ़ा दी है।
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माता वैष्णो देवी परिसर में हुई बर्फबारी के से भक्तों का उत्साह और बढ़ गया है। बर्फबारी को देखकर भक्तों के चेहरे खिल उठे हैं। उनके मन की दोहरी मुराद पूरी हो गई है। शनिवार को मौसम साफ होने से भवन की तरफ जाने वाले यात्रियों को राहत मिली है। बैटरी कार और रोपवे सेवा लगातार जारी है।
शुक्रवार को बारिश व हिमपात से लोगों को थोड़ी परेशानी हुई। इस बीच कटड़ा व सांझी छत के बीच चलने वाली हेलिकॉप्टर सेवा धुंध व बारिश के कारण प्रभावित रही। हालांकि, बैटरी कार सेवा जारी रहने से भक्तों को राहत मिली। इसके अलावा भवन सहित त्रिकुटा पर्वत पर हिमपात ने ठंड काफी बढ़ा दी है।
लेकिन भक्तों का जोश भी सर्दी के हिसाब से ही बढ़ रहा है। बर्फ देखकर भी भक्त उत्साहित हो रहे हैं। भवन से मिली जानकारी के अनुसार माता वैष्णो देवी के दरबार में चार से पांच इंच तक हिमपात हुआ है। वहीं, त्रिकुटा पर्वत की ऊंची चोटियों पर एक फुट तक बर्फबारी हुई।
इस मौसम का भक्त भरपूर लुत्फ ले रहे हैं। बर्फबारी उन्हें खासी उत्साहित कर रही है। गाजियाबाद से माता के दर्शन के लिए आए श्रद्धालु मोहन यादव, रमेश कुमार, सुनीता यादव, अनामिका, आदि ने कहा कि भवन में हिमपात होता देख वह काफी जोश से भर गए थे।
उस समय ठंड भी कम लग रही थी। बाद में ठंड में इजाफा हुआ, लेकिन भवन मार्ग पर स्थानीय लोगों और श्राइन बोर्ड ने जगह-जगह आग जला रखी थी, जिससे काफी राहत मिली। उधर, पंजीकरण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार वीरवार को 15290 भक्तों ने प्राकृतिक पिंडियों के समक्ष नमन किया।
शुक्रवार देर शाम तक 12500 से अधिक भक्त पंजीकरण कराकर भवन की ओर प्रस्थान कर चुके थे। शुक्रवार सुबह त्रिकुट पर्वत पर बादलों ने डेरा जमा रखा था, और बारिश भी जारी थी। इसके कारण कटड़ा से सांझी छत के बीच चलने वाली हेलिकॉप्टर सेवा प्रभावित रही।
वहीं, बैटरी कार सेवा दिनभर जारी रही, लेकिन बर्फबारी के कारण रोपवे सेवा प्रभावित रही। बारिश के बीच श्रद्धालु बरसाती ओढ़कर भवन की ओर रवाना हुए।
आज से पहलवान सिंह का घर होगा माता मचैल का नया पता
किश्तवाड़ जिले के उपमंडल पाडर में मचैल माता का दरबार मकर संक्रांति के बाद बैसाखी तक बंद हो जाएगा। माता चंडी के दरबार में स्थापित माता महाकाली की मूर्ति को हर वर्ष की भांति इस बार भी वहां से उठाकर स्थानीय निवासी पहलवान सिंह के घर की छत पर बने एक छोटे से मंदिर में स्थापित किया जाएगा।
यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। माता के दरबार में कई दिनों से रुक-रुक कर बर्फबारी जारी है। शुक्रवार को भी वहां बर्फबारी हुई। दंतकथाओं व मचैल निवासियों के अनुसार एक समय था कि लद्दाख के जंस्कार इलाके में कभी अकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई थी।
तब बौद्ध धर्म के लोगों ने मचैल माता के दरबार में मन्नत मांगी थी कि इस इलाके में जब स्थिति सामान्य होगी तब यहां आकर माता चंडी के मंदिर में माता महाकाली की मूर्ति स्थापित करेंगे।
स्थिति सामान्य होने के उपरांत सभी बौद्ध धर्म के लोग माता महाकाली की मूर्ति लेकर मचैल पहुंचे तो बर्फबारी के चलते सभी लोगों को पहलवान सिंह के घर ही रुकना पड़ा। तब से यही परंपरा बनी हुई है कि मकर संक्रांति के दिन से बैसाखी तक माता की पूजा वहीं की जाएगी।