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Jammu News: घाटी में नवरोज पर सदियों से ‘लीच थेरेपी’ की परंपरा
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श्रीनगर। कश्मीर घाटी में नवरोज के अवसर पर हजारों की संख्या में लोग ‘लीच थेरेपी” करवाते हैं। आज के दिन इसको शुभ भी माना जाता है क्योंकि लोगों का मानना है कि यह इलाज उनके पैगम्बरों के समय से चलता आ रहा है।
आज के दिन भारी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग श्रीनगर की हज़रतबल दरगाह जाकर विशेष मजलिस में भाग लेकर विशेष दुआएं करते हैं। दरगाह के बाहर कईं लोग इस लीच थेरेपी को करवाते नज़र आए। यावर शफी नामी एक युवक ने बताया कि वह पिछले तीन सालों से लगातार नवरोज के दिन दरगाह में आकर लीच थेरेपी करवा रहे हैं। उन्हें स्किन प्रॉब्लम रहती थी लेकिन जब से उन्होंने इस थेरेपी को अपनाया है तब से उन्हें आराम मिलना शुरू हुआ है।
गांदरबल के फारूक अहमद ने बताया कि यह इलाज का पारंपरिक तरीका है। पिछले करीब 20 वर्षों से अधिक समय से लोगों का इलाज कर रहे हैं। हम एक लीच (जोंक) को मरीज की त्वचा पर उस जगह रखते हैं जहां हलकी सूजन देखने को मिलती हो और कुछ देर बाद जब वेह जोंक गंदा खून चूसकर भर जाती है वो खुद ब खुद गिर जाती है। फारूक ने बताया कि इस थेरेपी से न सिर्फ इंसान के शरीर में जमा हुए टोक्सिन निकल जाते हैं बल्कि जोंक से कुछ एंजाइम भी इंसान की बॉडी में ट्रांसफर होते हैं जो शरीर के लिए अच्छे होते हैं। उन्होंने बताया कि इस दिन इस थेरेपी को करवाना लोग शुभ भी मानते हैं क्योंकि यह इलाज हमारे पैगम्बरों के समय से चलता आ रहा है।
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आज के दिन भारी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग श्रीनगर की हज़रतबल दरगाह जाकर विशेष मजलिस में भाग लेकर विशेष दुआएं करते हैं। दरगाह के बाहर कईं लोग इस लीच थेरेपी को करवाते नज़र आए। यावर शफी नामी एक युवक ने बताया कि वह पिछले तीन सालों से लगातार नवरोज के दिन दरगाह में आकर लीच थेरेपी करवा रहे हैं। उन्हें स्किन प्रॉब्लम रहती थी लेकिन जब से उन्होंने इस थेरेपी को अपनाया है तब से उन्हें आराम मिलना शुरू हुआ है।
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गांदरबल के फारूक अहमद ने बताया कि यह इलाज का पारंपरिक तरीका है। पिछले करीब 20 वर्षों से अधिक समय से लोगों का इलाज कर रहे हैं। हम एक लीच (जोंक) को मरीज की त्वचा पर उस जगह रखते हैं जहां हलकी सूजन देखने को मिलती हो और कुछ देर बाद जब वेह जोंक गंदा खून चूसकर भर जाती है वो खुद ब खुद गिर जाती है। फारूक ने बताया कि इस थेरेपी से न सिर्फ इंसान के शरीर में जमा हुए टोक्सिन निकल जाते हैं बल्कि जोंक से कुछ एंजाइम भी इंसान की बॉडी में ट्रांसफर होते हैं जो शरीर के लिए अच्छे होते हैं। उन्होंने बताया कि इस दिन इस थेरेपी को करवाना लोग शुभ भी मानते हैं क्योंकि यह इलाज हमारे पैगम्बरों के समय से चलता आ रहा है।
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