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Jammu News: कश्मीरी गलीचों के बुनकरों को मिलेंगे स्टील गलीचा लूम्स
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श्रीनगर। भारतीय गलीचा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) की तरफ से कश्मीर के हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग के पंजीकृत सक्रिय बुनकरों को आधुनिक स्टील गलीचा लूम्स वितरित किए जाएंगे। इन लूम्स के चयन के लिए ''''ड्रॉ ऑफ लॉट्स'''' 18 फरवरी को आईआईसीटी के नौशेरा स्थित परिसर में आयोजित किया जाएगा।
आईआईसीटी श्रीनगर के निदेशक ज़ुबैर अहमद ने कहा कि केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड, केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के तहत ''''ऊन प्रसंस्करण योजना'''' के तहत 43.70 लाख रुपये की लागत से 100 आधुनिक स्टील लूम्स बुनकरों को वितरित करने की स्वीकृति दी है। उन्होंने बताया कि ये लूम्स आईआईसीटी की तरफ से बुनकरों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन और संशोधित किए गए हैं, जो घंटों तक बैठकर विश्व प्रसिद्ध कश्मीरी गलीचों की बुनाई करते हैं।
नए संशोधित लूम्स पारंपरिक लकड़ी के गलीचा लूम्स का स्थान लेंगे, जिनके उपयोग से बुनकरों में खासतौर पर पीठ दर्द जैसी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती थीं। आईआईसीटी के निदेशक ने सभी संबंधित लाभार्थियों से आग्रह किया कि वे 18 फरवरी को सुबह 11 बजे नौशेरा स्थित आईआईसीटी परिसर में ड्रॉ ऑफ लॉट्स में भाग लेंं। संवाद
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आईआईसीटी श्रीनगर के निदेशक ज़ुबैर अहमद ने कहा कि केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड, केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के तहत ''''ऊन प्रसंस्करण योजना'''' के तहत 43.70 लाख रुपये की लागत से 100 आधुनिक स्टील लूम्स बुनकरों को वितरित करने की स्वीकृति दी है। उन्होंने बताया कि ये लूम्स आईआईसीटी की तरफ से बुनकरों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन और संशोधित किए गए हैं, जो घंटों तक बैठकर विश्व प्रसिद्ध कश्मीरी गलीचों की बुनाई करते हैं।
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नए संशोधित लूम्स पारंपरिक लकड़ी के गलीचा लूम्स का स्थान लेंगे, जिनके उपयोग से बुनकरों में खासतौर पर पीठ दर्द जैसी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती थीं। आईआईसीटी के निदेशक ने सभी संबंधित लाभार्थियों से आग्रह किया कि वे 18 फरवरी को सुबह 11 बजे नौशेरा स्थित आईआईसीटी परिसर में ड्रॉ ऑफ लॉट्स में भाग लेंं। संवाद
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