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Jammu News: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने दिया चलो कश्मीर का नारा
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श्रीनगर। पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के बाद कश्मीर घाटी में पर्यटन कारोबार पर प्रभाव पड़ा। पर्यटन स्थल पहलगाम, गुलमर्ग, सोनमर्ग समेत अन्य सभी पर्यटन स्थलों पर सन्नाटा पसर गया था। पर्यटन से जुड़े लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था, लेकिन इस बीच जिस किसी से भी हुआ उसने कश्मीर में पर्यटन को पटरी पर लाने के प्रयास किए। उनमें बाहरी राज्यों के टूर ऑपरेटर्स, ट्रेवल एसोसिएशंस आदि शामिल हैं।
वहीं कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ऐसे भी हैं जिन्होंने चलो कश्मीर का नारा लगाते हुए खुद कश्मीर आकर यहां के हालात और माहौल को अपने कैमरे में कैद कर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया ताकि लोगों तक एक सकारात्मक संदेश पहुंच सके कि कश्मीर में माहौल अच्छा है। यहां सब कुछ सुरक्षा के लिहाज़ से भी सामान्य हैं। इनमें से एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और फ्रीलांस पत्रकार पियूष पंजाबी भी हैं जिन्होंने करीब दो सप्ताह का समय कश्मीर के पर्यटन स्थलों और अंदरूनी इलाकों में बिताया और लोगों तक संदेश पहुंचाया कि डरने की कोई जरूरत नहीं और चलो कश्मीर का एक नारा लगाया।
पियूष ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद उन्होंने देखा कि लोग कश्मीर, लद्दाख और स्पीति के अपने ट्रिप कैंसिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कि अगर हम लोग ऐसा करेंगे तो कश्मीर और कश्मीरियों का क्या बनेगा क्योंकि कश्मीर में करीब 70 प्रतिशत लोग पर्यटन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। पियूष ने कहा कि आतंकवादी तो चाहते ही हैं कि दहशत फैलाकर लोगों को कश्मीर से दूर रख सकें और वहां विकास न हो। अगर हम घर बैठेंगे तो हम उनके मंसूबों को कामयाब करेंगे और हम ऐसा क्यों होने दें। इसलिए मैंने कश्मीर आने की ठानी ताकि अपने कंटेंट के ज़रिये लोगों को कश्मीर के असली हालातों से रूबरू करवा सकूं और कश्मीरी लोगों की सहायता में अपना कुछ योगदान दे सकूं।
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पियूष ने कहा कि उन्होंने करीब 12 दिन कश्मीर में बिताए। अनंतनाग, पहलगाम, श्रीनगर, डल झील, दकसुम के अलावा घाटी के अंदरूनी इलाकों में घूमे, लेकिन उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि हालात असामान्य हैं। लोगों से काफी सहयोग मिला, उन्होंने मेहमाननवाज़ी की और कभी कही भी कुछ ऐसा महसूस होने नहीं दिया। मैं तो उन इलाकों में भी जाना चाहता था जो बंद पड़े हैं लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते नहीं जा पाया। पियूष ने कहा कि कश्मीर की एक बात मुझे सबसे ज़्यादा पसंद आई - एक ही जगह पर मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा धार्मिक सद्भाव की एक बेहद अच्छी मिसाल।
ऐसे ही एक अन्य इन्फ्लुएंसर अक्षय ने भी कहा कि उन्होंने हाल ही में शुरू हुई वंदे भारत और कश्मीर के पर्यटन स्थलों का दौरा कर अपने कंटेंट के ज़रिये पॉजिटिव संदेश देने की कोशिश की ताकि लोग ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में कश्मीर आएं और यहां पर्यटन एक बार फिर से पटरी पर लौट सके।
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वहीं कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ऐसे भी हैं जिन्होंने चलो कश्मीर का नारा लगाते हुए खुद कश्मीर आकर यहां के हालात और माहौल को अपने कैमरे में कैद कर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया ताकि लोगों तक एक सकारात्मक संदेश पहुंच सके कि कश्मीर में माहौल अच्छा है। यहां सब कुछ सुरक्षा के लिहाज़ से भी सामान्य हैं। इनमें से एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और फ्रीलांस पत्रकार पियूष पंजाबी भी हैं जिन्होंने करीब दो सप्ताह का समय कश्मीर के पर्यटन स्थलों और अंदरूनी इलाकों में बिताया और लोगों तक संदेश पहुंचाया कि डरने की कोई जरूरत नहीं और चलो कश्मीर का एक नारा लगाया।
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पियूष ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद उन्होंने देखा कि लोग कश्मीर, लद्दाख और स्पीति के अपने ट्रिप कैंसिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कि अगर हम लोग ऐसा करेंगे तो कश्मीर और कश्मीरियों का क्या बनेगा क्योंकि कश्मीर में करीब 70 प्रतिशत लोग पर्यटन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। पियूष ने कहा कि आतंकवादी तो चाहते ही हैं कि दहशत फैलाकर लोगों को कश्मीर से दूर रख सकें और वहां विकास न हो। अगर हम घर बैठेंगे तो हम उनके मंसूबों को कामयाब करेंगे और हम ऐसा क्यों होने दें। इसलिए मैंने कश्मीर आने की ठानी ताकि अपने कंटेंट के ज़रिये लोगों को कश्मीर के असली हालातों से रूबरू करवा सकूं और कश्मीरी लोगों की सहायता में अपना कुछ योगदान दे सकूं।
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पियूष ने कहा कि उन्होंने करीब 12 दिन कश्मीर में बिताए। अनंतनाग, पहलगाम, श्रीनगर, डल झील, दकसुम के अलावा घाटी के अंदरूनी इलाकों में घूमे, लेकिन उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि हालात असामान्य हैं। लोगों से काफी सहयोग मिला, उन्होंने मेहमाननवाज़ी की और कभी कही भी कुछ ऐसा महसूस होने नहीं दिया। मैं तो उन इलाकों में भी जाना चाहता था जो बंद पड़े हैं लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते नहीं जा पाया। पियूष ने कहा कि कश्मीर की एक बात मुझे सबसे ज़्यादा पसंद आई - एक ही जगह पर मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा धार्मिक सद्भाव की एक बेहद अच्छी मिसाल।
ऐसे ही एक अन्य इन्फ्लुएंसर अक्षय ने भी कहा कि उन्होंने हाल ही में शुरू हुई वंदे भारत और कश्मीर के पर्यटन स्थलों का दौरा कर अपने कंटेंट के ज़रिये पॉजिटिव संदेश देने की कोशिश की ताकि लोग ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में कश्मीर आएं और यहां पर्यटन एक बार फिर से पटरी पर लौट सके।