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देश को एकजुट रखने की कोशिश डॉ. मनमोहन की सबसे बड़ी विरासत : फारूक
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श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, पूर्व प्रधानमंत्री की सबसे बड़ी विरासत यह थी कि उन्होंने देश को एकजुट रखने की कोशिश की। डॉ. मनमोहन के कैबिनेट सहयोगी रहे अब्दुल्ला ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता में कहा, डॉ. सिंह एक बेहतरीन अर्थशास्त्री थे। उन्होंने अर्थव्यवस्था को खोला। आज जब हम ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की बात करते हैं, तो यह सिंह की वजह से है।
डॉ. मनमोहन ने पाकिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने की कोशिश की। उम्मीद है कि वह समय जरूर आएगा। अक्षय ऊर्जा मंत्री रहे डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि राजीव गांधी व नरसिम्हा राव के शासन के दौरान अर्थव्यवस्था को खोला गया। आज हमारी अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है। मैं उनकी कैबिनेट में मंत्री था और भारत में पहली बार किसी ने अक्षय ऊर्जा को मान्यता दी। मैं मेरे परिवार और पार्टी की ओर से डॉ. मनमोहन को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
नेकां प्रमुख ने कहा कि मनमोहन सिंह की सरकार ने कश्मीरी पंडितों को वापस लाने और जम्मू-कश्मीर में उनकी कठिनाइयों को दूर करने का सबसे बड़ा कदम उठाया। तीन हजार से अधिक कश्मीरी पंडित यहां लौट आए, उनके बच्चों को नौकरी दी गई। जम्मू में जगती कॉलोनी बसाई गई। मौजूदा सरकार के साथ-साथ आने वाली सरकारों को भी डॉ. सिंह से सीख लेनी चाहिए। ऐसा नेता ढूंढना न केवल कांग्रेस के लिए बल्कि पूरे देश के लिए बहुत मुश्किल होगा। उनके जैसे बहुत कम लोग हैं। कोई दूसरा गांधी नहीं था, न ही कोई दूसरा नेहरू या शेर-ए-कश्मीर (शेख मो. अब्दुल्ला) था।
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डॉ. मनमोहन ने पाकिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने की कोशिश की। उम्मीद है कि वह समय जरूर आएगा। अक्षय ऊर्जा मंत्री रहे डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि राजीव गांधी व नरसिम्हा राव के शासन के दौरान अर्थव्यवस्था को खोला गया। आज हमारी अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है। मैं उनकी कैबिनेट में मंत्री था और भारत में पहली बार किसी ने अक्षय ऊर्जा को मान्यता दी। मैं मेरे परिवार और पार्टी की ओर से डॉ. मनमोहन को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
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नेकां प्रमुख ने कहा कि मनमोहन सिंह की सरकार ने कश्मीरी पंडितों को वापस लाने और जम्मू-कश्मीर में उनकी कठिनाइयों को दूर करने का सबसे बड़ा कदम उठाया। तीन हजार से अधिक कश्मीरी पंडित यहां लौट आए, उनके बच्चों को नौकरी दी गई। जम्मू में जगती कॉलोनी बसाई गई। मौजूदा सरकार के साथ-साथ आने वाली सरकारों को भी डॉ. सिंह से सीख लेनी चाहिए। ऐसा नेता ढूंढना न केवल कांग्रेस के लिए बल्कि पूरे देश के लिए बहुत मुश्किल होगा। उनके जैसे बहुत कम लोग हैं। कोई दूसरा गांधी नहीं था, न ही कोई दूसरा नेहरू या शेर-ए-कश्मीर (शेख मो. अब्दुल्ला) था।
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