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जम्मू-कश्मीर: इन गांवों में पहले होते थे सिर्फ बम धमाके, अब सुनाई देने लगी है शहनाई

Wed, 14 Apr 2021 02:40 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Wed, 14 Apr 2021 02:40 PM IST
सार

संघर्ष विराम के चलते अब बरसों बाद पाकिस्तानी चौकियों के सामने धूमधाम से आयोजित हो रहे हैं वैवाहिक समारोह।

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Jammu-Kashmir: now the shehnai started to be heard in the villages of Poonch near the LoC
निकाह के दौरान दूल्हा व परिजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा के पास गांव में जहां वर्षों से अक्सर पाकिस्तानी सेना की तरफ से की जाने वाली गोलाबारी के चलते दिन रात बम धमाके सुनाई देते थे। वहीं अब उन गांव में ढोल और शहनाई की धुनें सुनाई देने लगी हैं। नियंत्रण रेखा पर शांति का माहौल बहाल होने से गांव गगड़िया निवासी मुंबई में पले बढ़े परवेज अहमद एवं तरन्नुम के परिवारवाले शादी के लिए विशेष तौर पर पैतृक गांव लौटे और सोमवार को धूमधाम से ढोल बाजों के साथ डेढ़ सौ लोगों की बरात लेकर परवेज अहमद तरन्नुम के घर पहुंचे।
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अपने रीति रिवाज के साथ निकाह के बाद तरन्नुम को डोली में बिठा कर घर लाए। मुंबई से विशेष तौर पर गांव में शादी करने पहुंचे इस जोड़े का कहना है कि हम लोग मुंबई से अकसर गांव आया करते थे, लेकिन यहां हर समय होने वाली गोलाबारी के कारण घुटन महसूस होती थी। कुछ समय पहले हमें पता चला कि नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम होने के बाद गांव में शांति है। इस पर घर वालों और हमने गांव में शादी का आयोजन करने का फैसला किया। आज हम काफी खुश हैं।
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समारोह के दौरान की जाती थी गोलाबारी
ग्रामीण बशीर अहमद, नजीर बट्ट, गुलाम अहमद बट्ट ने कहा कि सावजियां, गगड़ियां, छूल और गली मैदान जैसे गांव में कई वर्षों से लोग घरों में शादी ब्याह सहित कोई बड़ा आयोजन नहीं कर पा रहे थे। इन गांवों में किसी भी तरह के आयोजन पर पाकिस्तानी सेना की तरफ से गोलाबारी शुरू कर दी जाती थी। इसके चलते जहां कुछ लोग घरों के अंदर ही सादगी से दस बीस रिश्तेदारों के सामने बच्चों के निकाह पढ़वा कर शादियां कर लिया करते थे।
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जिन लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी थी, वह गांव से बाहर सुरक्षित स्थान वाले गांव में रिश्तेदारों के यहां बच्चों के शाही समारोह आयोजित कर लिया करते थे। गांव में शाही ब्याह में ढोल बाजे शहनाइयां बजाना तो दूर की बात है। लोगों द्वारा अपनी घास एवं फसलों की कटाई के समय ढोल बजाने की परंपरा तक को छोड़ दिया था। अब इन गांव में दशकों बाद फिर से पहले की तरह लोग घरों में बच्चों के शादी समारोह आयोजित करने लगे हैं। यहां रात के समय भी सैकड़ों लोग एकत्र होकर ढोल, बाजों एवं शहनाई की धुन पर नाचते हुए मौजमस्ती करते और दावतें करते हैं। अभी पांच दिन पहले भी गांव सावजियां में गुलाम अहमद बट्ट के बेटे की शादी हुई।


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गौरतलब है कि नियंत्रण रेखा पर बगयालदरा के कलसां गांव में सात वर्ष पूर्व एक विवाह समारोह के दौरान पाकिस्तानी सेना की तरफ से की गई गोलाबारी में 21 वर्षीय युवक की मौत हो गई थी। इसके बाद जिले में नियंत्रण रेखा के करीबी गांव में लोगों की तरफ से शादी ब्याह सहित सभी प्रकार के समारोह आयोजित करने बंद कर दिए थे। अब नियंत्रण संघर्ष विराम को सही प्रकार लागू किया जाने से नियंत्रण रेखा के गांव में फिर से पुराने दिन लौटने लगे हैं।
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