J&K: निजी भूमि क्षेत्र में उद्योग क्रांति लाने की तैयारी, इसी माह आ सकती है औद्योगिक संपदा विकास की गाइडलाइन
औद्योगिक संपदा विकास नीति की गाइडलाइन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके लिए उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की ओर से भी कुछ प्रस्ताव और सिफारिशें दी गई हैं। नीति को सरल बनाने की कोशिश की जा रही है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जम्मू-कश्मीर के निजी क्षेत्र में उद्योग क्रांति लाने की तैयारी की जा रही है। इस कड़ी में जून के मध्य तक जम्मू-कश्मीर निजी औद्योगिक संपदा विकास नीति 2021-30 की गाइडलाइन जारी होने की उम्मीद है।
इस गाइडलाइन के बाद उद्योग एवं वाणिज्य विभाग जम्मू के निदेशक के पास पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होगी। जिसमें निजी भूमि क्षेत्र में नई औद्योगिक संपदाएं स्थापित करने की पहल होगी। निजी औद्योगिक संपदाओं के माध्यम से प्रति वर्ष लगभग 2000 कनाल (250 एकड़) भूमि विकसित करने का लक्ष्य है।
सूत्रों के अनुसार निजी औद्योगिक संपदा विकास नीति की गाइडलाइन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके लिए उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की ओर से भी कुछ प्रस्ताव और सिफारिशें दी गई हैं। नीति को सरल बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि जम्मू कश्मीर में निवेशकों की बढ़ती औद्योगिक भूमि की मांग को पूरा करने में मदद मिल सके।
जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक क्षेत्र में देश विदेश के निवेशकों ने रुझान दिखाया है, लेकिन भूमि की मांग के मुताबिक उससे काफी कम भूमि की उपलब्धता रही है। हालांकि कठुआ के बागथली औद्योगिक संपदा में सबसे अधिक हजारों कनाल राज्य भूमि पर नई संपदाएं विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन की मांग और उपलब्धता में भारी अंतर के चलते निजी औद्योगिक संपदा अहम भूमिका निभाएगी।
कठुआ, घगवाल, सांबा और जम्मू में निजी भूमि चिह्नित
सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में निवेशकों द्वारा 62000 कनाल से अधिक भूमि की मांग की गई है, जिसमें जम्मू संभाग में 34000 से अधिक और कश्मीर संभाग में 27000 से अधिक भूमि मांगी गई है। इसमें 99 हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश के प्रस्ताव हैं।
उद्योग विभाग को जम्मू संभाग में निजी क्षेत्र में 6 से 8 हजार कनाल भूमि मिलने की उम्मीद है। इसमें प्रमुख रूप से कठुआ, घगवाल, सांबा और जम्मू में कई निजी भूमि चिह्नित की गई हैं। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग जम्मू के निदेशक डाॅ. अरुण मन्हास के अनुसार नई निजी औद्योगिक नीति को काफी सरल बनाया गया है। इससे निजी क्षेत्र में उद्योग गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
40 कनाल जमीन वाला कर सकता है आवेदन
जम्मू-कश्मीर निजी औद्योगिक संपदा विकास नीति में गत फरवरी में संशोधन किया गया था, जिसकी अभी गाइडलाइन जारी की जानी है। इस नीति के तहत प्रदेश या देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में निजी औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग और औद्योगिक संपदा विकसित कर सकता है, बशर्ते उसके पास 40 कनाल (पांच एकड़) या उससे अधिक जमीन होनी चाहिए।
न्यूनतम जमीन में कम से कम 5 इकाइयों के प्रस्ताव हों, जिसमें एक इकाई 50 प्रतिशत जमीन से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस नीति में भूमि की खरीद पर स्टांप शुल्क, भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क और भूमि बिक्री विलेख पर पंजीकरण शुल्क की शत प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रावधान रखा गया है। नीति के तहत 30 दिन के भीतर आवेदन की समीक्षा करके संबंधित मंडलायुक्त के पास भेजा जाएगा, ताकि जमीन संबंधी स्वीकृतियां हासिल हो सकें।