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शिक्षकों की शरण में जम्मू-कश्मीर पुलिस : भटके नौजवानों को सही राह दिखाने की अपील

Mon, 05 Apr 2021 02:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 05 Apr 2021 02:26 AM IST
सार

  • आईजीपी विजय कुमार बोले- सामाजिक नियंत्रण बहुत जरूरी

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Jammu- Kashmir Police seeks teachers help to guide misguided youths of the valley
IG Vijay Kumar - फोटो : ani

विस्तार

कश्मीर घाटी में पाकिस्तान के बहकावे में आकर आतंकवाद में शामिल होने वाले भटके हुए युवाओं को सही राह दिखाने के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस अब शिक्षकों से उनकी काउंसिलिंग करने की अपील कर रही है। पुलिस के अनुसार समाज का यह तबका युवाओं को सही राह दिखाने में अहम भूमिका निभा सकता है। 

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जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजीपी विजय कुमार ने कहा कि पकिस्तान लगातार कश्मीर के नौजवानों को सोशल मीडिया के जरिये भड़काने, कट्टरपंथ की ओर झुकाने और उन्हें आतंकवाद में शामिल होने की कोशिश करता आया है।
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आईजीपी ने सोनवार में कृष्णा ढाबा के मालिक का उदहारण देते हुए कहा कि उस हमले को अंजाम देने वाला 17 वर्ष का था, बागात में पुलिस कर्मियों पर हमले को अंजाम देने वाला आतंकी भी छोटा था और जो नौगाम में हमला हुआ वो भी नए लड़कों (आतंकियों) ने अंजाम दिया है।
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 भटके हुए युवाओं को वापस मुख्यधारा में शामिल करने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस और भारतीय सेना पिछले कुछ वर्षों से काफी प्रयास कर रही है। आईजीपी ने बताया कि वह लगातार ऐसे बच्चों के अभिभावकों के संपर्क में हैं और मीडिया के लोगों से भी अपील करते हैं कि वह भी इनके अभिभावकों के साथ संपर्क कर उन्हें अपने बच्चों की काउंसिलिंग करने को कहें ताकि वह इस राह को छोड़ वापस सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें। इससे पहले पुलिस और सेना भटके हुए नौजवानों को सही राह पर लाने के लिए सिविल सोसाइटी के जिम्मेदार नागरिकों, धर्म गुरुओं और उनके अभिभावकों का सहारा लेती आई है।

आईजीपी विजय कुमार बोले-सोशल कंट्रोल घर से बहुत जरूरी
आईजीपी विजय कुमार ने हाल ही में कश्मीर यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान भी शिक्षकों से बच्चों के सोशल कंट्रोल का रोल निभाने के लिए उनसे अपील की थी। आईजीपी ने कहा कि सबसे पहले युवाओं को समझाने का घर पर रोल अभिभावकों का होता, उसके बाद स्कूल और कॉलेज में टीचरों का और सबसे आखिर में पुलिस का होता है। 


उन्होंने कहा कि सोशल कंट्रोल में घर वाले, टीचर, आदि अपनी भूमिका निभा सकते हैं। आईजीपी ने कहा कि इस रास्ते पर जाकर या तो जेल मिलती या फिर इसका नतीजा मौत होती है। इस वर्ष अब तक 20 स्थानीय युवा आतंकवाद में शामिल हुए हैं जिनमें से आठ मारे जा चुके हैं। 3 को गिरफ्तार किया गया, जबकि बाकी के अभी भी सक्रिय हैं।

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